दिव्य-दूत

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लालफीताशाही इस पुण्य के काम मैं बाधा ना पहुंचाएं ,इस सुविधा से वंचित हजारों मरीज की अकाल मृत्यु हो रही है छत्तीसगढ़ में

Anil Choubey 26-11-2021 19:56:15


27 नवंबर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर विशेष

*********Cadever Organ Donation ( मृत्यु पश्चात अंगदान ) को प्रोत्साहित किया जा सके और नियम बनाए जा सके, ताकि मृत्यु के पश्चात जो लोग अपने अंग दान करना चाहते हैं, वे अंग दान कर लोगों को जीवन दान दे सकें । इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सकारात्मक पहल करने की जरूरत  है । इसके लिए समाज और मीडिया को भी सक्रिय भागीदारी निभानी पड़ेगी।

 Dr Mahesh Sinha,  President, IMA, CG    Dr Rakesh Gupta, Chairman, Hospital Board, IMA CG             Dr Vikas Agrawal, President, IMA, RaipurDr Asha Jain,Hon.Secretary,IMA  Raipur         Dr Anil Jain, Chairman, Hospital Board, IMA, Raipur*********

 

रायपुर ////// छत्तीसगढ़ राज्य को अस्तित्व में आये हुए 21 वर्ष हो गए बहुत ही जोर शोर से विकास की बातें करने वाले इस प्रदेश में मेडिकल सुविधा के नाम पर जिस तरीके से  फाइलों का खेल चलता है उसका ताजा उदाहरण है कि देश के  आंध्र प्रदेश. तमिल नाडु,उड़ीसा ,मध्य प्रदेश, झारखंड में  अंग प्रत्यारोपण की समिति बन गई है ,नियम बन गए हैं और वह काम भी ठीक-ठाक कर रहा है लेकिन हमारे प्रदेश में इस मामले को लेकर जब मैंने पड़ताल शुरू की तो मुझे पता चला  की 2018 में इसका कानून बनाया गया था उसके बाद से चींटी की चाल चलते चलते आज करीब 4 वर्ष हो गए हैं और अभी तक अंग प्रत्यारोपण का काम इस प्रदेश में शुरू नहीं हुआ है नौकरशाही इस  पुन्य के काम पर एक कदर हावी है कि वह तरह-तरह के बहाने बनाकर इस फाइल को टरका देती हैं जबकि वास्तव स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ में 5 या 7 ऐसे सेंटर हैं जहां पर अंग प्रत्यारोपण का काम सुचारू रूप से हो सकता है लेकिन यहां के लालफीताशाही उस फाइल को इतने धीरे धीरे चला रही है जिससे हजारों की संख्या में मरीज की  अकाल मृत्यु हो रही  जिनके पास पैसा है वह तो आसपास के राज्यों में जाकर अन्य प्रत्यारोपण का रजिस्ट्रेशन करा देते हैं

हमारे प्रदेश में सुविधा के नाम पर रायपुर में इतने अच्छे मेडिकल कॉलेज और इतनी अच्छी मेडिकल फैसिलिटी होने के बावजूद हमारे यहां इस पुण्य के काम के लिए फाइल इतने धीरे चल रही है इस और  किसी का कोई ध्यान नहीं है

मुझे  हास्यास्पद जानकारी यह है भी मिली कि निर्णायक  उच्च सीटों पर बैठे आला अफसर और मंत्री इस फाइल पर इसलिए ध्यान नहीं दे रहे हैं की इससे निजी अस्पतालों को फायदा होगा इस पुण्य के काम में भी वह फायदा और नुकसान देख रहे हैं जबकि अंग प्रत्यारोपण का फायदा ना लेने से उनके ही वोटरों की मौत हो रही है इसका उन्हें ध्यान नहीं सरकारी अस्पतालों में एम एम्स , डी के सुपर स्पेशलिस्ट ऐसी अस्पताल हैं जो सरकारी सेंटर हैं वहां भी आराम से अंग प्रत्यारोपण का काम सुचारू रूप से चला सकते हैं लेकिन इसका  निर्णय जिन्हें लेना है उनकी बुद्धि में नफे और नुकसान ज्यादा हावी है बजाए मानव के जीवन की रक्षा करना

हमारे देश में प्रतिवर्ष 27 नवंबर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस दिन जनता को अंगदान के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रोत्साहन और जागरूकता  बढ़ाने के लिए कार्यक्रम किए जाते हैं । देश में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु विभिन्न अंगों के फेल होने से हो जाती है । यदि इन व्यक्तियों को अपने परिवार या अन्य किसी व्यक्ति से, जिससे उनका जीन मैचिंग संभव हो, जरूरत का अंग जैसे - किडनी, लीवर, फेफड़ा, हृदय, पैंक्रियास,  कॉर्निया मिल जाए तो, वह व्यक्ति सफल ऑपरेशन के पश्चात सामान्य जीवन जी सकता है।

विभिन्न अंगों के दान के कानूनी प्रावधान और गाइडलाइन के लिए भारत सरकार ने 1994 मे Transplantation of Human Organs & Tissue Act (THOTA) पारित किया था और तमिलनाडु देश का पहला राज्य बना, जहां इसे कानूनी रूप से अपनाया गया ।

छत्तीसगढ़ प्रदेश बनने के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का अपेक्षित प्रसार हुआ है और प्रदेश के कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों  में सभी प्रकार के अंग प्रत्यारोपण की उच्च स्तरीय  चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। बड़ी संख्या में अंगदान हेतु प्रतीक्षारत मरीजों के लिए सीमित मात्रा में ही अंग दान दाताओं का उपलब्ध होना इन मरीजों की बढ़ती संख्या और जल्दी मृत्यु का मुख्य कारण है । पूरे देश में प्राकृतिक रूप से मृत मरीजों (कैडेवर) के अंगदान का प्रचलन बढ़ा है और देश के सभी अग्रणी राज्यों ने कैडेवर ऑर्गन डोनेशन एक्ट को केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार अपनाया है । छत्तीसगढ़ कुछ विरले राज्यों में से है, जिसमें फरवरी 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में कानून पारित होने के बावजूद, छत्तीसगढ़ राज्य का स्वास्थ्य विभाग अभी तक ना तो इसके लिए राज्य इकाई गठन कर सका, ना ही इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश व नियमावली बना सका है ।

छत्तीसगढ़ में कैडेवर ऑर्गन डोनेशन एक्ट लागू हो जाने से प्रतिवर्ष कई परिवार अपने प्राकृतिक रूप से मृत रिश्तेदार के अंग दान करने के इच्छुक रहते हैं । एक प्राकृतिक रूप से मृत व्यक्ति की दो किडनी, दो फेफड़े, हृदय, पैंक्रियास और लीवर कई मरीजों की जान बचा सकते हैं और गंभीर रूप से बीमार अंगदान हेतु प्रतीक्षारत मरीजों के लिए आशा की एक नई किरण और संजीवनी साबित हो सकते हैं । उल्लेखनीय है कि एक व्यक्ति अपने अंगदान से 11 लोगों को जीवन दान दे सकता है । पिछले कुछ वर्षों से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से यह कोशिश की जा रही है कि प्रदेश में

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