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छत्तीसगढ़ ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजना देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास का नया रास्ता - श्री भूपेश बघेल

Anil Choubey 16-06-2019 19:08:10


   नीति आयोग की नई दिल्ली में हुई गर्वनिंग कांउसिल की बैठक  

 

ऽ आकांक्षी जिलों के विकास के लिए शत-प्रतिशत वित्त पोषण और अनुदान

ऽ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और रोजगार पर विशेष जोर

ऽ नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का पुनराविलोकन हो

ऽ सार्वजनिक उपक्रमों को आवंटित खदानों से राज्य को मिले बिजली का हिस्सा

ऽ अतिरिक्त उपार्जित चावल को केन्द्रीय पूल में मान्य करे 

ऽ हर घर को नल कनेक्शन प्रदान करने के लिए शत प्रतिशत अनुदान दे

   

        रायपुर,  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि देश में किसानों की आय दुगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की ठोस पहल की आवश्यकता हैं और छत्तीसगढ़ इस मामले में देश को रास्ता दिखा सकता हैं। श्री भूपेश बघेल शनिवार को नई दिल्ली में नीति आयोग की गर्वनिंग कांउसिल की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की। बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।  

 

          मुख्यमंत्री श्री बघेल ने ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजनाओं की के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने, स्थानीय संसाधनों को विकसित करने और व्यापक तौर पर पर्यावरण संरक्षण को को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम प्रारंभ किया गया हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, गिरता भू-जल स्तर, पशुधन संवर्धन, जैविक खेती जैसे विषय आज वैश्विक चिंता के कारक बन गए है। छत्तीसगढ़ में हमने विभिन्न समस्याओं के एक समाधान के रूप में नवाचार किया हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा में नरवा का अर्थ है प्राकृतिक नाले, गरवा का अर्थ हैं पशुधन, घुरवा का अर्थ है अपशिष्ट पदार्थो का भण्डार और बाड़ी का अर्थ है छोटी बागवानी। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत हम भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नाले में बहते पानी को रोकेंगे, गाय तथा गौवंशीय पशुधन को बचायेंगे तथा इनका  किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उपयोग सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही गोबर तथा अन्य जैविक ग्रामीण अपशिष्ट पदार्थो से कम्पोस्ट खाद का निर्माण एवं बाड़ी अर्थात हर किसान तथा ग्रामीण के यहां छोटे बगीचों का विकास करेंगे । 

 

बैठक में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राज्य में आकांक्षी जिला कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मे 44 प्रतिशत वन है जिसमें मुख्य रूप से 10 आकांक्षी जिलों के 8 जिलों में वनों का प्रतिशत बहुत अधिक है। इन जिलों में बिजली, पानी, सड़क और सिचाई आदिवासियों तक पहुचाना बहुत कठिन हो गया है। श्री बघेल ने इन क्षेत्रों में सोलर बिजली के माध्यम से पानी के पम्प की व्यवस्था, बिगड़े वन क्षेत्रों में वाणिज्यिक रूप से सोलर बिजली उत्पादन की अनुमति, लघुवनोपज पर आधारित उद्योगों की स्थापना वन भूमि पर करने की छूट, सोलर पम्पों के माध्यम से छोटी सिचाई योजनाओं की स्थापना के लिए वन भूमि में छूट, आदिवासी बेरोजगार युवकों को लघुवनोपज एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए अनुदान आदि के लिए केन्द्र सरकार से 100 प्रतिशत वित्त पोषण एवं अनुदान की मांग की।  

 

 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में माओवाद हिंसा से प्रभावित क्षेत्रांे में सड़क निर्माण की प्रगति, ऑप्टिकल फाइवर कनेक्टिविटी, सुरक्षा बलों के लिए टेक्टिकल मिनी यूएव्ही, बस्तर में रेल लाइन के विकास कार्य में तेजी लाने, वंचित संस्थाओं को खाद्यान्न आवंटन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार लाने, फूड सब्सिडी, महात्मा गांधी नरेगा में आवटंन की समस्या, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), गोबर-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्टैंड-अप इंडिया योजना, सूखे की स्थिति एवं राहत के उपाय तथा कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर भी अपनी बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी भी उपस्थित थे।

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