*******हाथियों के उत्पात से परेशान वन विभाग के मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अभी तक छत्तीसगढ़ में हाथी द्वंद से बचने के लिए सिर्फ प्रयोग ही किए जा रहे हैं कुछ सफल तो कुछ असफल भी हुए हें पूर्ववर्ती सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि लेमरू हाथी प्रोजेक्ट को पूर्ववर्ती सरकार ने हरी झंडी नहीं देने के कारण आज हाथी पूरे छत्तीसगढ़ के जंगलों में विचरण कर रहे हैं मंत्री से जब यह पूछा गया कि हाथियों को कैसे पता चलेगा कि उनका घर लेमरू में है पर उन्होंने कहा कि हाथी बहुत ही संवेदनशील और समझदार होता है वह उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्र में ही रहना पसंद करता है विशेषज्ञों का मानना है कि लेमरू एलीफेंट रिजव उनके लिए उपयुक्त है उसमें पानी है भोजन है और घना जंगल होने के कारण हाथियों को धीरे-धीरे रास आ जाएगा और वहां पर रहने लगेंगे ***
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रायपुर 5 जुलाई//// हाथियों के लिए धान खरीदी को लेकर प्रदेश के विपक्ष भाजपा के आरोप पर वन मंत्री मो. अकबर ने यह स्पष्ट किया है कि हाथियों के लिए धान की कोई खरीदी नहीं की जा रही है। धान खरीदी वास्तव में खाद्य विभाग से वन विभाग के बीच ट्रांसफर का मामला है। हाथियों के लिए खाद्य विभाग से सड़ा हुआ धान लिए जाने के भाजपा के आरोप को उन्होंने खारिज कर दिया।
हाथियों के लिए की जा रही धान खरीदी पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर से बुधवार को मीडिया से चर्चा में कई बातों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हाथियों के दल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के मकान और फसल को पहुंचाए जाने वाले क्षति को ध्यान में रखते हुए उनके लिए सूरजपुर, धरमजयगढ़, बालोद वनमंडल में अलग-अलग स्थानों पर खुले में धान रखा गया था। इसमें से सूरजपुर वनमंडल में 3 जगहों पर हाथी ने धान खाया है। इस तरह यह शुरुआती सफलता है।
वन मंत्री अकबर ने बताया कि इस समय 16 हाथियों का दल जिसमें कुल 307 हाथी शामिल है, राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुख रूप से रेहन, तमोर पिंगला, बादलखोल अभ्यारण, प्रतापपुर, रघुनाथपुर, तपकरा, कुनकुरी, मनोरा, दुलदुला, छाल, धरमजयगढ़, कापू, लैलूंगा, बोरा, बाकारूमा कुदमुरा, करतला, पसांद, कटघोरा, रायगढ़ घरघोड़ा, तमनार, बलोद, मैनपुर, कोठारी में विचरण कर रहें हैं।
वन मंत्री ने कहा कि हाथी बहुत ही बुद्धिमान जानवर होते हैं, उनकी याददाश्त के साथ-साथ सूंघने की शक्ति काफी तेज होती है। हाथियों ने अगर एक बार धान को खाना शुरू कर दिया तो खाने की लालच में आम लोगों के मकान और खेतों में लगी फसल को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। अगर इन हाथियों को धान खाने की आदत पड़ गई तो सरकार इतनी सक्षम है कि आने वाले सालों में भी धान की व्यवस्था कर सकती है।
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मंत्री श्री अकबर ने बताया कि अब तक 09 हाथियों की रेडियो कालरिंग की गई है. हाथी मानव द्वंद रोकने के लिए हाथियों के आगमन की पूर्व सूचना गांवों में वायरलेंस, मोबाइल एवं माइक से मुनादी कर प्रसारित करना एवं ग्रामीणों को हाथियों के साथ साहचर्य बनाने की समझाइस दिया जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों को समय-समय पर मुआवजा भुगतान किया गया है।
वन मंत्री ने बताया कि बहुद्देश्यीय गजराज वाहन के उपयोग से प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाया जा रहा है. आवश्यकतानुसार गांव में हाथी मित्र आदि का गठन किया गया है. आकाशवाणी कार्यक्रम हमर हाथी हमर गोठ के माध्यम से प्रतिदिन सायं 05.30 बजे हाथियों के संभावित विचरण का प्रसारण होता है. इसके अलावा हाथियों के आगमन की जानकारी विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त करने इंटरनेट का उपयोग भी किया जा रहा है।
हाथियों से होने वाले नुकसान से बचाने खुले में धान रखने का प्रयोग सफल होता दिख रहा
सुरजपूर वनमंडल में तीन अलग-अलग स्थानों में हाथियों के दल ने खुले में रखा धान खाया

हाथियों से मानव को होने वाली हानि को रोकने गांवों में हाथियों के दल के लिए खुले स्थान पर धान रखने का जो प्रयोग किया गया है, वह सफल होता दिख रहा है। प्रदेश के तीन अलग-अलग वनमंडलों में खुले स्थान पर धान रखा गया था। इसमें से सुरजपूर वनमंडल के तीन स्थानों पर हाथियों के दल ने 14 क्विंटल धान खाया है।
प्रदेश के वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने हाथियों से होने वाले नुकसान को रोकने किए जा रहे प्रयास के संबंध में आज मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि प्रदेश के सुरजपूर, धरमजयगढ़, बालोद वनमंडल में अलग-अलग स्थानों पर खुले में धान रखा गया था। इसमें से सुरजपूर वनमंडल के बंशीपूर 1682, 1683 में हाथी ने 04 क्विंटल धान खाया है। इसी तरह टुकुडांड 43 में 04 क्विंटल तथा बगड़ा पी-9 में हाथी ने 06 क्विंटल धान खाया है।

मंत्री अकबर ने बताया कि इस समय 16 हाथियों का दल कुल 307 हाथी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुख रूप से रेहन, तमोर पिंगला, बादलखोल अभ्यारण, प्रतापपुर, रघुनाथपुर, तपकरा, कुनकुरी, मनोरा, दुलदुला, छाल, धरमजयगढ़, कापू, लैलूंगा, बोरा, बाकारूमा, कुदमुरा, करतला, पसांद, कटघोरा, रायगढ़ घरघोड़ा, तमनार, बलोद, मैनपुर, कोठारी, में विचरण कर रहें हैं। अब तक 09 हाथियों की रेडियो कालरिंग की गई है। हाथी मानव द्वंद रोकने के लिए हाथियों के आगमन की पूर्व सूचना गांवों में वायरलेंस, मोबाईल, एवं माईक से मुनादी कर प्रसारित करना एवं ग्रामीणों को हाथियों के साथ साहचर्य बनाने हेतु समझाईस दिया जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों को समय-समय पर मुआवजा भुगतान किया गया है।




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