रायपुर/// 20/12/2021/// एक समय था भारत सोने की चिड़िया कहलाता थाइंदिरा जी पूरे देश के किसानों का आह्वान किया की हमे खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर होना है किसानों ने इस चुनौती को स्वीकार कर अनाज के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाया
भूपेश बघेल- देश में अनाज की कमी को इंदिरा गाँधी जी ने चुनौती के तौर पर लिया और देश के किसानों ने आह्वान किया कि हमें अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा. उसके बाद ही कृषि के क्षेत्र क्रांति आयी. वही दौर है जब 1967 में एमएसपी घोषित हुआ.भूपेश बघेल- हमने छत्तीसगढ़ में धान, कोदो, कुटकी, गन्ना, मक्का सबके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीदी के साथ उचित क़ीमत देना शुरू किया.
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भूपेश बघेल- हमने छत्तीसगढ़ में धान, कोदो, कुटकी, गन्ना, मक्का के साथ भी वनोपजों की ख़रीदी भी शुरू की, जिसे 7 से बढ़ाकर 52 प्रकार के लघुवनोपजों को शामिल किया. इसके अलावा हमने वनोपजों का वैल्यू एडिशन भी किया.सरकार के सामने जैसे जनसंख्या समस्या है, वैसे ही अनाज का अधिक उत्पादन भी समस्या बनीमहुआ से पहले सिर्फ शराब बनती थी, आज लड्डू और एनर्जी ड्रिंक बनाये जा रहे हमने छत्तीसगढ़ में धान, कोदो कुटकी, रागी, लघु वनोपज सबके लिए समर्थन मूल्य निर्धारित कियापहले बस्तर काजू 50 रुपये में बाहर भेज दिए जाते थे, आज प्रोसेसिंग के कारण 1800 रुपये तक बिक रहालोग तीखुर नही जानते थे, आज ड्रिंक्स बनाये जा रहेमहिलाओ को रोजगार मिला, प्रतिदिन 250 से 300 रुपये की आमदनी हो रहीबस्तर काजू के नाम से हमने ब्रांडिंग कीव्यापारियों ने हमसे कहा आआपने किसानों के लिए किया, मजदूरों के लिए किया , महिलाओं के लिए किया, हमारे लिए क्या कियाकिसान नहीं चाहते थे लेकिन केन्द्र सरकार ने तीन काले क़ानूनों को उन पर लादने की कोशिश की.
भूपेश बघेल- उद्योग का पहिया तब घूमेगा जब व्यापारी उनसे सामान ख़रीदेंगे और व्यापारी सामान तब बिकेगा जब जनता के जेब में पैसा होगा.
भूपेश बघेल- अर्थव्यवस्था बचाने के लिए जनता के जेब में पैसा डालना पड़ेगा.: देश को बचाना है तो उसकी जनता के जेब में पैसा डालना होगा मैंने कहा मैंने आप लोगों के लिए कुछ नहीं किया , बल्कि आप के ग्राहकों के जेब मे पैसा डाला है पिछले साल हमने 10 हजार रुपये प्रति एकड़ के रूप में इनपुट सब्सिडी दिया पहली बार ऐसा फरमान आया कि आपका उसना चावल नहीं खरीदा जाएगा
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500 राइस मिल है उसना के लिए उनका क्या होगा मैं इस चैनल के माध्यम से किसानों से आग्रह करना चाहता हूँ कि आप अरवाँ क्वालिटी का चावल उत्पादन करेंयहां गन्ना से एथेनॉल बन सकता है , मक्का से बन सकता है, लेकिन धान से एथेनॉल की अनुमति नहींहमने 10 क्विंटल प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी दी.
भूपेश बघेल- अक्टूबर 2014 में केन्द्र सरकार से एक फ़रमान जारी हुआ, जिसमें कोई भी राज्य सरकार फसल की ख़रीदी पर किसानों को बोनस देगी तो अनाज की ख़रीदी नहीं होगी, लेकिन फिर दो साल की छूट मिली. उसी छूट में हमने किसानों को बोनस मिलाकर 2500 रुपए दे दिया.
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार द्वारा उसना क्वॉलिटी के धान की ख़रीदी से इनकार करने पर किसानों से अरवा क्वॉलिटी के धान उत्पादन की अपील की.हम अधिक धान उत्पादन को देखते हुए धान से एथेनॉल ईंधन बनाना चाहते हैं. इसके साथ ही गन्ना और मक्का से भी एथेनॉल ईंधन बनाना चाहते हैं. लेकिन अनुमति ही नहीं मिल रही है. अनुमति मिल जाती तो हम उत्पादन शुरू कर सकते थे.
लॉकडाउन के बाद सबसे पहले उद्योगों का पहिया कहीं घूमा है तो वो छत्तीसगढ़ में घूमा है.हमने उद्योगपतियों से चर्चा के बाद 2019-24 की औद्योगिक नीति बनाई. अब तक 150 MOU हो चुके हैं.हम किसानों का हित करना चाहते हैं लेकिन किसानों के नाम से किसी को बेजा फ़ायदा उठाने भी नहीं दिया जाएगा डीएपी की कमी पर मुख्यमंत्री ने किसानों, ग्रामीणों को वर्मी कम्पोस्ट अधिक-से-अधिक बनाने की अपील की हिंदुस्तान बहुलता का देश है. यहाँ का अलग दर्शन है. यही हमारी परम्परा की खूबी है.
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हमें समस्याओं के समाधान के लिए सभी प्रकार की चर्चा में शामिल होना चाहिए. लोगों को सुनना चाहिए, असहमति के बावजूद भी उनका सम्मान करना चाहिए. जब सब साथ बैठेंगे तब ही किसी भी समस्या का समाधान निकलेगा.गौ माता ही पार लगाएगी, मेरा किसान भाइयों से निवेदन है अभी से वर्मी कम्पोस्ट बना कर रखें असहमति का सदैव सम्मान रहा है देश मेंजब उत्तर प्रदेश में चुनाव होने के बावजूद वहाँ खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पाए रहेगांधीवादी रास्ते पर चलकर 16 देश आजाद हुए हैंहमको इस देश में सभी चर्चाओं में भाग लेना चाहिए, सबका सम्मान करना चाहिये कितने भी शक्तिशाली लोग क्यों न हो आप गांधीवादी विचारों पर चलकर अपनी बातें मनवा सकते हैं




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