नरेन्द्र कुमार वर्मा
सामाजिक बुराईयों के खिलाफ संघर्ष करने, कुरितियों को समाज के मिटाने, महिला सशक्तिकरण का संकल्प, बालिका शिक्षा के लिए पहल, वंचित वर्ग के उत्थान, रक्तदान, गरीब बच्चों का संरक्षण एवं शिक्षा और मृत्यु के उपरांत अपने शरीर के समस्त अंगों के दान का संकल्प यह फेहरिस्त बहुत लंबी है मगर सोनिया गोयल के कदम बराबर समाजसेवा के लिए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। स्कूल कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने सामाजिक सेवा के काम शुरू कर दिए थे। कॉलेज तक आते आते उन्होंने गरीब बालिकाओं की शिक्षा उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण, पुस्तकें और अन्य सामग्री उपलब्ध कराना शुरू कर दिया था। कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का पढ़ाई करते हुए भी उन्होंने समाज सेवा का अपना दायित्व नहीं छोड़ा और पढ़ाई के साथ-साथ गरीब महिलाओं, बालिकाओं के हक के लिए काम करती रही।

सोनिया गोयल की लगन और मेहनत देखकर उनके परिवार वालों ने भी उनका हौसला बढ़ाना शुरू किया और देखते ही देखते सोनिया गोयल दिल्ली के कई स्लम इलाकों में सोनिया दीदी बन गई। महिलाएं उनके पास अपनी घरेलु समस्याएं लेकर आने लगी गरीबों के आधारकॉर्ड, राशन कॉर्ड, बिजली का कनेक्शन, बच्चों का दाखिला, बालिकाओं को मुफ्त ड्रेस पुस्तकें और अन्य जरूरी वस्तुएं मुहैया करा कर सोनिया गोयल ने अपने को समाज सेवा में पूरी तरह से समर्पित कर दिया। गरीब बच्चों और जरूतमंदों के लिए कृत्रिम अंग लगवाना और उनके इलाज की व्यवस्था करने से लेकर सोनिया गोयल ने रिकॉर्ड 52 बार से अधिक शिविरों में रक्तदान करके लोगों को रक्त दान के लिए प्रेरित करने का काम किया। गरीब बस्तियों में जाकर उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को साफ सफाई के तौर तरीके बताएं और उन्हे मुफ्त सैनेटरी नैपकिन देने की पहल करके गरीब बालिकाओं में नये आत्मविश्वास का संचार किया। आज दिल्ली के कई स्लम इलाकों में सोनिया गोयल गरीब बालिकाओं के बीच योगा शिविर से लेकर आत्मरक्षा के शिविर लगाने का काम में जुटी हैं। सोनिया कहती हैं पॉश कॉलोनियों की तरफ हर व्यक्ति का ध्यान जाता है मगर कोई उन बस्तियों की तरफ नहीं देखता जहां के लोग पॉश कॉलोनियों के लोगों की सुविधाओं के लिए दिनरात काम करते है। मैंने गरीब बस्तियों में सेवा के कामों को इसलिए चुना कि उन्हें यह न लगें कि वह हमारे समाज के अंग नहीं है। सोनिया कहती हैं कि गरीब बस्तियों के लोग बहुत जल्दी बातों को समझ कर आपके साथ खड़े हो जाते है। कोरोना काल में इन्हीं बस्तियों के लोगों ने मदद के कामों को अंजाम दिया और दिल्ली के कई क्षेत्रों में भय के वातावरण को दूर करने का काम किया। सोनिया कहती हैं कि गरीबों के कल्याण के लिए मैंने सरल समाज संस्थान की नींव रखी जिसके साथ आज हजारों लोग जुड़े हुए है और संगठन दिल्ली की कई गरीब बस्तियों के बीच सेवा के कामों को अंजाम देकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की पहल में जुटा है। सोनिया कहती हैं कि उनका लक्ष्य दिल्ली की गरीब बस्तियों को सुंदर,साक्षर,सुरक्षित, जागरुक और सुविधा संपन्न बनाना है जिसके लिए उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को चुना है। उनके संस्थान की टोलियां इन बस्तियों में जाकर तरह-तरह की सामाजिक गतिविधियों को चला रहे है। सोनिया गोयल कहती हैं कि उनका लक्ष्य कोई पुरस्कार अथवा पद पाना नहीं है बल्कि समाज सेवा से उन्हें बहुत सकून और आत्मसंतोष मिलता है। वह कहती हैं कि जब कोई दुखी व्यक्ति उनके पास सहायता के लिए आता है और उसकी समस्या का निराकरण होने के बाद उसके चहरे पर बिखरी आभा हमें स्पष्ट दिखाई देती है, यही हमारी शक्ति और कांम करने का जब्बा है।
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सोनिया गोयल ने जीवनभर समाज सेवा का संकल्प तो लिया ही है साथ ही मृत्यु उपरांत उन्होंने अपने शरीर के अंगों को जरूरतमंदों को दान करने का संकल्प पत्र भर कर समाज को एक नया मार्ग दिखाया है। सोनिया गोयल के हौसल बुलंद है और वह लगातार पूरी समपर्ण के साथ समाज सेवा में जुटी हुई हैं।




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