रायपुर/// डॉक्टर रमन सिंह सरकार की बहू-उद्देशीय परियोजना स्काईवॉक इन दिनों विवाद की चरम सीमा पर है, मामला स्काईवॉक के स्ट्रक्चर को तोड़ा जाए या कोई नए स्वरूप में उसका उपयोग किया जाए 22 करोड़ से शुरू हुई इस परियोजना में अब तक करीब 60 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए हें योजना के मुखिया तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूढत होते थे शुरू में जब इस योजना का शिलान्यास कर तोड़फोड़ शुरू की गई तो लोगों को समझ में नहीं आया कि सरकार बनाना क्या चाह रही है सरकार ने कनफूजन दूर करने भर पूर विज्ञापन दिए | शहर की सबसे सुंदर परियोजनाओं में से एक बनाने के लिए भरपूर विज्ञापन दिए तरह-तरह के चित्र होल्डिंग्स में भी सम्मानित किए गए मामला उसी वक्त औचित्य को लेकर खड़ा हो गया था आम लोगों का तर्क था की पैदल चलने वालों को दी जाने वाली सुविधा के बराबर ट्रैफिक नहीं है इससे बेहतर होता सड़क के दोनों किनारे फुटपाथ का निर्माण कर दिया जाता साथ ही ज़ेबरा क्रॉसिंग को शक्ति से लागू कर दिया जाए तो मामला बेहतर ढंग से हल हो सकता है लेकिन मोर रायपुर बनाने का तथाकथित आधुनिक सपना लिए मंत्री जी ने इस परियोजना को मूर्ति रूप देने का दृढ़ संकल्प ले लिया था सरकार थी दबदबा था मीडिया भी दवा सहमत था लेकिन सोशल मीडिया पर और अखबार की किसी न किसी कोने में इसका विरोध झलकता तो जरूर था | वक्त बीत गया स्काईवॉक का काम भी तेजी से आगे बढ़ता गया प्रथम चरण में तो जिस नागपुर की कंपनी को यह काम मिला था उसने किया और निविदा शर्तों के आधार पर मिलने वाले पैसे को उसने चुनाव पूर्व सरकार से ले लिया पैसा नगरी निकाय का था कैसे भगतन किया गया यह एक जांच का विषय है इस बीच में चुनाव नजदीक आ गये विवाद तो बढ़ना ही था विवाद को बढ़ता देख ओरिजिनल कंपनी जिसने टेंडर के द्वारा स्काई वक हासिल किया था ने लीगल या इलीगल टेंडर को सब लेट कर दिया सब लेट कंपनी रायपुर की थी नियम तो यह हे की बिना सरकार की सहमती के सबलेट हो ही नहो सकता तीसरे पेटी ठेकेदार ने थोड़ा बहुत स्काई को बनाना शुरू किया मामला तकनीकी तौर पर काफी जटिल था हवा में काम करना था और एक मजबूत आकाशीय फुटपाथ बनाना था इलेक्शन आ गया मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार का ताजमहल कहकर मुद्दा बनाया था उस वक्त भी चैनलों में जनसमूह से इसके औचित्य पर प्रश्न खड़ा किया था तब भी लोगों ने इससे औचित्य ही नहीं बताया था 7 मीटर (22 फीट से ज्यादा) ऊंचाई पर सीढ़ियों से चढ़कर कितने लोग जाएंगे, विशेषज्ञों ने यह सवाल उठा दिया है। पीडब्ल्यूडी ने सर्वे के आधार पर दावा किया कि शास्त्री चौक और अंबेडकर अस्पताल चौक पर रोजाना सुबह से रात तक 44 हजार लोग पैदल होते हैं, जो इसका उपयोग करेंगे। लेकिन जानकारों का मानना है कि ऊंची सीढ़ियों की वजह से केवल युवा ही इसका इस्तेमाल करेंगे इसलिए आमतौर पर यह खाली ही रहेगा। इस राय के बाद नगर निगम ने कुछ अरसा पहले विशेषज्ञों की बैठक की थी और उसमें भी यह बात सामने आई कि स्काईवॉक पैदल लोगों के लिए उपयोगी नहीं रहेगा। विवाद को लेकर जनमत // लोक निर्माण विभाग ने आज रायपुर शहर के शास्त्री चौक में सड़कों के ऊपर निर्माणाधीन स्काई वाक के संबंध में आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किया है। रायपुर शहर के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, व्या उल्लेखनीय है कि रायपुर शहर के शास्त्री चौक में (मेकाहारा से शास्त्री चौक तक एवं जयस्तंभ चौक से शास्त्री चौक तक) निर्माणाधीन स्काई वाक के संबंध में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 01 मार्च 2019 को छत्तीसगढ़ विधानसभा की समिति कक्ष में उक्त निर्माणाधीन स्काई वॉक के संबंध में अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक लेकर समीक्षा की गई थी। बैठक में निर्माणाधीन स्काई वाक का निर्माण पूर्ण कर उपयोग किया जाए अथवा तोड़ कर हटाया जाना चाहिए अथवा अन्य वैकल्पिक उपयोग में लाया जाए के संबंध में आम जनता, जनप्रतिनिधि, लालगंगा-बा
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