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गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलता संबल

Anil Choubey 07-09-2021 11:36:19


 नसीम अहमद खान, सहायक संचालक

रायपुर, 08 सितम्बर 2021/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में निर्मित गौठान और साल भर पहले शुरू हुई गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है। गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 100 करोड़ रूपए से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है। खरीदे गए गोबर से राज्य के लगभग 6000 गौठानों में बहुतायत रूप से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। गौठानों अब तक उत्पादित एवं विक्रय की गई खादों का मूल्य 120 करोड़ रूपए के पार हो गया है। गोधन न्याय योजना में ग्रामीणों की बढ़-चढ़कर भागीदारी में इसे न सिर्फ लोकप्रिय बनाया है बल्कि इसके माध्यम से जो परिणाम हमारे सामने आए हैं वह बेहद सुखद है।



गोधन न्याय योजना अपने आप में एक ऐसी अनूठी योजना बन गई है, जो बहुआयामी उद्देश्यों को अपने आप में समाहित कर लिया है। इस योजना के शुरूआती दौर में लोगों के मन में कई तरह के सवाल और इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं थी, जिसे गौठान संचालन समिति और गौठान से जुड़ी महिलाओं ने निर्मूल साबित कर दिया है। इस योजना से हमारे गांवों मेेें उत्साह का एक नया वातावरण बना है। रोजगार के नए अवसर बढ़े हैं। पशुपालकों, ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का जरिया मिला है। महिला स्व सहायता समूहों को को स्वावलंबन की एक नई राह मिली है।

पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ उन्हें चारे-पानी का एक ठौर देने के उदेद्श्य गांवों में स्थापित गौठान और गोधन न्याय योजना के समन्वय से वास्तव में गौठान अब ग्रामीण के आजीविका के नया ठौर बनते जा रहे है। गौठानों में महिला समूहों द्वारा जिस लगन और मेहनत के साथ आयमूलक गतिविधियां सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। वह अपने आप में बेमिसाल है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का कहना है कि हमारे गांव शक्ति का केन्द्र रहे हैं। ग्रामीण संसाधनों ने इतनी शक्ति होती है कि उससे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था संचालित हो। हमें अपनी संस्कृति, अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान से जुड़े रहकर विकास की गति को बढ़ाना हो तो इसका सबसे अच्छा साधन है अपने परम्परागत संसाधनों का सम्मान और मूल्य संवर्धन करते हुए ऐसा विकास, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण जनता की सीधी भागीदारी हो।

गोधन न्याय योजना और हमारे गौठान वास्तव में ग्रामीणों की योजना है और उन्हीं के द्वारा उन्हीं की भलाई के लिए संचालित की जा रही है। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी की राशि का आंकड़ा 100 करोड़ के पार हो गया है। यह कोई छोटी बात नहीं है। गोबर को बेचने वाले और खरीदने वाले और उससे वर्मी कम्पोस्ट से लेकर विविध उत्पाद तैयार करने वाले गांव के ही है। इससे यह बात स्पष्ट है कि हमारे गांव रोजगार और उत्पादन के केन्द्र बिन्दु बन सकते हैं, जो गांधी जी के ग्राम स्वराज का उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ सरकार सुराजी गांव योजना- नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी और गोधन न्याय योजना के जरिए ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की ओर तेजी से बढ़ रही है।



गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 100 करोड़ 82 लाख रूपए की गोबर की खरीदी गौठानों में हो चुकी है। गौठान समितियों को 32 करोड़ 94 लाख तथा महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 21 करोड़ 42 लाख रूपए के लाभांश का वितरण किया जा चुका है। गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से लेकर आय अर्जन की विविध गतिविधियों में जुटीं समूह की महिलाएं लगन और मेहनत से जुटी है। उनकी लगन और मेहनत ने यह बात प्रमाणित कर दी है, कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी विषम हो उसे पुरूषार्थ से पराजित किया जा सकता है। महिला समूहों ने उच्च गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट खाद तैयार कर एक नया कीर्तिमान रचा है। छत्तीसगढ़ के गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की मांग पड़ोसी राज्य भी करने लगे हैं। झारखंड राज्य ने डेढ़ लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट सप्लाई का आर्डर रायगढ़ जिले को मिला है। यह गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ राज्य से लगे सीमावर्ती राज्यों के किसान भी छत्तीसगढ़ के बार्डर इलाके के गौठानों में आकर वर्मीकम्पोस्ट क्रय कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना को स्काच गोल्ड अवार्ड मिलना राज्य के लिए गौरव पूर्ण उपलब्धि है।

गोधन न्याय योजना के तहत अब तक राज्य में 10 हजार 112 गौठान स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 6112 गौठान निर्मित और संचालित हैं। इस योजना से लाभान्वित होने वालों में 44.51 प्रतिशत महिलाएं हैं। 48.10 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 7.82 प्रतिशत अनुसूचित जाति के तथा 40.58 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग के पशुपालक हैं। 79 हजार से अधिक भूमिहीन परिवारों को इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त आय का जरिया सुलभ हुआ है। महिला समूहों द्वारा गौठानों में अब तक 7 लाख 80 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 6 लाख 13 हजार क्विंटल खाद का विक्रय हो गया है। गौठानों में 3 लाख 46 हजार क्विंटल सुपर कम्पोस्ट खाद में से 1 लाख 60 हजार क्विंटल खाद बिक चुकी है। गौठानों में सफलतापूर्वक गोबर की खरीदी और आयमूलक गतिविधियों के संचालन से 1634 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। यह गोधन न्याय योजना के सार्थकता और उसके जरिए होन वाले लाभ का परिणाम है।

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