गड्ढे में दबा दिए हजारों पीपी किट तिवारी जी मेहरबान तो प्रदूषण पहलवान
रायपुर, 28 दिसम्बर 2021 /// नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाने का एक मात्र स्थान है जिसे छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल कहतें है . इस मंडल में तिवारी जी वर्षों से छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को बिगाड़ने में लगे हुए हैं तिवारी जी के बारे में उद्योगपति कहते हैं कि उनमें इतनी फ्लैक्सिबिलिटी है कि जैसा चाहे घूम जाते हैं और हमें किसी न किसी तरीके से तथाकथित अनुमतिया मिलही जाती हैं, इसके चलते भारी भरकम उद्योग लगातार प्रदूषण फैला कर छत्तीसगढ़ की सेहत खराब कर रहे हैं लेकिन पर्यावरण मंडल में बैठे अधिकारियों की सेहत एकदम सही सलामत हे वो दिन दुगने रत चोगने फल फुल रही है ,ऐसा ही एक मामला जो कि बहुत ही गंभीर है को लेकर इंडियन मेडिकल इंस्टिट्यूट के सदस्यों ने कलेक्टर सौरव सिंह के नेतृत्व में कोविड-19 के बेस्ट पदार्थ को नष्ट करने की जिस कंपनी को जिम्मेवारी थी उस कम्पनी का निरिक्षण किया तो पाया की उसने लापरवाही से कोविड-19 के बेस्ट पदार्थ को गोडाउन में बंद करके अभी भी रखा हुआ वह तो छत्तीसगढ़ की राजधानी में रहने वालों की किस्मत अच्छी है कि अभी तक उसके कारण कोई बड़ी दुर्घटना की जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन लापरवाही जिसको एक सप्ताह से अधिक दिन से उजागर किये हो गया है उस पर अभी तक किसी भी तरीके की कोई भी अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई है यही लचर व्यवस्था के करता हें छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के चर्चित अधिकारी तिवारी जी |
करोना कॉल में निजी अस्पतालों से एकत्र किए गए पीपीकिट और दूसरे करोना वेस्ट को नष्ट करने की जिम्मेदारी एस एम एस वाटरग्रेस इनवायरोप्रोटेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी कंपनी ने खतरनाक मेडिकल वेस्ट एकत्र करने के करने के लिए निजी अस्पतालों से ₹100 किलो के हिसाब से पेसे भी वसूल लिए लेकिन कम्पनी ने कोविड-19 के खतरनाक बेस्ट को नष्ट नहीं किया जिसे उन्हें एक गड्ढे में दबा कर ऊपर से त्रिपाल से ढक दिया जो कि यह बहुत ही खतरनाक मामला है करोना काल में जब इस कंपनी को इस तरीके के बेस्ट को नष्ट करने की जिम्मेदारी दी गई उस वक्त छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल की जिम्मेदारी बनती थी कि वह सुनिश्चित करे की क्या यह कंपनी इस तरीके के मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने की क्षमता रखता है या नहीं तिवारी जी की यही विशेषता है कि वह अपने एयर कंडीशन चेंबर में बैठकर यह देख लेते हैं और सुनिश्चित भी कर देते हैं कि कंपनी के पास इस तरह के खतरनाक मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लायक सभी उपकरण हैं और वह इसे नष्ट करने की अनुमति दे देते हैं
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कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल में छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष राकेश गुप्ता आई एम ए जिला अध्यक्ष डॉ विकास अग्रवाल सचिव आशा जैन आई हॉस्पिटल जिला अध्यक्ष डॉक्टर सुनील जैन कार्यकारिणी सदस्य डॉ ऋचा अग्रवाल ने बताया कि रायपुर कलेक्टर सौरव कुमार के निर्देश पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एनआर साहू तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल और छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अधिकारियों द्वारा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रायपुर के दल
ने सिलतरा रायपुर में बायो मेडिकल वेस्ट करने वाले प्लांट एस एम एस वाटरग्रेस इनवायरोप्रोटेक्ट प्राइवेट लिमिटेड का निरीक्षण किया और पूरे प्लांट में घोर अनियमितताएं पाई गई यह प्लांट सामान्य मेडिकल वेस्ट नष्ट करने के लायक भी नहीं है जिससे कोविड-19 खतरनाक कचरे को नष्ट करने की जिम्मेदारी दी गई है इस पर एम आई आईएमए के सदस्यों का कहना है कि इतने छोटे से प्लांट में मेडिकल वेस्ट केसे नष्ट किया जा रहा है समझ से परे है इसके लिए कंपनी अस्पतालों से भुगतान तो वसूल कर रही है और पर्यावरण मंडल के अधिकारियों को सिर्फ अपने कमिसन से मतलब है
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कोविड महामारी के दौरान निजी अस्पतालों से कोविड से संबंधित बायो मेडिकल वेस्ट इस कंपनी ने नष्ट करने के लिए उठाया था (जिसका भुगतान प्राइवेट अस्पतालों ने ₹100 प्रति किलो के आधार पर किया था), परंतु प्लांट के अंदर कोविड का इलाज कर रहे अस्पतालों से इकट्ठा किए गए पीपीई किट हजारों की संख्या में एक बहुत बड़े गड्ढे में बोरों में भरकर दबे हुए मिले (जिन्हें 24 घंटे के अंदर नष्ट कर दिया जाना चाहिए था) । जिसके बारे में पूछने पर प्लांट में मौजूद कर्मचारी और सुपरवाइजर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके अलावा एक बड़े गोदाम में ताला लगा हुआ था, जिसे खोलने के लिए कहने पर कर्मचारी ने उसे खोलकर गोदाम दिखाने से अतिरिक्त मुख्य दंडाधिकारी एन आर साहू और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मीरा बघेल को स्पष्ट मना कर दिया । प्लांट में बायो मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए लगाया गया ऑटोक्लेव तथा श्रेडर मशीन प्लांट में आने वाले बायो मेडिकल वेस्ट की मात्रा की तुलना में बहुत छोटा था। प्लांट की कैपेसिटी 2 टन प्रतिदिन कचरा नष्ट करने की है, परंतु प्लांट में प्रतिदिन लगभग 5 से 6 टन कचरा पहुंच रहा है, ऐसा प्लांट के कर्मचारियों और सुपरवाइजर ने बताया। इस छोटे से प्लांट में कचरा किस प्रकार नष्ट किया जा रहा है, यह समझ से परे है और इसके लिए कंपनी के द्वारा अस्पतालों तथा क्लीनिक से मनमाना भुगतान वसूला जा रहा है। इस तरह की लापरवाही आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इस निरीक्षण में जो अनियमितताएं उजागर हुई है उससे जिले में बायो मेडिकल वेस्ट नष्ट करने की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। बायो मेडिकल वेस्ट नष्ट करने के लिए जिले में प्लांट चला रही कंपनी s.m.s. Watergrace Enviroprotect Pvt Ltd की पूरी तरह ऑडिटिंग होना जरूरी है ।




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