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आदिवासियों की जमीन पर लगे वृक्ष कटाई की अनुमति प्रक्रिया होगी सरलीकृत >>> मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

Anil Choubey 16-07-2021 18:25:30


अधिनियम में संशोधन की अनुशंसा : कलेक्टर के स्थान पर अनुविभागीय अधिकारी दो माह की समय-सीमा में दें अनुमति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण अनुशंसाएं अभियान चलाकर वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त हितग्राहियों की भूमि में कराए जाएं सुधार कार्य: फलदार वृक्षों के रोपण के साथ अंतरवर्ती फसलों के लिए दिया जाए प्रशिक्षण प्रयास आवासीय विद्यालयों में अब प्रदेश के सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रवेश देने की अनुशंसा  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरगुजा में खुलेगा ‘‘परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र‘‘विशेष पिछड़ी जनजातियों के शिक्षित युवाओं की सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया होगी तेज

रायपुर, 16 जुलाई 2021/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित की गई छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में जनजाति हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श कर अनेक महत्वपूर्ण अनुशंसाएं की गई। 

आदिवासियों की निजी भूमि पर वृक्षों को काटने के लिए अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया को सरलीकृत करने के प्रस्ताव पर सदस्यों के साथ चर्चा के बाद सर्वसम्मति से आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों के हित में) अधिनियम 1999 एवं नियम 2000 में संशोधन की अनुशंसा की गई। जिसके अनुसार वृक्ष काटने की अनुमति कलेक्टर की जगह अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा दो माह की  समय-सीमा के भीतर प्रदान की जाए। हितग्राही वृक्ष काटने की अनुमति हेतु अपना आवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को देंगे। स्थल पर मौके का मुआयना पटवारी और रेंजर द्वारा किया जाएगा। अनुमति मिलने के बाद वन विभाग द्वारा वृक्ष की कटाई और नीलामी की कार्यवाही की जाएगी तथा वनमण्डलाधिकारी द्वारा संबंधित  हितग्राही के बैंक खाते में राशि जमा की जाएगी। इससे अवैध कटाई पर अंकुश लगेगा और आदिवासियों को उनके वृक्ष का उचित दाम मिलेगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जो हितग्राही वृक्ष लगाएंगे उन्हें काटने के लिए हितग्राहियों को केवल सूचना देनी होगी। 

बैठक में व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त हितग्राहियों की भूमि पर मनरेगा के माध्यम से भूमि समतलीकरण और सुधार का कार्य के लिए अभियान चलाने की अनुशंसा की गई। यह भी सुझाव दिया गया कि क्रेडा के माध्यम से हितग्राही की भूमि पर सिंचाई के लिए सोलर पम्प लगाया जाएगा और भूमि पर फलदार प्रजातियों जैसे हर्रा, बेहड़ा, आंवला, महुआ, बांस, आम, इमली, चिरौंजी, नींबू आदि के पौधों का रोपण किया जाए। हितग्राही को जिमीकंद, हल्दी, तिखुर जैसी अंतरवर्ती फसलों का प्रशिक्षण प्रदान करने का सुझाव भी दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति परिषद के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र लोगों को वन अधिकार पट्टे दिलाने और उनकी भूमि पर सुधार कार्य, फलदार वृक्षों के रोपण, तालाब और डबरी निर्माण के लिए सक्रिय पहल करें। अपने भ्रमण के दौरान जिला मुख्यालयों में आयोजित बैठकों में भी इन कार्याें की प्रगति की जानकारी लें। उन्होंने बीजापुर और सुकमा जिले में इसके लिए विशेष प्रयास करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में गांवों का सर्वे कर ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनके प्रारंभिक अभिलेखों का प्रकाशन कर भुईंया पोर्टल में उनकी प्रविष्टि करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा विकासखण्ड को चार गांवों में जहां राजस्व सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो गया है, वहां पट्टा पात्र किसानों ने इस वर्ष पहली बार लैम्पस में समर्थन मूल्य पर धान बेचा। उन्होंने कहा कि ऐसे शहरी क्षेत्र जहां वन भूमि है, वहां पात्रताधारियों को वन मान्यता आधार पत्र दिए जाएं।

छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में प्रयास आवासीय विद्यालय में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के साथ सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र के बच्चों को प्रवेश देने की अनुशंसा की गई। प्रयास आवासीय विद्यालय में नक्सल प्रभावित जिलों से चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। वर्तमान में नक्सल प्रभावित 9 जिलों के बच्चों को प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है। अब सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र के 25 जिलों के बच्चों को प्रवेश देने और नक्सल पीड़ित परिवारों के बच्चों को बिना प्रवेश परीक्षा के सीधे प्रयास आवासीय विद्यालय में दाखिला देने की अनुशंसा की गई। इसी तरह सरगुजा में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘‘परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र‘‘ खोलने की अनुशंसा की गई। वर्तमान में रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, नारायणपुर और कबीरधाम जिले में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र संचालित हैं, जहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। 

छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में आज पहली बार पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री पीताम्बर राम और बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री गिरधारी बैगा शामिल हुए और मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा भी की। परिषद की इससे पूर्व आयोजित बैठक में जनजाति सलाहकार परिषद में विशेष पिछड़ी जनजाति के प्रतिनिधियों को शामिल करने की अनुशंसा की गई थी। श्री गिरधारी बैगा ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मरवाही के धनौली में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और एक कन्या छात्रावास की स्वीकृति तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को बकरी पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, गाय पालन के लिए शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि जनजाति के युवा समूह बनाकर गौठानों में इन गतिविधियों को प्रारंभ कर सकते हैं, इनके लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कोदो, कुटकी के लिए हाॅलर मिल की व्यवस्था भी गौठान में की जाएगी। बैठक में विशेष पिछड़ी जनजातियों के शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की अनुशंसा की गई।  

बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेमसाय सिंह, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, राज्य जनजाति परिषद के उपाध्यक्ष श्री रामपुकार सिंह, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री बृहस्पति सिंह, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव श्री डी. डी. सिंह, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थीं ।

विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री मनोज मण्डावी, सांसद श्री दीपक बैज, संसदीय सचिव श्री इंदरशाह मंडावी,  श्री चिंतामणि महाराज, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लखेश्वर बघेल, उपाध्यक्ष सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण श्री गुलाब कमरो, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, विधायक श्रीमती देवती कर्मा, श्री विनय भगत, श्री अनूप नाग, श्री चक्रधर सिंह, श्री बोधराम कंवर, पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण अम्बिकापुर के अध्यक्ष श्री पीताम्बर राम और बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री गिरधारी बैगा के साथ ही प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य श्री नरेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी, वन विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, राजस्व विभाग की सचिव सुश्री रीता शांडिल्य, वित्त एवं नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेलमंगई डी, बस्तर संभाग के आयुक्त श्री जी.आर चुरेन्द्र, बिलासपुर संभाग के आयुक्त श्री संजय कुमार अलंग तथा सरगुजा संभाग की आयुक्त सुश्री जिनेविवा किण्डो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बैठक में शामिल हुईं ।

 

  बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री बृहस्पति सिंह, पत्थलगांव विधायक श्री रामपुकार सिंह, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन,अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव श्री डी. डी. सिंह, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थीं ।

 छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद के सदस्य तथा विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री मनोज मण्डावी, सांसद श्री दीपक बैज, संसदीय सचिव श्री इंदरशाह मंडावी,  श्री चिंतामणि महाराज, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लखेश्वर बघेल, उपाध्यक्ष सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण  श्री गुलाब कमरो, विधायक श्रीमती देवती कर्मा, डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, श्री विनय भगत, श्री अनूप नाग, श्री चक्रधर सिंह , श्री बोधराम कंवर, पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण अम्बिकापुर के अध्यक्ष श्री पीताम्बर राम और बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री गिरधारी बैगा के साथ ही प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य श्री नरेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी, वन विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, राजस्व विभाग की सचिव सुश्री रीता शांडिल्य,  वित्त एवं नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेलमंगई डी, बस्तर संभाग के आयुक्त श्री जी.आर चुरेन्द्र, बिलासपुर संभाग के आयुक्त श्री संजय कुमार अलंग तथा सरगुजा संभाग की आयुक्त सुश्री जिनेविवा किण्डो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बैठक में शामिल हुईं ।

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