मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 75 से 100 एकड़ जमीन चिन्हित करने के दिए निर्देश02 अक्टूबर 2021 से पहले कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देशमहात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना के अनुरूप कार्यों को आगे बढ़ाएगी परियोजनामिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हुए किया जाएगा सेवा-ग्राम का निर्माणसभी प्रकार के कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी, लोक कलाओं और शिल्पकारों को प्रोत्साहन के साथ-साथ वैचारिक आदान-प्रदान भी होगारायपुर के सेवा ग्राम में बुजुर्गों के लिए 'दूसरा घर' और वंचितों के लिए स्कूल भी किया जाएगा स्थापित
रायपुर, 14 सितंबर 2021///// आजादी के 75वें वर्ष में आजादी की लड़ाई के मूल्यों, सिद्धांतों, आदर्शों तथा महात्मा गांधी की ग्राम-स्वराज की संकल्पना को अक्षुण्ण रखने के लिए नवा-रायपुर में भी वर्धा की तर्ज पर सेवा-ग्राम की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इसके लिए नवा-रायपुर 75 से 100 एकड़ की जमीन चिन्हांकित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि संस्थान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं आत्मनिर्भर-ग्राम की कल्पना को साकार करने के लिए सभी प्रकार के कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था का प्रावधान भी किया जाए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने 02 अक्टूबर 2021 से पहले इस संबंध में कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

फ़ाइल फोटो
स्वतंत्रता आंदोलन की यादों और राष्ट्रीय इतिहास को भी इसके माध्यम से जीवंत रखा जा सकेगा। गौरतलब है कि इस परियोजना के पीछे महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम है, जिसकी स्थापना वर्ष 1936 में महात्मा गांधी और उनकी सहधर्मिणी कस्तूरबा के निवास के रूप की गई थी, ताकि वहां से वे मध्य भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर सकें। वर्धा का यह संस्थान महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप ग्रामीण भारत के पुननिर्माण का केंद्र भी था। गांधीजी का मानना था कि भारत की स्थितियों में स्थायी रूप से सुधार के लिए ग्राम-सुधार ही एकमात्र विकल्प है। अब 21वीं सदी में महात्मा गांधी के उन्हीं सपनों के अनुरूप ग्राम-सुधार के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए नवा-रायपुर में सेवा-ग्राम की स्थापना की जा रही है। इस सेवा-ग्राम का निर्माण मिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हुए किया जाएगा। यह परियोजना गांधी-दर्शन को याद रखने और सीखने

रायपुर में प्रस्तावित सेवाग्राम में गांधीवादी सिद्धांतों, ग्रामीण कला और शिल्प के केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां अतिथि विषय-विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही वहां वृद्धाश्रम तथा वंचितों के लिए स्कूल भी स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पर्यटन के अवसरों को बढ़ा देकर, छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को प्रोत्साहन देकर, बुजुर्गों को दूसरा-घर देकर और वैचारिक आदान-प्रादन के लिए छत्तीसगढ़ में एक विश्वस्तरीय व्यवस्था का निर्माण करके स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण करना है। सेवा-ग्राम में प्रस्तावित 'विजिटर्स सेंटर' सीखने, निर्वाह करने और गांधी के सिद्धांतों का स्मरण करने का केंद्र जगह होगा।




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