नरेन्द्र कुमार वर्मा (ब्यूरोचीफ, दिल्ली)
नई दिल्ली ////// दिल्ली में चल रहे 40 वें अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भारत के कई राज्यों के आदिवासी अपने उत्पादनों के पास पहुंचे हैं। व्यापार मेले में हॉल नंबर 10 में भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय से जुड़े विभिन्न कारोबारियों ने अपने उत्पादनों की प्रदर्शनी लगाई है। इस बार अंतरराष्ट्रीय मेले में कर्नाटक, करेल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलांगना के आदिवासी समुदाय के उत्पादनों को लेकर लोगों में खासी रुचि देखी जा रही है। कर्नाटक के मैसूर जिले की हुंसरु तहसील के गांव फर्स्ट पक्षीराजपुरा की रहने वाली मधुमाला अपने बेटी अलिशा एवं सहयोगी गायत्री के साथ मेले में अपने हर्बल उत्पादनों के साथ पहुंची है। मधुमाला बताती हैं कि वह परंपरागत विधि से अपने पूर्वजों की बताई गई पध्दति से हर्बल उत्पादनों को तैयार करती है। उनके कुटिर उद्योग का नाम शिवबिंदु आदिवासी प्रोडक्ट है। जिसमें वह दर्दनाशक तेल, बालों को घना करने वाला तेल, सर्दी जुखाम अस्थमा को दूर करने वाला तेल, शुगर, तनाव और पेट से जुड़ी बीमारियों को दूर करने वाला चूरन एवं चेहरे को सुंदर बनाने वाली फेसियल किट शामिल है। मधुमाला की बेटी अलिशा बताती हैं कि वह अपने उत्पादनों का दुबई, मस्कट, सऊदी अरब, वेस्टइंडिज, साउथ अफ्रीका और मारिशस में प्रदर्शन कर चुकी है जहां उनके व्दारा बनाए गए हर्बल उत्पादनों को लोगों ने हाथों हाथ लिया। 40 वें अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपने संस्थान शिवबिंदु आदिवासी प्रोडक्ट के प्रचार-प्रसार में जुटी मधुमाला कहती हैं कि दिल्ली में पिछले व्यापार मेले में भी उन्हें अच्छे खासे ऑर्डर प्राप्त हुए थे। वह कहती हैं कि उनके बनाए गए हर्बल उत्पादनों का मानव के शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि उनका परिवार कई पीढियों से इन उत्पादनों को बनाने में जुटा है मगर कभी उसके दुष्प्रभाव की कोई शिकायत नहीं मिली। उनके संस्थान की बिक्री एवं क्वालिटी को देखने परखने वाली गायत्री कहती हैं कि विदेशों में उनके संस्थान के बने उत्पादनों की टेस्टिंग की जाती है। तभी विदेशी लोग उन्हें खरीदना पसंद करते है वहां भी उनके उत्पादन हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। मधुमाला कहती हैं कि वह विगत दो दशक से कर्नाटक एवं केंद्र सरकार के सहयोग से देश के हर राज्य में अपने उत्पादनों की प्रदर्शनी लगा चुकी है। गायत्री कहती हैं कि कर्नाटक सरकार उन्हें कई स्तर पर अनुदान देती है ताकि उनके उत्पादन जन-जन तक पहुंच सकें। वह कहती हैं कि हर्बल उत्पादनों को बनाने के लिए जिन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है उनकी पहचान उनके परिवार के लोगों को है जो जंगल से जाकर जड़ी बूटियों को एकत्र करते है एवं कुछ महंगी जुड़ी बूटियों को केरल और महाराष्ट्र के जंगलों से खरीद कर भी लाते है। व्यापार मेले में उन्हें कितने लाभ की उम्मीद है। इस सवाल पर मधुमाला कहती हैं कि जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वोकल फॉर लोकल का नारा दिया है तब से उनके उत्पादनों को खासा प्रोत्साहन मिला है। वह कहती हैं कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार उन्हें हर स्तर पर मदद करती है। साथ ही कर्नाटक सरकार ने आदिवासियों के उत्पादनों को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बना रखे है जहां उन्हें प्रशिक्षण, पैकेजिंग, मार्केटिंग एवं ग्राहकों के साथ संपर्क बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। एमएसएमई मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि उनका मंत्रालय निरंतर इस तरह के कारोबारियों को प्रोत्साहन दे रहा है ताकि उनके उत्पादन दुनियाभर में पहचान बना सके। शिवबिंदु आदिवासी प्रोडक्ट वर्ष में कितनी बिक्री कर लेता है इस सवाल पर गायत्री कहती हैं कि उनके संस्थान के साथ सौ से अधिक आदिवासी परिवार जुड़े है। जिनकी रोजी-रोटी का जरिया हर्बल उत्पादन ही है। वह साल में पांच सौ से अधिक लोगों को पोस्ट के माध्यम से अपने उत्पादन भेजती है। साथ ही बहुत जल्दी वह अपने उत्पादनों की ऑन लाइन बिक्री की व्यवस्था भी कर रही है। गायत्री कहती हैं कि कर्नाटक सरकार आदिवासियों के हर्बल उत्पादनों की बेहतरीन पैकेजिंग एवं ऑन लाइन बिक्री की व्यवस्था भी कर रही है। जिसके बाद उनके उत्पादनों की बिक्री में खासा इजाफा होगा। मधुमाला कहती हैं कि उनके लिए बिक्री से कहीं ज्यादा ग्राहकों की संतुष्टि एवं उनका अच्छा होना है जो उनके उत्पादनों की सही परख को दर्शाता हैं।




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