रायपुर, 31 जुलाई 2021/ राज्य के वनांचल स्थित बस्तर जिले के टिकरीपदर से देवड़ा तक शासन की पहल पर पक्की सड़क के निर्माण से यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पहुंचना सुगम हो गया है। यहां धनपुंजी से तिरिया जाने वाले मार्ग में टिकरीपदर से देवड़ा तक लोक निर्माण विभाग द्वारा 4 करोड़ 65 लाख रूपए की लागत से साढे़ चार किलोमीटर पुल-पुलिया सहित पक्की सड़क बनाई गई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 21 जून को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उक्त सड़क मार्ग का लोकार्पण किया गया था।
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उल्लेखीय है कि छत्तीसगढ़ और ओडिसा की सीमा पर बसे देवड़ा में घने वनों के बीच शिव का मंदिर है, जिसे झाड़ेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग है, जिसके दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के साथ-साथ सीमावर्ती राज्य ओडिसा से भी भक्त बड़ी संख्या मंे पहुंचते हैं। इसके पास ही प्राचीन देवी मंदिर भी स्थापित है, यहां साल में कार्तिक पूर्णिमा तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर दो बार मेला लगता है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए शासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

रायपुर, 31 जुलाई 2021/ बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखंड के मंगनार का गौठान जहां, दोपहर के समय मवेशी साल वृक्षों के नीचे आराम करते दिखते हैं, वहीं इसी जगह बने शेड में महिलाएं अपनी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए काम करती हुई दिखती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण ग्राम सुराजी योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सपना मंगनार में साकार होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस वर्ष 26 जनवरी को विकासखण्ड बकावण्ड के ग्राम मंगनार स्थित गौठान का अवलोकन किया था।
मंगनार में गौठान के निर्माण के बाद यहां पशुओं के लिए पेयजल, चारागाह का निर्माण भी किया गया है। इसके लिए यहां लगभग एक एकड़ क्षेत्रफल में नेपियर की घास लगाई गई है। पशुओं के पीने के लिए पानी की भी अच्छी व्यवस्था है। गौठान में मिलने वाली सुविधाओं के कारण मवेशियों को यहां रहने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हो रही है। मवेशियों के गोबर से केंचुआ खाद बनाने का कार्य प्रारंभ करने के साथ ही गोधन न्याय योजना के प्रारंभ होने के बाद पशुपालकों से भी गोबर खरीदकर खाद सहित गमला, दीया आदि सामग्री कानिर्माण किया जा रहा है।
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मंगनार गौठान में महिलाओं द्वारा केंचुआ खाद बनाने के साथ ही केंचुओं की बिक्री का कार्य भी किया जा रहा है। इसी परिसर में महिलाएं मछलीपालन, मधुमक्खी पालन, नर्सरी कार्य, दिया निर्माण, कुक्कुट पालन, दोना पत्तल निर्माण, केले की खेती और मशरुम उत्पादन जैसे विभिन्न कार्य भी कर रही हैं। पंचवटी महिला स्व-सहायता समूह द्वारा अब तक चार लाख रुपए से अधिक का खाद सहित 3 लाख 84 हजार रुपए का केंचुआ भी विक्रय किया गया है। सामूहिक बाड़ी का कार्य कर रही देवांशी महिला स्व-सहायता समूह ने भी एक लाख 83 हजार रुपए की सब्जी का उत्पादन किया जा चुका है। यहां निशा स्व-सहायता समूह द्वारा मछली पालन, अलेख महिमा स्व-सहायता समूह द्वारा मधुमक्खी पालन का कार्य तथा झाड़ी बैरी माता स्व-सहायता समूह द्वारा पौधे तैयार करने का कार्य किया गया। इसी तरह अन्य महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा गोबर से गमले, दीये और कुक्कुटपालन, मशरूम उत्पादन तथा दोना पत्तल निर्माण आदि का कार्य किया जा रहा है।




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