दिल्ली ब्यूरो //// आज के डिजिटल युग में भारतीय रेलवे ने ऐसे उदासीन अधिकारी रखे हैं जो रेलवे की छवि को खराब करने में जुटे है। भारतीय रेलवे के अहम अंग आईआरसीटीसी के पी आर ओ आनन्द झा के पास विभाग से जुड़ी कोई भी ताजा जानकारी नहीं रहती।अक्सर पत्रकार उनसे फोन पर बातचीत करते हैं और विभाग से जुड़ी विभिन्न जानकारी मांगते हैं। मगर पीआरओ साहब का अक्खड़ स्वभाव ऐसा है कि वह किसी भी पत्रकार का फोन नहीं उठाते। यहां तक कि पीआईबी पत्रकारो से भी कह देते हैं कि मै यहां किसी के फोन उठाने के लिए नहीं बैठा हूँ।आईआरसीटीसी के सूत्रों का कहना है कि यह महोदय अक्सर पत्रकारों से कहते है कि आईआरसीटीसी के घोटालों के खिलाफ़ खबर करो मसाला मैं देता हूं। दरअसल आईआरसीटीसी के कई महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हैं भारतीय रेलवे जिनकी लगातार रिपोटिंग भी करता है मगर यह महोदय पत्रकारो को नेगेटिव खबर करने के लिए कहते हैं। सूत्रों की माने तो आईआरसीटीसी के मुख्यालय और पीआर विभाग में जमकर राजनीति चल रही हैं जिसका प्रधान यही पीआरओ मिस्टर झा है जो न जाने क्यों अपने ही विभाग की खुलकर मुखालफत करने पर उतारू है। इतना ही नहीं झा डंके की चोट पर कहते हैं कि यहां मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अगर आईआरसीटीसी प्रबंधन ने इस प्रकरण पर लगाम नहीं लगाई तो इसका खामियाजा आईआरसीटीसी की साख को भुगतना पड़ेगा।




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