राष्ट्रीय उद्यान के अंदर ये अधिकार देने वाला छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य
इस फैसले से फ़ूड चेन.. ईको टूरिज्म, जैव विविधता..सभी पर पॉजिटिव असरकांगेर नेशनल पार्क के सुदूर वनांचल स्थित गुड़ियापदर गांव के 120 आदिवासियों ने जंगल बचाने पेश की मिसाल...मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नानगुर के भेंट मुलाकात कार्यक्रम में हितग्राहियों को सौंपा सीएफआरआर सर्टिफिकेट
रायपुर कांगेर नेशनल पार्क 25 मई 2022 /// । कांगेर वैली नेशनल पार्क में दूरस्थ वनांचल गांव गुड़ियापदर । गांव में दूर-दूर फैले सिर्फ 29 घर , ऊंचे-ऊंचे साल के पेड़ और चारों तरफ पहाड़ी मैना का कलरव । घनघोर जंगल में स्थित इस गांव के गोंड़ आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपने तीर-कमान देवी को समर्पित कर दिए हैं और कसम खा ली है कि अब वे कभी शिकार नहीं करेंगे ।
कांगेर वैली नेशनल पार्क के सुदूर वनांचल गांव गुड़ियापदर में 29 आदिवासी परिवारों के 120 सदस्यों को जैसे ही पता चला कि उन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मिलने वाला है , उन्होंने जंगल बचाने ऐसी पहल की जिसने मिसाल कायम कर दी है । सदस्यों ने गुड़ी के सामने शपथ ली कि अब कभी जानवर का शिकार नहीं करेंगे , जंगल की फ़ूड चेन और जैव विविधता बनाये रखने में मदद करेंगे ।
गुड़ी देवी से ली अनुमति - देवी माँ अनुमति दो कि हम जानवरों की बलि नहीं दें । हम सालों से चली आ रही अपने पूर्वजों की इस प्रथा को खत्म करना चाहते हैं । गुड़ियापदर देवी माँ ने इसकी तत्काल अनुमति दे दी । अनुमति मिलते ही गोंड समुदाय के सदस्यों ने तीर-कमान देवी के सामने अर्पित कर दिए । गुड़ियापदर में रहने वाले गोंड समुदाय के शंकर बारसे बताते हैं कि सुनने में भले ही काल्पनिक लगे लेकिन हम आदिवासी परिवारों को विश्वास है कि अपनी देवी से बात करते हैं और उनकी अनुमति लेकर ही कोई काम कर सकते हैं ।
आदिवासी परिवारों के हित में सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रदेश में एक अनोखा उदाहरण है। छत्तीसगढ़ यह अधिकार देने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले ओड़िसा में इस अधिकार को मान्यता मिली है। गुड़ियापदार कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित लगभग 29 घरों का एक छोटा सा गांव है। यहां रहने वाले गोंड समुदाय से संबंधित हैं और वर्षा आधारित खेती (चावल, कोदो-कुटकी, दाल और केले) और निर्वाह के लिए लघु वन उपज पर निर्भर हैं।




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