नरेन्द्र कुमार वर्मा..
दिल्ली..//// .देश की सर्वोच्च अदालत ने उन रियल एस्टेट कम्पनियों को बड़ा आईना दिखाया है जो पैसों के बल पर कुछ भी करने का दम्भ भरती थी। नोएडा प्राधिकरण के साथ मिलकर सुपरटेक ने भ्रष्टाचार का जो खेल खेला था वह भरभरा कर उसके ऊपर ही गिर गया। एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए अदालत ने उन फ्लैट मालिकों को 12 फीसदी ब्याज समेत मिलेगा पैसा लौटने का आदेश भी दिया जिनका पैसा बिल्डर ने फंसा रखा था। देश की सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को भी कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जिस तरह से आप बहस कर रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि आप प्रमोटर हैं। आप घर खरीदने वालों के खिलाफ नहीं लड़ सकते। एक सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में, आपको तटस्थ रुख अपनाना होगा। आपका आचरण आंख, कान और नाक से टपकते भ्रष्टाचार को दर्शाता है और आप घर खरीदने वालों में दोष खोजने की कोशिश कर रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को नोएडा के एक हरित क्षेत्र में रियल एस्टेट डेवलपर सुपरटेक के दो आवासीय टावरों को मंजूरी देने और फिर सूचना के अधिकार को अवरुद्ध करने के लिए नोएडा प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए भवन योजना के बारे में फ्लैट खरीददारों के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नोएडा प्राधिकरण इससे पहले भी उच्च न्यायालय में बहुत देर से शिकायत करने के लिए घर खरीददारों को दोषी ठहराने के प्रयास में जुटा था। मगर सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2014 के फैसले को बरकरार जिसमे सुपरटेक को एक एक्सपर्ट बॉडी की देखरेख में इन टावरों को गिराने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक कंपनी को दो महीने के भीतर सभी फ्लैट मालिकों को ब्याज सहित पैसा वापस करने के लिए कहा हैं साथ ही रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को 2 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश भी दिया एसोसिएशन ने ही अवैध निर्माण के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया।
सर्वोच्च अदालत ने नोएडा प्राधिकरण के साथ ही नगर निगम को भी अग्नि सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन में 40-मंजिला टावरों के अवैध निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिल्डर के साथ मिलीभगत करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। सुपरटेक को नोएडा प्राधिकरण 2009 में यहां बिलन्डिंग बनाने की मंजूरी दी थी जो उस वक्त भी अवैध थी क्योंकि इसने न्यूनतम दूरी मानदंड का उल्लंघन किया था। साथ ही बिल्डर ने दूसरे फ्लैट खरीददारों की सहमति के बिना भी मंजूरी ली थी। इलाहाबाद
हाईकोर्ट के 2014 के फैसले के पक्ष और विपक्ष में घर खरीददारों की ओर से दायर कई याचिकाओं पर आज यह महत्वपूर्ण फैसला सर्वोच्च अदालत से आया है। इससे पहले 11 अप्रैल 2014 को, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार महीने के भीतर दोनों इमारतों को ध्वस्त करने और फ्लैट खरीददारों को पैसे वापस लौटाने का आदेश दिया था। निश्चित तौर पर इस फैसले से नोएडा प्राधिकरण की आंख खुलेगी।




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