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बस्तर को मलेरिया, एनीमिया, कुपोषण से मुक्त करने और शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए चौथा चरण शुरू

Anil Choubey 20-06-2021 16:04:58


अभियान के तीन चरणों के असर से बस्तर में मलेरिया के मामलों मे 39 प्रतिशत की कमी एपीआई में भी बड़ी गिरावट, 2016 में 20.78 की तुलना में 2020 में 8.57 एपीआईछत्तीसगढ़ सरकार ने अभियान की सफलता को देखते हुए अब इसे 21 जिलों तक किया विस्तारित मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान को नीति आयोग और यूएनडीपी की भी मिल चुकी है सराहना, देश भर के आकांक्षी जिलों में संचालित सर्वश्रेष्ठ अभियानों में से एक बतायाअभियान के असर को देखते हुए जीएफएटीएम भी दे रहा मोबिलिटी-सपोर्ट, अगले तीन सालों तक मिलेगा सहयोग मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान सरगुजा संभाग के साथ अब बिलासपुर संभाग के 4, दुर्ग के 3 और रायपुर के 2 जिलों में भी बस्तर में 15 जून से शुरू हो चुका है अभियान का चौथा चरण, शेष जिलों में 25 जून से शुरूआत, इस बार 20.29 लाख लोगों तक पहुंचेगा अभियान

रायपुर. /// . पूरे बस्तर संभाग से मलेरिया को खत्म करने में मील का पत्थर साबित हो रहे मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के चौथे चरण की शुरूआत 15 जून से हो चुकी है। 31 जुलाई तक चलने वाले चौथे चरण के शुरूआती चार दिनों में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 31 हजार घरों तक पहुंच चुकी है। इस दौरान एक लाख 28 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच कर पॉजिटिव पाए गए 1066 मरीजों का तत्काल इलाज शुरू किया गया है। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ और मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के असर को देखते हुए प्रदेश में इस बार इसे कुल 21 जिलों तक विस्तारित किया जा रहा है। अभियान से मलेरिया उन्मूलन के साथ ही एनीमिया और कुपोषण को खत्म करने तथा शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।  छत्तीसगढ़ में मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के पहले तीन चरणों का व्यापक असर दिखा है। मई-2020 की तुलना में वहां मई-2021 में मलेरिया के मामलों में 39 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले मई में बस्तर संभाग के सातों जिलों में जहां इसके कुल 2298 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं इस मई में केवल 1404 प्रकरण सामने आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कांकेर जिले में 84 प्रतिशत, कोंडागांव में 82 प्रतिशत,

बस्तर में 37 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 22 प्रतिशत, सुकमा में 21 प्रतिशत, बीजापुर में नौ प्रतिशत और नारायणपुर में दो प्रतिशत की कमी आई है। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रभाव से वहां एपीआई (Annual Parasite Incidence) यानि प्रति एक हजार की आबादी में सालाना मिलने वाले मलेरिया के मरीजों की संख्या में भी बड़ी कमी आई है। वर्ष 2016 में 26.78 एपीआई वाले बस्तर संभाग की एपीआई 2020 में घटकर 8.57 पर पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अपील पर पूरे बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त अभियान को जन अभियान के रूप में विस्तारित किया गया है। अभियान के पहले चरण के दौरान दंतेवाड़ा प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री श्री बघेल ने सार्वजनिक सभा में बस्तर को मलेरिया मुक्त करने लोगों को शपथ दिलाई थी। स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले के साथ लगातार बैठक कर अभियान को सफल बनाने मॉनिटरिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। दिसम्बर-2020 व जनवरी-2021 के दौरान मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के तीसरे और मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पहले चरण के दौरान बस्तर और सरगुजा संभाग के 2309 गांवों में करीब 15 लाख 70 हजार लोगों की मलेरिया जांच की गई थी।  

बस्तर में मलेरिया को नियंत्रित करने में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रभाव से नीति आयोग और यूएनडीपी (United Nations Development Program) भी प्रभावित है। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए इसे देश भर के आकांक्षी जिलों में संचालित सर्वश्रेष्ठ अभियानों में से एक बताया है। दोनों संस्थाओं ने मलेरिया को खत्म करने देश के अन्य आकांक्षी जिलों में भी इस तरह के अभियान संचालित करने की सिफारिश की है। अभियान के व्यापक असर और उपयोगिता को देखते हुए जीएफएटीएम (GFATM - Global Fund for Aids, TB & Malaria) भी मोबिलिटी-सपोर्ट प्रदान करने आगे आया है। इंटेन्सिफाइड मलेरिया एलिमिनेशन प्रोजेक्ट (Intensified Malaria Elimination Project) के अंतर्गत संस्था 16 जिलों के 87 विकासखंडों में मलेरिया के उन्मूलन के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगी। जीएफएटीएम 1अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2024 तक प्रदेश से मलेरिया को खत्म करने वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

 

बस्तर और सरगुजा संभाग में अभियान की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार इसे नौ और जिलों में विस्तारित करने जा रही है। सरगुजा संभाग के पांचों जिलों के साथ ही बिलासपुर संभाग के चार जिलों मुंगेली, कोरबा, रायगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग संभाग के तीन जिलों बालोद, कबीरधाम और राजनांदगांव तथा रायपुर संभाग के दो जिलों धमतरी और गरियाबंद में 25 जून से मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही मलेरिया उन्मूलन के इस गहन अभियान की पहुंच प्रदेश के कुल 21 जिलों तक हो जाएगी। अभियान के अंतर्गत 20 लाख 29 हजार लोगों की मलेरिया जांच की जाएगी। 

राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा जनवरी-फरवरी-2020 में बस्तर संभाग के सातों आकांक्षी जिलों में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का पहला चरण संचालित किया गया था। उसी साल जून-जुलाई में दूसरा और दिसम्बर-2020 व जनवरी-2021 में इसका तीसरा अभियान चलाया गया। घर-घर जाकर पहले चरण में 14 लाख छह हजार, दूसरे चरण में 23 लाख 74 हजार और तीसरे चरण में 15 लाख 69 हजार लोगों की मलेरिया जांच की गई। पहले चरण में पॉजिटिव्ह पाए गए 64 हजार 646, दूसरे चरण में 30 हजार 076 तथा तीसरे चरण में 16 हजार 148 मलेरिया पीड़ितों का तत्काल उपचार शुरू किया गया।

पहले, दूसरे और तीसरे चरण के अभियानों में टेस्ट पॉजिटिविटी दर क्रमशः 4.6 प्रतिशत, 1.27 प्रतिशत और 1.03 प्रतिशत पाई गई। इन अभियानों में मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे बस्तर के पहुंचविहीन, दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुंचकर सभी लोगों की आरडी किट से मलेरिया की जांच की गई। पॉजिटिव पाए गए लोगों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थ खिलाकर तत्काल मलेरिया के इलाज के लिए दवाई का सेवन चालू किया गया। मितानिनों की निगरानी में उन्हें दवाईयों की पूरी खुराक खिलाई गई। अभियान के दौरान हर घर और हर व्यक्ति की जांच सुनिश्चित करने के लिए घरों में स्टीकर चस्पा कर जांच किए गए लोगों के पैर के अंगूठे में निशान लगाकर मार्किंग की जाती है। 

बस्तर संभाग में तीन चरणों की स्क्रीनिंग में पाए गए मलेरिया के मरीजों में 57 प्रतिशत से 60 प्रतिशत ऐसे मरीज थे जिनमें इसके कोई लक्षण नहीं थे। नियमित सर्विलेंस के दौरान मलेरिया के ऐसे मामले पकड़ में नहीं आते हैं। बिना लक्षण वाले मरीज रिजर्वायर के रूप में समुदाय में रहते हैं और इनके द्वारा मलेरिया का संक्रमण होते रहता है। अलाक्षणिक मलेरिया एनीमिया और कुपोषण का भी कारण बनता है। अभियान के दौरान मलेरिया के दोनों तरह के मरीजों, लक्षण वालों और बिना लक्षण वालों का पूर्ण उपचार किया गया। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के दूसरे एवं तीसरे चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा मलेरिया के साथ-साथ कोविड-19 के लक्षणों वाले व्यक्तियों की भी स्क्रीनिंग की गई। अभी चौथे चरण में भी ऐसे लोगों की स्कीनिंग की जा रही है। अभियान के दौरान एक (1) से अधिक एपीआई वाले उप स्वास्थ्य केंद्रों के सभी गांवों में करीब 34 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण किया गया। घरों में मच्छर पैदा करने वाले स्रोतों को भी नष्ट किया गया।

बस्तर संभाग में अभियान के अच्छे नतीजों को देखकर इसे मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के रूप में विस्तारित करते हुए दिसम्बर-2020 में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों कोरिया, जशपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सरगुजा और सूरजपुर में अभियान संचालित किया गया। वहां इस अभियान के पहले चरण में तीन लाख 89 हजार लोगों की मलेरिया जांच कर पॉजिटिव पाए गए लोगों का मौके पर इलाज किया गया। अभियान के असर से वहां अप्रैल-2020 की तुलना में अप्रैल-2021 में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत की कमी आई है।

 

 

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