दिव्य-दूत

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सत्ता की भूखी मोदी सरकार ने ‘‘कमर तोड़ महंगाई’’ से 140 करोड़ देशवासियों की आय को लूटती जार ही है । >> पूर्व केन्द्रीय मंत्री, सुबोधकांत सहाय

Anil Choubey 26-08-2021 12:48:33


आर्थिक-संकट के दौरान आसमान छूती महंगाई

रायपुर/////इसघोरसंकटकेसमयमेंआसमानछूतीकीमतेंआमलोगोंकेजलेपरनमकछिड़करहीहैं।असंवेदनशील, बेपरवाहमोदीसरकारनेगंभीरआर्थिकमंदीकेदौरानभीदेशवासियोंकोआसमानछूतीकीमतोंकेबोझकेनीचेदबादियाहै।देशवासियोंकेहाथोंमेंनकदधनराशिपहुंचानेकीबजायभाजपासरकारउन्हेंअपनीजरूरतकेसामानकेलिएज्यादामूल्यचुकानेकोमजबूरकररहीहै।

भारतीय और ज्यादा गरीब हो गए

यूपीएकीपिछलीसरकारनेबड़ीमेहनतसे 27 करोड़लोगोंकोगरीबीरेखासेबाहरनिकालाथा, लेकिनवर्तमानसरकारनेउसकीसारीमेहनतपरपानीफेरतेहुए 23 करोड़लोगोंकोवापसगरीबीरेखाकेनीचेधकेलदिया।अकेलेअप्रैलऔरमईमहीनेमें 2 करोड़लोगोंकीनौकरियांचलीगईं, 97 प्रतिशतलोगोंकोआजकमवेतनमिलरहाहै।नौकरीखोनेऔरकमवेतनमिलनेकेचलतेदेशवासियोंकोरिटायरमेंटकेलिएबचाकररखेगएअपनेप्रॉविडेंटफंडमेंसेलगभग 1.25 लाखकरोड़रु. निकालनेपरमजबूरहोनापड़ा।

आर्थिक कुप्रबंधन

जिससमयजीडीपीवृद्धिदरकमहोतीजारहीहो, ऐसेमेंसरकारद्वारामूल्योंमेंवृद्धिएकजघन्यकृत्यहैऔरइसआर्थिकबर्बादीकाकारणकेवलकोरोनानहींहै।हमारीअर्थव्यवस्थापरमहामारीकासायापड़नेसेपहलेहीअनेकविपत्तियांआचुकीथीं- हमारीवृद्धिदरवित्तवर्ष 2017 में 8.2 प्रतिशतसेघटकरवित्तवर्ष 2020 में 4.1 प्रतिशतरहगई, यहसबकुछभयावहनोटबंदी, त्रुटिपूर्णतरीकेसेलागूकीगईजीएसटीएवंमोदीसरकारकीगलतनीतियोंकेकारणहुआ।

पेट्रोलएवंडीज़लकीदरोंमेंअप्रत्याशितवृद्धि

पेट्रोलकीकीमतेंइतिहासमेंपहलीबारसभी 4 मेट्रोऔरदेशके अन्य 250 सेअधिकशहरोंमें 100 रु. कोपारकरगईहै।

1 अप्रैल, 2021 से 12 जुलाई, 2021 केबीचपेट्रोलएवंडीज़लकीकीमतें 66 बारबढ़ाईगईं। 

मोदीसरकारनेअपनेशासनकालकेपिछले 7 सालोंमेंएक्साईज़ड्यूटीसे 25 लाखकरोड़रु. सेज्यादाकामुनाफाकमाया।

पिछले 7 सालोंमेंपेट्रोलपरएक्साईज़ड्यूटीमें 247 प्रतिशत एवंडीज़लपर 794 प्रतिशतवृद्धिकीगई।पेट्रोलपरएक्साईज़मेंप्रतिलीटरवृद्धिपिछले 7 सालोंमें 23.42 रु. प्रतिलीटरऔरडीज़लपर 28.24 रु. प्रतिलीटर कीगई।

Timeline

Excise Duty

Per litre Increase in excise

% Increase in Excise per Ltr.

April-2014

Rs 9.48

Rs 23.42

247%

July-2021

Rs 32.90

 

Timeline

Excise Duty

Per litre Increase in excise

% Increase in Excise per Ltr

April-2014

Rs 3.56

Rs 28.24

794%

July-2021

Rs 31.80

2014-15 मेंपेट्रोलऔरडीजलपरएक्साइज़ड्यूटीसेअर्जितआय 1,72,000 करोड़रु. थी, जिसे 2020-21 मेंबढ़ाकर 4,53,000 करोड़रु. करदियाहै।

भारतसरकारपेट्रोलकीबिक्रीसे 32रु90पैसेप्रतिलीटरवसूलकरतीहै, जिसमें 20रुपए50 पैसे से सकेरूपमेंलियाजाताहै।सेससेकमायागयामुनाफाराज्यसरकारोंकेसाथसाझानहींकियाजाता।इसलिएभारतसरकारपेट्रोलबेचकरजो 62 प्रतिशतमुनाफाकमातीहै, उसमेंसेएकपैसाभीराज्यसरकारोंकोनहींमिलता।डीज़लपरकेंद्रसरकार 31रुपए80 पैसे प्रतिलीटरकमातीहै, जिसमें से 22 रु. प्रतिलीटरसेसकेरूपमेंलियाजाताहै।यानिडीज़लपरसेसकेरूपमेंभारतसरकारद्वाराकमाएगए 69 प्रतिशतमुनाफेकाएकपैसाभीराज्यसरकारोंकोनहींमिलता। 

राज्योंमेंकीमतेंकमकरनेकेलिएअक्सरयहतर्कदियाजाताहैकिराज्यसरकारोंकोअपनावैटकमकरनाचाहिए। 2020-21 मेंसभीराज्योंनेमिलकर 2.17 लाखकरोड़रु. वैटकेरूपमेंएकत्रितकिए, जोकिराज्यसरकारद्वाराएक्साईज़केरूपमेंएकत्रितकिएगए 4.53 लाखकरोड़रुपएकेमुनाफेकाकेवल 48 प्रतिशतहै।यहबातभीगौरतलबहैकिभारतसरकारनेराज्योंकीतुलनामेंबहुतज्यादाअनुपातमेंएक्साईज़शुल्कबढ़ायाहै, जिसकेकारणमहंगाईमेंअत्यधिकवृद्धिहुई, इसलिएकीमतोंकोकमकरनेकेलिएभारतसरकारद्वाराएक्साइजड्यूटीमेंकीगईवृद्धिकोकमकियाजानाजरुरीहै।

पेट्रोलएवंडीज़लपरअत्यधिकएक्साईज़शुल्ककेनितांतनकारात्मकप्रभावपड़तेहैंक्योंकिइससेप्रत्यक्षवअप्रत्यक्षरूपसेमध्यमआयवर्गएवंनिम्नआयवर्गकेलोगप्रभावितहोतेहैं।

डीज़लकीऊँचीकीमतेंकिसान-विरोधीभीहैंक्योंकिवोप्रत्यक्षरूपसेडीज़लकेउपभोक्ताहैंऔरडीज़लकेमूल्योंमेंवृद्धिकाउनपरसीधाप्रभावपड़ताहै। 

कच्चेतेलकाप्रतिबैरलऔसतमूल्य 2011-12 से 2013-14 केदौरान 105 अमेरिकीडॉलरप्रतिबैरलसे 112 अमेरिकीडॉलरप्रतिबैरलकेबीचरहा, जबमई, 2014 मेंकांग्रेससरकारकाकार्यकालसमाप्तहुआ, तबकच्चेतेलकीकीमतअंतर्राष्ट्रीयस्तरपर 108 डॉलरप्रतिबैरलथी, लेकिनदेशमेंपेट्रोलवडीज़लकाप्रतिलीटरमूल्यक्रमशः 71.51 रु. और 57.28 रु. था।

Year

Average Crude Rates

(USD per BBL)

2004-05

39.21

2005-06

55.72

2006-07

62.46

2007-08

79.25

2008-09

83.57

2009-10

69.76

2010-11

85.09

2011-12

111.89

2012-13

107.97

2013-14

105.52

2014-15

84.16

2015-16

46.17

2016-17

47.56

2017-18

56.43

2018-19

69.88

2019-20

60.47

2020-21

44.82

पिछलीयूपीएसरकारडीज़लकीकीमतोंकोनियंत्रणमेंरखनेकेलिएडीज़लपरनुकसानउठायाकरतीथी, क्योंकिडीज़लकीबढ़ीकीमतोंकामहंगाईएवंपरिवहनकीलागतपरसीधाअसरपड़ताहै।पिछलीयूपीएसरकारने 201314 में 1.64 लाखकरोड़एवं 2013 में 1.42 लाखकरोड़काअंडररिकवरी (पेट्रोलकोबाजारमूल्यसेकममेंबेचनेसेहोनेवालेनुकसान) वहनकीथी,किन्तुमोदीसरकारनेडीज़लपरअंडररिकवरी  कोसितंबर, 2014 मेंमूल्योंमेंवृद्धिकरकेशून्यकरदिया।

मोदी सरकार के शासनकाल में घरेलू तेल उत्पादन में गिरावट

घरेलूकच्चेतेलकाउत्पादनयूपीए-1 औरयूपीए-2 केदौरान 23.4 प्रतिशतथा, जो 2014 से 2020 केदौरानकमहोकर 15.8 प्रतिशतरहगया।मोदीसरकारकेकार्यकालमेंयहप्रतिशततेजीसेगिराहै।भारतने 2020 मेंपिछले 18 सालोंमेंसबसेकमकच्चेतेलकाउत्पादनकिया। (नीचेदियागयाग्राफदेखें)

मोदीसरकारअपनीअक्षमताकेलिएपिछलीसरकारोंकोदोषीठहरातीहै, लेकिनसच्चाईयहहैकिमोदीसरकारइसझूठकेपीछेअपनाचेहराछिपानेकीकोशिशकररहीहै।तेलएवंप्राकृतिकगैसनिगम (ओएनजीसी) कीघरेलूकच्चेतेलकेउत्पादनमें63 प्रतिशतहिस्सेदारीहै, लेकिनइसकेलिएपूंजीगतआवंटन जो 2020-21 में 32,501 करोड़रु. था,वो 2021,,22 केवार्षिकबजटमें 8 प्रतिशतकीगिरावटकेसाथ 29,800 करोड़रु. होगयाहै।सरकारीतेलएवंप्राकृतिकगैसकंपनियोंमेंवर्तमाननिवेश 1,04,870 करोड़रु. है, जोपिछलेबजटमेंनिर्धारितकिएगए 1,07,154 करोड़रु. केमुकाबलेकमहै।इससेस्पष्टहोताहैकिमौजूदाभाजपासरकारघरेलूउत्पादनकोबढ़ावादेनेकेप्रतिगंभीरनहींहै।

तेलएवंप्राकृतिकगैसनिगमकाविनाशःकमकैपिटलआउटले, कैशकेरिजर्वमेंनिरंतरगिरावटकेकारण, ओएनजीसीनेतेलकीखोजएवंविकासकार्योंमेंकाफीकमीकरदीहै।ओएनजीसीकीवार्षिकवित्तीयलागतवित्तवर्ष 2014 में 0.36 करोड़रु. सेबढ़करवित्तवर्ष 2020 में 2,824 करोड़रु. होगई, जिससेइसकीआर्थिकस्थितिकोभारीझटकालगा।हिंदुस्तानपेट्रोलियमकॉर्पोरेशनलिमिटेड (एचपीसीएल) मेंनियंत्रणकारीहिस्सेदारीहासिलकरनेऔरगुजरातस्टेटपेट्रोलियमकॉर्पोरेशन (जीएसपीसी) केकेजीबेसिनगैसब्लॉकमेंअधिकांशअंशखरीदनेकेकारणओएनजीसीपर 24,881 करोड़रु. केकर्जकाबोझहोगया, जिसकेचलतेकंपनीकोतेलकुओंमेंखोजकार्योंकेखर्चमेंभारीकटौतीकरनीपड़ी।ओएनजीसीद्वारातेलकुओंमेंखोजकार्यकाखर्चवित्तवर्ष 2014 में 11,687 करोड़रु. सेगिरकरवित्तवर्ष 2020 में 4,330 करोड़रु. रहगया। 

कांग्रेस की पिछली सरकारों पर दोषमढ़ने की कोशिश कर रही मोदी सरकार

भाजपाकेविभिन्नमंत्रीवप्रवक्तापेट्रोलऔरडीज़लकीबढ़तीकीमतोंकादोषयूपीएशासनकेदौरानजारीकिएगएतेलबॉन्ड्सपरडालनेकाप्रयासकररहेहैं, लेकिनकीमतोंमेंहोरहीबढ़ोत्तरीकेखिलाफउठरहेसवालोंसेबचनेकीयहएकगैर-तथ्यात्मककोशिशहै।

तेलबॉन्डजारीकरनेकाउद्देश्यअंतर्राष्ट्रीयबाजारमेंकच्चेतेलकीकीमतबढ़जानेपरउपभोक्ताकोपेट्रोलवडीज़लकीऊँचीकीमतोंकेचलतेपड़नेवालेअत्यधिकवित्तीयभारसेसुरक्षादिलानाथा।

साल 2005 से 2010 केबीच, यूपीएसरकारने केवल 1.4 लाखकरोड़रु. केतेलबॉन्डजारीकिए।सच्चाईयहहैकिपिछले 6 साल 9 महीनेमें (1 अप्रैल, 2014 से 31 दिसंबर, 2020 केबीच) केंद्रीयखजानेमेंतेलबॉन्ड्सकेकारणउत्पन्नभारपेट्रोलियमसेक्टरकेकुलयोगदानका 2.8 प्रतिशतहै।दूसरेशब्दोंमें, पिछले 6 साल 9 महीनोंमें, भारतसरकारनेइनबॉन्ड्सकीमूलराशिएवंब्याजकेरूपमें 71,198 करोड़रु. अदाकिएहैं, जबकिदेशकेनागरिकोंसेइसकेलिए 25 लाखकरोड़रु. वसूलेगएहैं, यानिएकत्रितकीगईराशिकाकेवल 2.8 प्रतिशतदियागया (नीचेदियागयाचार्टदेखें)।

 

 

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