कोंडागांव//
मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण के तुरंत बाद किसानों के पेंशन
का दायरा बढ़ाने का जो निर्णय किया है, उसका
अखिल भारतीय किसान महासंघ (आइफा) ने स्वागत किया है तथा इसके लिए प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर बधाई दी है. डॉक्टर त्रिपाठी ने यह भी कहा कि हमें यह
नहीं भूलना चाहिए कि, किसानों की बेहतरी के लिए अभी बहुत कुछ
किया जाना शेष है और आपके द्वारा इस दिशा में उठाए गए हर सकारात्मक कदम का हम समर्थन करेंगे।
आइफा
के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि चुनाव के पहले भारतीय जनता
पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में किसानों के मुद्दों को उठाने के लिए विभिन्न किसान
संगठनों से सुझाव मांगे थे. इसी संदर्भ में नई दिल्ली में आठ मई को श्री राजनाथ सिंह जी के निवास पर भाजपा के
संकल्प पत्र निर्माण समिति की बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें कि अखिल भारतीय किसान महासंघ
आईफा के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी के द्वारा देश के सभी वरिष्ठ किसानों को पेंशन दिए जाने
का सुझाव दिया गया था,जिसे भाजपा की संकल्प पत्र समिति ने
सर्वसम्मति से पारित करते हुए अपने चुनावीसंकल्प पत्र में शामिल किया था. अब
जबकि भारतीय जनता पार्टी की पुनः सरकार बनी तो प्रधानमंत्री ने अपनी पहली ही
कैबिनेट की बैठक में किसानों की पेंशन तीन हजार रुपये करने तथा संख्या के लिहाज से
और किसानों को शामिल करने का निर्णय किया है, जो
स्वागत योग्य है. डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि हालांकि हम लोगों की मांग न्यूनतम 4 से 5
हजार रुपए पेंशन की थी, फिर भी सरकार के इस फैसले से किसानों
का मनोबल तो बढ़ेगा ही , साथ ही कृषि क्षेत्र में जो नाउम्मीदी घर कर गई थी, उससे उबरने में सहायता मिलेगी. किसानों में
आत्मविश्वास लौटेगा. उन्होंने कहा कि किसान की मौत के बाद उसकी विधवा को भी 1500
रुपये की पेंशन, सरकार की महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता
को दर्शाता है.
आइफा
की ओर से डॉ त्रिपाठी ने आज प्रधानमंत्री को इस आशय का एक आभार ज्ञापन पत्र ईमेल
से भेजा है और इस पत्र में उनसे आग्रह किया गया है कि किसानों की अन्य कई समस्याएं
है, जिनकी बराबर चर्चा तो होती है, लेकिन उसके निराकरण के लिए ठोस और
जमीनी स्तर पर प्रयास नहीं होते, वैसे
मुद्दों को प्रधानमंत्री प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई
करेंगे. डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि किसान हो या कृषि क्षेत्र इसमें नीतिगत बदलाव की
जरुरत है. तभी भारतीय कृषि का शुक्लपक्ष आएगा. उन्होंने उम्मीद की है कि वर्तमान
की केंद्र सरकार बड़े व ठोस फैसले लेने में सक्षम है और उम्मीद की जा रही है कि
वर्ष 2022 तक किसानों की आय दो गुनी करने की प्रधानमंत्री ने जो वादा किया है, वह उसे निर्धारित समय में अमल में ले
आएंगे.
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