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सोरेन और श्री बघेल ने आदिवासी जीवन शैली और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का किया उद्घाटनमुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदर्शनी में बनाये गए गौठान के मॉडल पर श्री सोरेन के साथ ली सेल्फी सोरेन ने छत्तीसगढ़ के मुर्रा का चखा स्वादआजीविका गुड़ी में किया तेलघानी मशीन का अवलोकन
रायपुर, 28 अक्टूबर 2021/ राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान पर चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान दो आदवासी बाहुल्य राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने भी पारंपरिक वाद्य ठोड़का और तुरही बजाकर जुगलबंदी की। झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने जब ठोड़का बजाना शुरू किया तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने तुरही बजाकर उनका साथ दिया। यह दिलचस्प नजारा जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर नजर आया। इस स्टॉल में जनजातीय समुदायों में प्रचलित पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया गया है।
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राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-राज्योत्सव 2021 के मुख्य अतिथि झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के साथ आयोजन स्थल में छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों द्वारा लगायी गई विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ कर उसका अवलोकन किया। मुख्यमंत्री द्वय ने जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आजीविका गुड़ी (आरआईपीए) के स्टालों का निरीक्षण कर उनके कार्य प्रणाली से अवगत हुए।
आजीविका गुड़ी (आरआईपीए) में लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाइयों के निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिनी ऑयल मिल, मिनी दाल मिल और मुर्रा, चना, लाई, पॉपकार्न फोड़ने जैसे अन्य लघु इकाइयों की कार्य प्रणाली का अवलोकन किया। इस दौरान श्री सोरेन ने छत्तीसगढ़ी मुर्रा का स्वाद भी चखा।
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मुख्यमंत्री श्री बघेल ने मुख्य अतिथि श्री सोरेन को कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सुराजी गांव योजना के तहत निर्मित गौठान का मॉडल दिखाकर वहाँ संचालित होने वाली आजीविका सम्बंधित गतिविधियों से अवगत कराया। इसके साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय में उत्पादित किये जा रहे रागी आटा, कोदो, चावल, हर्बल गुलाल एवं चावल की विभिन्न प्रजातियों के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री बघेल ने झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन के साथ ली सेल्फी

राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हर तरफ उत्साह का माहौल बना हुआ है। आज शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के साथ सेल्फ जोन में पहुंचकर सेल्फी लिया। समारोह स्थल पर आदिवासी संस्कृतियों तथा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश की झलकियों को समेटे आकर्षक सेल्फी जोन भी बनाए गए हैं। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत, आदिम जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2021 के शुभारंभ समारोह में देश के 27 राज्य, 06 केन्द्र शासित प्रदेशों और 7 देशों से आए नर्तक दल के कलाकारों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ आकर्षक मार्च पास्ट का प्रदर्शन किया।
संदेश भेजकर छत्तीसगढ़ सरकार की तारीफ़ कीकहा - आदिवासी कलाकारों को मंच देकर लोगों को प्राचीन संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना सराहनीय हैसमारोह के लिए लोकसभा सांसद श्री राहुल गांधी ने बधाई भेजकर छत्तीसगढ़ शासन की सराहना की है। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि आदिवासी कलाकारों को मंच देकर लोगों को आदिवासियों की प्राचीन और परंपरागत संस्कृति से अवगत कराने का यह कदम भारत की अनेकता में एकता के भाव को और मजबूत करेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजनों की शुरुआत श्री राहुल गांधी ने ही की थी। राज्य में दूसरी बार हो रहे इस वर्ष के आयोजन में वे उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रतिभागियों के लिए अपना संदेश भेजकर शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। उनके संदेश का वाचन समारोह के उद्घाटन अवसर पर पूर्व राज्यसभा सांसद बी. के. हरिप्रसाद ने किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने बधाई और शुभकामनाओं के लिए श्री राहुल गांधी के प्रति आभार व्यक्त किया।
संदेश में श्री राहुल गांधी ने कहा है कि हमारे आदिवासी भाई-बहन अपनी विरासत को सहेजने में न केवल सबसे आगे रहे हैं, बल्कि साथ ही वे हमारे प्राचीन ज्ञान को भी संरक्षित कर रहे हैं। आदिवासियों का हर लोक गीत, नृत्य, चित्र, शिल्प एक अलग ही कहानी कहता है। ये कहानियां हमारे पूर्वजों की रोचक और आकर्षक दुनिया का बोध कराती हैं। श्री राहुल गांधी ने संदेश में कहा है - 'मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी संस्कृति, कला और कलाकारों को अपनी पहचान को लोगों की बीच रखने का अवसर दे रही है।' उन्होंने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की सफलता की कामना करते हुए कहा है कि यह आयोजन भारत की अनेकता में एकता के भाव को संजोये रखते हुए उसे और मजबूती प्रदान करेगा।




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