दिव्य-दूत

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वनवासियों के हित में कांग्रेस सरकार ने 52 लघु वनोपज प्रजातियों को, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करना प्रारंभ किया

Anil Choubey 29-06-2021 08:44:42


*********छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरा किया वादा >> वनवासियों के हित में वायदे के मुताबिक  50 से बढ़कर 52 लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी >> लघु वनोपजों की संख्या तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से 13 लाख संग्राहकों को प्रतिवर्ष  502 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय  >> राज्य में वनोपजों का क्रय के लिए 3500 महिला समूह सक्रिय >> इमली के ही प्राथमिक प्रसंस्करण में 21582 हितग्राहियों को 2.69 करोड़ का मुनाफा>> वर्ष 2020-21 में 7.50 करोड़ के 111 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार>> लघु वनोपज आधारित उद्योग की स्थापना पर जोर >> वनांचल योजना: पांच करोड़ तक के वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु विशेष पैकेज******

रायपुर, ////  छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार द्वारा राज्य के निवासियों से यह वादा किया गया था कि सरकार गठन के तत्काल बाद तेंदूपत्ता एवं अन्य लघु वनोपजों के संग्रहण दर में वृद्धि की जायेगी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करने के लिए वनोपजों की संख्या भी 7 से बढ़ाकर 50 की जाएगी। अपने वादों को न केवल पूरा करते हुए बल्कि इससे भी आगे बढ़कर प्रथम वर्ष में ही 52 लघु वनोपज प्रजातियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करना प्रारंभ कर दिया गया है।

        छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार का वनवासियों के हित में अहम निर्णय लेते हुए लघु वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की गयी। वर्ष 2018 में तेंदूपत्ता का संग्रहण दर  2500 रूपए प्रति मानक बोरा था, उसे बढ़ाकर 4000 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया। इससे पहले वर्ष 2019 में ही 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 225 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय हुई। अन्य लघु वनोपज में जहां वर्ष 2018 में मात्र 7 वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर संग्रहण किया जाता था, उसे बढ़ाकर 52 लघु वनोपज के क्रय की व्यवस्था न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गयी, न केवल वनोपजों की संख्या में वृद्धि की गई, बल्कि ग्राम एवं हाटबाजार स्तर पर 3500 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन करते हुए और उनके प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षित एवं प्रोत्साहित करते हुए अधिक से अधिक वनोपज क्रय हेतु प्रोत्साहित किया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वर्ष 2018 की तुलना में वृद्धि की गयी, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ है कि लगभग 6 लाख लघु वनोपज संग्राहकों द्वारा बिचौलियों के औने-पौने दाम में लघु वनोपज न बेचते हुए ग्राम एवं हाट बाजार स्तर पर गठित समितियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर वनोपजों का विक्रय किया गया।

इसी तरह वर्ष 2018 में जहां 1600 करोड़ रूपए का ही कुल वनोपज क्रय किया गया था, उसे बढ़ाकर 2100 करोड़ रूपए का क्रय किया गया, जो कि वर्ष 2018 की तुलना में 32 प्रतिशत की वृद्धि प्रतिवर्ष हुई है। इस तरह राज्य में लघु वनोपजों की संख्या एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के फलस्वरूप 13 लाख से अधिक गरीब तथा आदिवासी लघु वनोपज संग्राहकों को प्रतिवर्ष 501 करोड़ 70 लाख रूपए की राशि की अतिरिक्त आय हो रही है। दरों में वृद्धि से अतिरिक्त आय होने वाले 17 मुख्य प्रजातियों में तेन्दूपत्ता, महुआ फूल, इमली (बीज सहित), महुआ बीज, चिरौजी गुठली, रंगीनी लाख, कुसुमी लाख, फूल झाड़ृ, गिलोय, चरोटा बीज, धवई फूल, बायबिडिंग, शहद, आंवला (बीज रहित), नागरमोथा, बेल गुदा तथा गम कराया शामिल है।

            छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपजों का अनुमानित उत्पादन 1200 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष से अधिक का है, परंतु अधिकांश लघु वनोपज व्यापारियों द्वारा क्रय कर अन्य राज्यों में प्रसंस्करण हेतु भेज दिया जाता था। इमली, लाख इत्यादि वनोपज का भी न तो प्राथमिक प्रसंस्करण किया जाता था न ही ऐसे अधिक मात्रा में प्रसंस्कृत उत्पाद निर्मित किये जाते थे। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप सिर्फ इमली का प्राथमिक प्रसंस्करण करते हुए इसका डीसिडिंग कार्य राज्य में ही क्षेत्रीय स्तर पर कराया गया, जिसमें 21 हजार 582 हितग्राहियों को 2 करोड़ 69 लाख रूपए की अतिरिक्त आय हुई। इसके अलावा अन्य लघु वनोपजों के प्राथमिक प्रसंस्करण से एक करोड़ 91 लाख रूपए की अतिरिक्त आमदनी संग्राहकों को हो रही है। प्राथमिक प्रसंस्करण के फलस्वरूप वनोपज का मूल्य-संवर्धन भी हुआ है, जिससे लघु वनोपज के विक्रय से वनोपज का उचित मूल्य भी प्राप्त हुआ।

                   लघु वनोपज के प्राथमिक प्रसंस्करण के साथ-साथ हर्बल उत्पादों का निर्माण भी 50 प्रसंस्करण केंद्रों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें 1324 महिला स्व-सहायता समूह शामिल हैं। इन समूहों के अंतर्गत 17 हजार 424 महिला हितग्राही लघु वनोपज के प्रसंस्करण का कार्य कर रही हैं तथा त्रिफला, महुआ लड्डू, च्यवनप्राश, चिरौंजी, सेनेटाईजर, भृग…

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