दंतेवाडा // नंदी पर्वत, किरंदुल ब्लॉक नंबर 13 आयरन ओर के बड़े डिपॉजिट को लेकर
आज आंदोलन का चौथा दिन है, 200 गांव के आदिवासियों ने एनएमडीसी किरंदुल का काम काज ढप कर रखा है, हजारों की संख्या में तीर धनुष
लेकर आदिवासी अपने अराध्य देवी ,देवताओं की
रक्षा के लिए इस आयरन ओर पहाड़ को किसी भी हालत में अदानी और छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट
कॉरपोरेशन को देने तैयार नहीं है| कल इसी सिलसिले में
सांसद दीपक बैज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कहने पर आंदोलित आदिवासियों से
मिलने किरंदुल पहुंचे वहां उन्होंने आदिवासियों को आश्वासन दिया है. की जल ,जंगल और जमीन पर आदिवासियों का हक
है, उसे कोई
छीन नहीं सकता | मुख्यमंत्री
चाहते हैं. कि आपका एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करें और अपनी वस्तु
स्थिति कोई स्पष्ट करें एक और जहां इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो रही है पूर्व
मुख्यमंत्री ने कहा है की वर्तमान मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि अदानी को खदान देना
है कि नहीं देना है वही पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि हमारी सरकार ने
किसी भी तरीके से नंदी पर्वत के पेड़ों को काटने की कोई भी परमिशन नहीं दी है जो
भी परमिशन है वह पूर्ववर्ती सरकारों ने दी है , हमने फाइल बुलाई है हम समीक्षा कर
रहे हैं|
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है की एनएमडीसी ने इस 13
ब्लाक को भारत सरकार के पक्ष में सरेंडर
कर दिया था, भारत सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और एनसीएल कंपनी को हस्तांतरण कर दिया एनसीएल के
पास क्योंकि खनन को लेकर कोई भी तकनीकी
ज्ञान के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था.
इसलिए उन्होंने खनन और विकसित करने के लिए अदानी की कंपनी से एमओयू किया है. वस्तु
स्थिति यह है कि इस खदान पर अदानी का कोई
हक नहीं है .लेकिन खेल के पीछे खेल यही है
की मालिक तो एनसीएल है लेकिन पूरा काम अदानी की कंपनी करेगी वह भी अपनी शर्तों पर
शर्तें निश्चित ही अदानी के पक्ष में ही हैं. अदानी इस तरीके से छत्तीसगढ़ के खनिजों संपदाओं पर अपना एकाधिकार करते जा रहा है, ऐसे ही उसने
रायगढ़ में एसईसीएल को आवंटित खदान के साथ भी एमओयू कर अपने कब्जे में कर ली है इसी तरीके से सरगुजा में भी राजस्थान बिजली
बोर्ड को आवंटित कोयले की खदान को उसने खनन और विकास के नाम पर एमओयू कर हथिया ली
है. यही राजनीतिक बड़ा फायदा है इसमें ना
तो उसे किसी तरीके की क्लीयरेंस लेने की जरूरत होती है ना ही उसे ऑनलाइन टेंडर
भरना पड़ता है. और अदानी का काम इस तरह एमओयू के जरिए एकदम आसान हो जाता है. यही नियति
और निति का खोट है. जिसे कानूनी तौर पर तो
अदानी को सीधे घेरा नहीं जा सकता लेकिन
वास्तविकता यही है की इस तरीके से उसने छत्तीसगढ़ में कोयला और आयरन ओर पर अपना
आधिपत्य कायम कर लिया|
आज छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है उद्योग मंत्री वर्तमान में
छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन भी हैं. और बस्तर के वरिष्ठ
विधायक भी हैं उन्होंने शपथ ग्रहण के साथ ही यह ऐलान कर दिया था. कि किसी भी हालत
में ब्लॉक नंबर 13 अदानी को
खनन और विकास के लिए नहीं सौंपा जाएगा और आज आंदोलन के तहत यह बात अब खुलकर सामने
आ गई है. की भूपेश सरकार को या तो इस मामले को रद्द करना पड़ेगा या आदिवासियों से
मिलकर बीच का कोई रास्ता निकालना पड़ेगा




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments