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मकर संक्रांति पर बन रहा है महासंयोग, जानें तिथि और शुभ पूजा मुहूर्त

Anil Choubey 13-01-2022 10:45:40


मकर संक्रांति पुण्यकाल: 2 बजकर 12 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक  महापुण्य काल मुहूर्त: 2 बजकर 12 मिनट से 2 बजकर 36 मिनट तक

रायपुर-13/01/2022 // सनातन धर्म में मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति का विशेष महत्व है। इस साल कुछ जगहों पर मकर संक्रांति 14 जनवरी तो कुछ जगहों पर 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो संक्रांति कहते हैं। 14 जनवरी को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। मकर राशि में सूर्य के आने से खरमास खत्म हो जाएगा और सभी तरह के मांगलिक कर्म फिर से शुरू हो जाएंगे। 

देश में मकर संक्रांति को अलग अलग नाम से जाना जाता है। एक ओर जहां उत्तर भारत में इसे खिचड़ी या मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। वहीं तमिलनाडु में इसे पोंगल और गुजरात में उत्तरायण कहते हैं। 

मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व इसी दिन भीष्म पितामह ने  त्यागी  थी अपनी देह

इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान दान कर सूर्यदेव की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन श्रीहरि भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक से असुरों का संहार किया था, भगवान विष्णु की जीत को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि महाभारत काल से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन प्राण निकलने से व्यक्ति का पुनर्जन्म होने के बजाए सीधे ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि भीष्म पितामह ने 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहने के बाद प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण का इंतजार किया था।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन स्नान दान कर भगवान सूर्य देव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है। इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य

भगवान को अर्घ्य देने से पद और सम्मान में वृद्धि होती है तथा शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है।वहीं मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने से खरमास की समाप्ति होती है और सभी मांगलिक कार्यों की शुरूआत हो जाती है। इस दिन से एक बार फिर शादी विवाह, मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। 

मकर राशि का स्वामी शनि ग्रह है। शनि को सूर्य का पुत्र माना जाता है। जब सूर्य मकर राशि में आता है तो ऐसा माना जाता है कि सूर्य अपने पुत्र के घर आए हैं। मकर संक्रांति के समय ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। इस साल 15 जनवरी को सूर्य उत्तरायण हो रहा है। इसके बाद से ठंड कम होने लगेगी और गर्मी बढ़ने लगेगी।

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

इस बार मकर संक्रांति पर शुभ मुहूर्त दोपहर में आरंभ हो रहा है। इस बार मकर संक्राति पर सुबह 8 बजकर 5 मिनट के बाद से स्‍नान दान का मुहूर्त है, क्योंकि सूर्य दोपहर 2 बजकर 9 मिनट पर मकर राशि में आ रहे हैं।

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