दिव्य-दूत

NMDC commissions Rs 5,427 crore Iron ore processing plant, slurry pipeline and pellet plant in Bastar, Chhattisgarh NMDC's CSR funding supports its infrastructure and continued operations. Aastha Gurukul is transforming lives in Dantewada. असम को 3,200 मेगावॉट की नई ऊर्जा, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने रखी अदाणी पावर प्रोजेक्ट की नींव Training of Trainers Programme on Master Circulars and Vigilance Manual 2026 अदाणी पावर छोटे भंडार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति को मिला नया गौरव >> मुख्यमंत्री साय विशेष ग्राम सभा में ग्रामवासियों को जनगणना के सम्बन्ध किया जा रहा है जागरुक न्यू एज मीडिया में दक्ष बनें जनसंपर्क अधिकारी >> रजत बंसल आयुक्त मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आईओसीएल के मुख्य महाप्रबंधक ने की सौजन्य मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कचहरी चौक स्थित एसबीआई के नये भवन का किया शुभारंभ, आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं से मिलेगा लाभ “Dr. B.R. Ambedkar reminded us that ‘liberty, equality and fraternity’ are not separate ideals” >>, Amitav Mukherjee, CMD, NMDC AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है >>> मुख्यमंत्री विष्णु देव साय NMDC के डायरेक्टर फाइनेंस अनुराग कपिल ने पदभार संभाला। एएएचएल और ब्लिंकिट ने मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू की भारत की पहली 'इन-टर्मिनल' क्विक कॉमर्स सेवा APSEZ Crosses 500 MillionTonnes Cargo Milestone, Reinforcing Its Role in India’s Growth Story प्रदेश की लाइफलाइन हुई सशक्त मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी आदिवासियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार >> मुख्यमंत्री विष्णु देव साय Rare Earth Elements Minerals are at the heart of energy security, defence, capability and efforts to build a truly self-reliant India >>> Amitava Mukherjee CMD, NMDC जिन्दल स्टील को ओडिशा में दो लौह अयस्क ब्लॉकों के लिए बोलीदाता घोषित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की सौजन्य मुलाकात

जासूसी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर Pegasus; पिगासस ; >>> सुब्रमण्यम स्वामी

Anil Choubey 19-07-2021 11:22:31


मंत्रियों और पत्रकारों के फोन टैपिंग की जानकारी है 2,500 लोगों के टैप किए

नई दिल्ली /// भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक ट्वीट से तहलका मच गया है। स्वामी ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि वॉशिंगटन पोस्ट और लंदन गार्जियन एक रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले हैं जिसमें कई मंत्रियों और पत्रकारों के फोन टैपिंग की जानकारी है। कहा जा रहा है कि करीब 2,500 लोगों के टैप किए गए फोन कॉल्स को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस फोन टैपिंग के पीछे दुनिया के सबसे ताकतवर हैकिंग सॉफ्टवेयर पिगासस (Pegasus) का नाम सामने आ रहा है। बता दें कि साल 2019 में जब भारत समेत दुनियाभर के 100 से अधिक पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप अकाउंट की जासूसी हुई थी, उस समय पिगासस के बारे में पूरी दुनिया को विस्तार से जानकारी मिली थी और दो साल बाद Pegasus एक बार फिर से खबरों में है। आइए जानते हैं आखिर यह Pegasus सॉफ्टवेयर है क्या और यह काम कैसे करता है?

जासूसी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर

जासूसी की दुनिया में पिगासस का बड़ा नाम है। इससे उन फोन और डिवाइस को भी हैक किया जा सकता है जिसे लेकर कंपनियां दावा करती हैं कि यह हैकप्रूफ है। पिगासस एक स्पाईवेयर है जो चुपके से किसी भी डिवाइस की जासूसी कर सकता है। पिगासस जैसे स्पाईवेयर यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन में मौजूद रहते हैं और फोन में मौजूद गोपनीय जानकारी को हैकर्स तक आसानी से पहुंचाते हैं। आपके फोन में स्पाईवेयर है या नहीं इसका पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। आपको बता दें कि साल 2019 में पिगासस के जरिए ही भारत समेत दुनिया के करीब 1,400 पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी हुई थी। इसके अलावा अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप भी इसी सॉफ्टवेयर से हैक हुआ था।

क्या है और Pegasus और क्या-क्या कर सकता है?

इस्रायल के NSO ग्रुप/Q साइबर टेक्नोलॉजीजी ने इस स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) को तैयार किया है। पिगासस का दूसरा नाम Q Suite भी है। पिगासस दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर्स में से एक है जो एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस दोनों की जासूसी कर सकता है। पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी फोन में इंस्टॉल हो सकता है। एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद इस आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। पिगासस को किसी फोन में सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है। यह फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट को भी पढ़

सकता है यानी इससे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्स भी सुरक्षित नहीं हैं।
पिगासस सॉफ्टवेयर आपकी निजी जानकारियों पर बारिकी से नजर रख सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि फोन में इस सॉफ्टवेयर का कोई आइकन भी नहीं बनता जिसके जरिए आप इसकी पहचान कर सकें। यह सॉफ्टवेयर पासवर्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कैलेंडर, मैसेज, माइक्रोफोन, कैमरा और विभिन्न मैसेजिंग एप्स के कॉलिंग फीचर पर पल-पल नजर रखने में माहिर है। पिगासस यूजर का जीपीएस लोकेशन भी ट्रैक करता है।

56 करोड़ से भी अधिक है पिगासस सॉफ्टवेयर की कीमत

Pegasus से ही हुआ था जेफ बेजोस का फोन हैक जनवरी 2020 में 'द गार्जियन' ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 8 नवंबर 2018 को जेफ बेजोस को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजकर उनके फोन को हैक किया गया था। अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक हुआ था और हैकिंग का आरोप सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर लगा था। बेजोस को मैसेज सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के पर्सनल व्हाट्सएप अकाउंट से भेजा गया था, हालांकि अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि जेफ बेजोस के फोन से क्या-क्या डाटा चोरी हुए। जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक के पीछे भी पिगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus) का ही नाम सामने आया था।

 

MP हनीट्रैप में भी हुआ पिगासस का इस्तेमाल इस पिगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप कांड में भी हुआ था। 2020 में कई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बंगलूरू की एक कंपनी नेताओं और अफसर के फोन टैपिंग के लिए पिगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती थी। यह सॉफ्टवेयर फोन में छिपकर कॉल रिकॉर्डिंग, वॉट्सएप चैटिंग, एसएमएस के साथ अन्य चीजों की सर्विलांस आसानी से कर सकता है।

 

आईफोन पर हो चुका है हैकिंग का प्रयास 2016 में एनएसओ ने पिगासस के जरिए आईफोन को हैक करने की कोशिश की थी। जैसे ही एपल को इसकी जानकारी मिली, तो कंपनी ने तुरंत यूजर्स के लिए अपडेट जारी किया था। वहीं, 2017 में आई रिपोर्ट में पता चला था कि सबसे समाजिक कार्यकर्ता अहमद मंसूर को पिगासस की जानकारी मिली थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि हाईटेक प्लेटफॉर्म को हैक करने के लिए इस सॉफ्टवेयर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद से ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक करना आसान हो गया था।

सरकारी एजेंसियां करती हैं इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिटिजन लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां पिगासस जैसे स्पाईवेयर के जरिए उन यूजर्स की जासूसी करती हैं, जिससे सरकार को खतरा होता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर को राजनीतिक इरादों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

 

 

 

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :

ADs