6 माह में 10 प्रतिशत बढ़ी पारेषण क्षमता
रायपुर। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति हेतु पारेषण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने का कार्य पाॅवर ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इस दिशा में नये सबस्टेशनों की स्थापना, लाईनों का विस्तार, ट्रांसफार्मरों का ऊर्जीकरण एवं पारेषण क्षमता में वृद्धि जैसे अनेक कार्य किये जा रहे हैं।
विदित हो कि बस्तर में सतत् बिजली आपूर्ति हेतु हेतु वर्तमान में 400 के0व्ही0 का एक सबस्टेशन क्रियाशील है। 33/11 के.व्ही. एवं 11/04 के.व्ही. के सैंक़ड़ों उपकेन्द्रों के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में निरन्तर बिजली सप्लाई की जा रही है। नई सरकार के गठन उपरान्त धरसीवाँ कुथरेल में 220 के.व्ही. सबस्टेशन में 160 एमव्हीए का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। पारेषण क्षमता अब बढ़कर 7 हजार एमव्हीए हो गई है, जिसमें से 10 प्रतिशत वृद्धि इस 6 माह की है। औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु रायपुर के समीप उरला में सेक्टर-ए के लिए 40 एमव्हीए का तथा सेक्टर सी के लिए 40 एमव्हीए का नया ट्रांसफार्मर लगाया गया। इससे पारेषण क्षमता में वृद्धि के साथ ही पूर्व से लम्बित आवेदनों का निराकरण किया गया एवं उपभोक्ताओं को नये कनेक्शन तीव्रता से प्रदान किये गये हैं।
पाॅवर कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जून, 2019 में ही 220 के.व्ही उपकेन्द्र भिलाई स्थित सबस्टेशन में 160 एमव्हीए का नया ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किया गया, जिससे अब इस पारेषण सबस्टेशन की कुल क्षमता 695 एमव्हीए हो गई है और इस क्षेत्र में निरन्तर बिजली सप्लाई के लिए पर्याप्त है। इस ट्रांसफार्मर के लगने से 220 के.व्ही. उपकेन्द्र की क्षमता में वृद्धि हुई है और संबंधित क्षेत्र के रहवासियों को ओवर लोडिंग जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।
प्रदेश में अप्रैल माह के आंकड़ों के अनुसार पारेषण प्रणाली की सुदृढ़ीकरण हेतु प्रयास किये गये है जिससे पाॅवर कंपनी के अति उच्चदाब उपकेन्द्रों की संख्या 118 नग हो चुकी है तथा अति उच्चदाब लाईनों की लंबाई 12300 सर्किट किलोमीटर तक पहंुच चुकी है। इसी प्रकार 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्रों की संख्या 1248 नग हो चुकी है एवं 33 केव्ही लाईनों की लंबाई 22088 किलोमीटर तक विस्तार कर लिया गया है। 11/04 उपकेन्द्रों की संख्या भी बढ़कर डेढ़ लाख से अधिक हो गई है। 11 के.व्ही. लाईनों की लंबाई 1 लाख 12 हजार तक पहुंच चुकी है। इसी के साथ-साथ निम्नदाब लाइनों की लंबाई में एक लाख 90 हजार तक वृद्धि हुई है।
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