रायपुर, // स्वास्थ्य विभाग के सिकल सेल संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप
में विकसित किया जाएगा। ब्लड ट्रांसफ्यूजन, स्टेम सेल थेरेपी और हिमोग्लोबिनोपैथी
जैसी सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी। आज रायपुर के नवीन विश्रामभवन में आयोजित विश्व
सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इसकी घोषणा की।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रदेश के सभी जिलों में
नवीन सिकल सेल जांच एवं परामर्श केन्द्र शुरू करने की घोषणा की। जिला अस्पतालों से
संबद्ध इन केन्द्रों में सिकल सेल पीड़ितों को जांच एवं परामर्श की सुविधा मिलेगी।
विधायकगण सर्वश्री धनेन्द्र साहू,
कुलदीप जुनेजा और गुलाब सिंह कमरो
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने विश्व
सिकल सेल दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सिकल सेल एक चुनौती के रूप
में छत्तीसगढ़ में भी मौजूद है। इनके अधिकांश वाहकों को स्वयं पता नहीं होता कि वे
आनुवांशिक रूप से इस रोग से प्रभावित हैं। जागरूकता और जानकारी के अभाव में सिकल
सेल से पीड़ित लोग तकलीफदेह जिंदगी जीते हैं। बचपन में ही बीमारी की पहचान होने से
उचित प्रबंधन, खान-पान, सही जीवन शैली और उपचार से वे सामान्य और आरामदायक जिंदगी जी सकते
हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिकल सेल पीड़ितों और इसके वाहकों का पता
लगाने के लिए सभी लोगों के खून की जांच की जानी चाहिए। लगातार अनुसंधानों के बाद
भी इस बीमारी का इलाज नहीं खोजा जा सका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे
संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए जो इस पर शोध करें और इसका उपचार ढूंढे। सरकार
इसके लिए सभी संसाधन मुहैया कराएगी। सिकल सेल का पता लगाने स्कूलों में अनिवार्य
रूप से बच्चों के खून की जांच की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव
ने कार्यक्रम में कहा कि भावी पीढ़ी को सिकल सेल से बचाने के लिए जानकारी और
जागरूकता जरूरी है। विवाह के पूर्व वर-वधू को अपने रक्त की जांच जरूर करवाना
चाहिए। सिकल सेल वाहक लड़के-लड़कियों की शादी आपस में नहीं होनी चाहिए। यह एक
आनुवांशिक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित माता-पिता से ही यह अगली पीढ़ी तक पहुंचती
है
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एवं अन्य
अतिथियों ने सिकल सेल के प्रति लोगों को जागरूक करने सिकल सेल संस्थान द्वारा
तैयार किए गए पोस्टर, ब्रोशर और पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के संदेश
‘मुखिया की पाती’
का वाचन भी किया गया। कार्यक्रम में
स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एस.एल.
आदिले, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. चन्द्राकर, पूर्व कुलपति डॉ. ए.टी.के.
दाबके, सिकल सेल संस्थान के महानिदेशक डॉ. अरविंद नेरल तथा रायपुर के
कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन सहित अनेक डॉक्टर और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि
मौजूद थे।




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