राम प्रताप,, ब्यूरो चीफ उत्तराखंड,
देहरादून, //// मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2021-22 के प्रथम अनपूरक बजट के अंतर्गत 572078 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में राजस्व व्यय के अंतर्गत 293053 तथा पूंजीगत व्यय केअंतर्गत 2030.25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। केन्द्र पोषित योजनाओं में 3178. 87 करोड़ एवं वाहय सहायतित बजट में 56 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ उत्थान चैरिटीबल ट्रस्ट केअंतर्गत प्रस्तावित कायोंर् के लिए 15 करोड़ तथा पर्यटन विभाग के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर भूमि क्रय करने के लिए 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र में मंगलवार को सरकार की ओर से 572078 का अनुपूरक बजट पेश किया जिसका जिसे पारित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वरोजगार योजना के तहत सौ करोड़, महिला पोषक योजना के तहत 16.5 करोड़, सौभाग्य योजना के लिए 8.34 करोड़, आंगनबाड़ी के मानदेय हेतु 33 करोड़ का प्रावधान किया है जिसे पारित कर दिया गया है।
विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विधानसभा में 3 विश्वविद्यालयों से जुड़े संशोधन विधेयक पटल पर प्रस्तुत किए। डॉ. धन सिंह रावत ने आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय, डीआईटी विश्वविद्यालय तथा हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के संशोधन विधेयक शामिल है जिन्हें पुनस्र्थापित किया गया।
सदन में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड फल पौधशाला विनियमन संसोधन विधेयक सदन पटल पर प्रस्तुत किया। इसी प्रकार संसदीय कार्य मंत्री व शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने सदन के पटल पर जीएसटी विधेयक प्रस्तुत किया। इसके अलावा संसदीय कार्यमंत्री ने उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रावधान संसोधन विधेयक भी सदन में प्रस्तुत किय। इस विधेयक के पारित होने के बाद मलिन बस्तियों को राहत मिलेगी तथा तीन वर्ष का ध्वस्तीकरण नहीं होगा।
कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने नियम 58 के तहत सदन में कार्यस्थगन की मांग की तथा काजी निजामुद्दीन के साथ मिलकर जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा उठाया। उन्होने कहा कि स्थाई निवासी और जाति के प्रमाण-पत्र के मानकों को का विषय सदन के लिए आवश्यक है तथा इस पर अविलंब कार्यवाही होनी चाहिए। ममता राकेश तथा काजी निजामुद्दीन के इस प्रश्न पर संसदीय कार्य मंत्री बंशीधर भगत ने यह जानना चाहा कि कांग्रेस इसे किस नियम के तहत लाई है। इसी संदर्भ में सुबोध उनियाल ने भी सरकार की ओर से कहा कि प्रश्न काल समाप्त हो गया है। ऐसे में कांग्रेस का यह विषय लाना उचित नहीं है। प्रश्नकाल में सरकार की ओर से 18 प्रश्नों के उत्तर दिये गए। मंगलवार को सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही विपक्ष ने सदन के बाहर जमकर हंगामा किया। विपक्ष के कई विधायक विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध करने के लिए सदन की सीढ़ियों पर बैठ गए तथा धरना दिया। कांग्रेस विधायक हरीश धमी ने मीडिया से कहा कि उनके क्षेत्र धारचूला हमें मोबाइल केक्टीविटी नहीं है जिसके कारण लोग नेपाल के सिम उपयोग कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि देश में सारे तीर्थ स्थान और सारे पर्यटन स्थल खुल चुके हैं लेकिन उत्तराखंड सरकार ने सिर्फ चारधाम यात्रा बंद कर रखा है जिससे स्थानीय लोगों और व्यापारियों की रोजी-रोटी संकट में है। सरकार का ध्यानाकर्षण करने केलिए उन्होंने सीढ़ियों पर धरना दिया। कांग्रेस विधायक ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड का शुरू से ही विरोध हो रहा है। तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी लगातार बोर्ड को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं लेकिन इसको लेकर सरकार का रवैया लगातार उदासीन बना हुआ है। विपक्ष अब इस मामले पर सदन में प्राइवेट बिल लाने जा रहा है, जिसमें वह सत्तापक्ष के विधायकों से भी मत की मांग करेंगे और इस बिल के माध्यम से वह देवस्थानम बोर्ड को निरस्त करने का प्रस्ताव रखेंगे।
सीएम से मिला पुरोहितों का प्रतिनिधि मंडल
मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में देवप्रयाग विधायक विनोद कण्डारी और केदारनाथ की पूर्व विधायक शैलारानी रावत के नेतृत्व में केदारनाथ व बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से तीर्थ पुरोहितों, हक हकूक धारियों और पण्डा समाज का किसी प्रकार का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
वरिष्ठ नेता मनोहर कांत ध्यानी को संबंधित तीर्थ पुरोहितों के पक्ष को जानकर पूरी रिपोर्ट देने का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी पक्षों को सुनकर उनकी चिंताओं का समाधान करेगी।हमारे लिए किसी की अनदेखी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें आपस में निरंतर संवाद बना रहे। संवाद से ही समस्याओं का समाधान होगा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी वार्ता के माध्यम से रास्ता निकाले जाने पर सहमति व्यक्त की
19 प्रश्न तथा सात विधेयक सदन पटल पर प्रस्तुत
मंगलवार को विधानसभा सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही के दौरान सदन पटल पर सात विधेयक प्रस्तुत किए गए। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अपनी विधानसभाओं से जुड़े 19 प्रश्न उठाए जिसका सरकार कीओर से जवाब आया। इन विधायकों में आदेश चौहान,प् ा्रीतम पंवार, काजी निजामुद्दीन, मनोज रावत, फुरकान अहमद के नाम शामिल र्है। प्रश्न काल के बाद सरकार कीओर से सात विधेयक प्रस्तुत किए गए जिनमें उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों से थे। चार विधेयक अन्य विषयों के थे। इन विधेयकों में आइएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, डीआइटी विश्वविद्यालय(संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड फल पौधशाला (विनियमन) विधेयक, उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रविधान (संशोधन) विधेयक, तथा उत्तराखंड विनियोग (2021-22 का अनुपूरक) विधेयक शामिल है।
वर्ग चार की भूमि पर अतिरिक्त वसूली का विरोध
वर्ग चार की भूमि के विनियमितिकरण हेतु शासन-प्रशासन द्वारा अतिरिक्त राशि वसूलने के शासनादेश का विरोध किया जा रहा है। यह विरोध देहरादून के जौनसा-बावर के नागरिकों द्वारा किया गया है। नागरिकों की ओर से किसानों पर अतिरिक्त धनराशि थोपने का आरोप लगाया जा रहा है। शासनादेश में प्रावधान किया गया है कि जिन लोगों को पर वर्ग 4 की भूमि सैकड़ों सालों से है उनसे अतिरिक्त्त वसूली की जाएगी, तब भूमि मा स्वामित्व दिया जाएगा। संशोधन के संबंध में नवक्रान्ति स्वराज मोर्चे के पदाधिकारियों ने पूर्व में भी शासन प्रशासन को अवगत कराया था, परंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई। उक्त संबंध में आज नवक्रान्ति संगठन पदाधिकारी एवं किसान मोर्चा चकराता के अध्यक्ष ने उत्तराखंड जनजाति आयोग के अध्यक्ष से देहरादून कार्यालय में मुलाकात की। जिसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भी प्रेषित की गई है। उक्त शाशनदेश में तत्काल संशोधन नहीं किया गया तो संगठन जल्द आन्दोलन करेंगे साथ इस मामले को उच्च न्यायालय उत्तराखंड में भी ले जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों को किया आमंत्रित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा भवन पहुंचते ही परिसर में अपनी मांगों को लेकर बैठे धारचूला विधायक श्री हरीश धामी और केदारनाथ विधायक श्री मनोज रावत से मुलाकात की और उन्हें अपने कक्ष में आमंत्रित किया।
विधायक श्री हरीश धामी ने अपने विधानसभा क्षेत्र धारचूला में मोबाईल कनेक्टीवीटी की समस्या की बात कहते हुए मोबाइल टावर लगाए जाने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने क्षेत्र की सङकों के संबंध में भी अपनी बात कही। विधायक केदारनाथ श्री मनोज रावत ने कहा कि कोविड संक्रमण मे कमी को देखते हुए चारधाम यात्रा को पुन: शुरू किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि धारचूला क्षेत्र में मोबाईल कनेक्टीवीटी के लिए जल्द से जल्द आवश्यक कार्यवाही की जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी अनुरोध किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा के संबंध में राज्य सरकार ने माननीय न्यायालय में अपना पक्ष रखा है।
उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए जनता के बीच जाए: संधु
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों एवं आयुक्तों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव द्वारा लगभग 02 सप्ताह पूर्व एक पत्र के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही परेशानियों एवं उनके निस्तारण के साथ ही आमजन को सहूलियत देने हेतु और क्या किया जा सकता है, इस पर सुझाव मांगे थे। लगभग 03 घन्टे से अधिक चली इस बैठक में सभी जिलाधिकारियों से बहुत से सुझाव प्राप्त हुए। मुख्य सचिव ने कहा कि जनता की उम्मीदों में खरा उतरने के लिए जनता के बीच जाना होगा। सभी जिलाधिकारी जनता से रूबरू होकर जनता की समस्याओं को हल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को क्षेत्र में दौरा करने का पूर्ण समय मिल सके इसके लिए अधिकारियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए सप्ताह में कोई दिन नियत कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि नये अधिकारियों कर्मचारियों को सिस्टम और उसके कार्यों की उचित जानकारी न होने के अभाव में कार्यों में अनावश्यक विलम्ब होता है। इसको दूर करने के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग कराने के साथ ही, विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों का प्रशिक्षण करने हेतु सभी विभाग अपना ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार करेंगे, जिसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार करने को कहा जिससे आमजन को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके और सुविधाएं प्रदान की जा सकें। निश्चित रूप से ऐसे प्रोजेक्ट्स को किसी प्रकार से धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। यदि आपके पास एक अच्छा प्रोजेक्ट है, परन्तु विशेषज्ञ नहीं हैं तो प्रोजेक्ट की सफलता के लिए विशेषज्ञ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे प्रोजेक्ट्स होते हैं जो बहुत अच्छे होते हैं, परन्तु किसी पुराने नियम जो तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप सही रहा हो परन्तु आज की परिस्थितियों के लिए अनुपयोगी हो, और उस नियम की वजह से प्रोजेक्ट्स के लिए स्टेट लेवल पॉलिसी में संशोधन की आवश्यकता है तो निश्चित रूप से पॉलिसी में सुधार पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें सॉल्यूशन फाईंडर की भूमिका निभानी है। बहुत सी ऐसी समस्याएं होती हैं जिनका सॉल्यूशन ऑफिस में बैठ कर नहीं निकाला जा सकता, परन्तु उस समस्या का हल उस क्षेत्र के नागरिक को पता होता है, कि उसे कैसे हल किया जा सकता है। क्षेत्र विशेष की समस्याओं के निस्तारण के लिए उस क्षेत्र के लोगों से भी सुझाव लिए जाने चाहिए ताकि उस समस्या का उचित हल निकाला जा सके।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई सहित सभी सचिव एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयुक्त गढ़वाल एवं कुमाँऊ सहित सभी जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।




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