कोरबा //// कोयला मंत्री के दौरे के बाद एसईसीएल की खदानों में हड़कंप मचा हुआ लक्ष्य प्राप्ति को लेकर कोल इंडिया चेयरमैन और कोयला मंत्री द्वारा दी गई चेतावनी के बाद एसईसीएल अब फर्जी तरीके से लक्ष्य प्राप्ति की योजना पर काम कर रहा है इस योजना के अंतर्गत यही होता है कि खदानों के अंदर ही अवैध तरीके से कोयले का भंडारण कर अब लक्ष्य प्राप्ति करने की तैयारी जोरों पर आंकड़ों की हेराफेरी करने के काम को अंजाम दिया जाना है इससे कंपनी को भंडारण और परिवहन पर डबल खर्चा आता है लेकिन लक्ष्य की प्राप्ति हो जाने से सार्वजनिक रूप से जो छीछालेदर बचा जा सकता है यह लक्ष्य प्राप्ति का छद्म तरीका है इसको देश की बहुत सी कोल इंडिया की कोयला उत्पादन कंपनियां करती है लेकिन उच्च अधिकारिओं की मिली भगत से सईसीएल में यह परंपरा लगातार जारी है शिकायत में यही कहा है प्रशासन की मिलीभगत से यह काम किया जा रहा है
ऐसा ही एक मामला एसईसीएल की कुसमुंडा कोल माइंस का प्रकाश में आया है जिसकी शिकायत कोयला मंत्रालय से लेकरप्रधानमंत्री कार्यालय औरकोल इंडिया के दफ्तर में लिखित रूप में की गई है फोटोग्राफ भी साथ में संलग्न है पर ताज्जुब इस बात का है कि शिकायत को लेकर ना तो है एसईसीएल प्रबंधन ने किसी तरीके का कोई एक्शन लिया है और ना ही कोल इंडिया ने इस शिकायत पर कोई जांच बैठा ली है लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से शिकायतकर्ता को आश्वासन का पत्र मिला है कि जल्द ही इस मामले का खुलासा जांच एजेंसी से कराएं जाएगा
शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुसमुंडा परियोजना में वार्षिक लक्ष्य पाने के लिए अनियमितताएं की जा रही है वार्षिक लक्ष्य प्राप्ति करने के लिए खदान के भीतर कोयला का स्टाफ किया जा रहा है जिसके कारण उस कोयले को फिर से उठाकर रेलवे साइडिंग या अन्य स्टाक यार्ड में रखना होगा निसंदेह कंपनी को इस तरीके के कार्य का अतिरिक्त खर्चा वहन करना होगा केंद्रीय अध्यक्ष ने कुसमुंडा महाप्रबंधक पर भी अधीनस्थ अधिकारियों को दबाव पूर्वक अनैतिक कार्य करने का आरोप लगाया है इसके अलावा लक्ष्य प्राप्ति के लिए कम कोयले को अधिक दर्शाया जा रहा है कोयले में मिट्टी व पत्थर का मिलान समान बात है खदान से कितना कोयला निकला इसकी कहीं कोई रिकॉर्डिंग नहीं होती अधिकारी द्वारा कोयले में मिट्टी व पत्थर मिलाना सामान्य बात है खदान से कितना कोयला निकाला इसका कहीं कोई रिकॉर्डिंग नहीं अधिकारी कोयले को मिट्टी को कोयला बनाकर निकासी कर देते शिकायतकर्ता ने 31 मार्च 2021 के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी से कोयले की मात्रा की जांच करवाने की मांग की है इससे कुसमुंडा परियोजना में हो रही कोयले की अनियमितता सामने आ सकेगी खदान के अंदर एक से डेढ़ किलोमीटर कोयला स्टॉक करने के लिए कुछ कुसमुंडा महाप्रबंधक से जवाब सवाल करने की मांग की है इस मामले में सतर्कता विभाग ने पत्राचार कर शिकायतकर्ता को पत्र से सं पुष्टि की है




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