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राजीव गाँधी और उनके हत्यारें

AVINASH CHOUBEY 21-05-2019 13:15:39


जाफना बना क़त्ल साजिश का ठिकाना 

इस खौफनाक साजिश की शुरूआत जाफना, श्रीलंका से होती है. नवंबर 1990 का दौर था. घने जंगलों के बीच एक एक खुफिया ठिकाने में मौजूद था लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) का लीडर प्रभाकरण. उसके साथ वहां उसके 4 साथी भी मौजूद थे. बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरूगन और शिवरासन. एक बड़ी साजिश बन रही थी. घंटों तनाव के बीच चली बैठक. हर आदमी अपना पक्ष रख रहा था. बेहद गोपनीय इस बैठक में तनाव इतना था कि हवा भी बम की आवाज की तरह लग रही थी. उमस और गर्मी के बीच प्रभाकरण बहुत तेजी से सुन और बुन रहा था. आखिर साजिश पूरी हो गई. प्रभाकरण ने राजीव गांधी की मौत के प्लान पर मुहर लगा दी. प्लान को पूरा करने की जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी गई.

बेबी सुब्रह्मण्यम- लिट्टे आइडियोलॉग, हमलावरों के लिए ठिकाने का जुगाड़ इसने किया था। मुथुराजा- प्रभाकरण का खास, हमलावरों के लिए संचार और पैसे की जिम्मेदारी इस पर थी। मुरुगन- विस्फोटक विशेषज्ञ, आतंक गुरू, हमले के लिए जरूरी चीजों और पैसे का इंतजाम किया। शिवरासन- लिट्टे का जासूस, विस्फोटक विशेषज्ञ, राजीव गांधी की हत्या की पूरी जिम्मेदारी इसी पर थी.


1991 में शुरु हुआ योजना पर काम

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी प्रभाकरण से राजीव की हत्या का फरमान लेने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा 1991 की शुरूआत में चेन्नई पहुंचे. इनके जिम्मे था बेहद अहम और शुरूआती काम. बेबी और मुथुराज को चेन्नई में ऐसे लोग तैयार करने थे जो मकसद से अंजान होते हुए भी डेथ स्क्व्यॉड की मदद करें. खासतौर पर राजीव गांधी के हत्यारों के लिए हत्या से पहले रुकने का घर दें और हत्या के बाद छिपने का ठिकाना.


अलग-अलग टारगेट पर फोकस

बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा चेन्नई में सीधे शुभा न्यूज फोटो एजेंसी पहुंचे. एजेंसी का मालिक शुभा सुब्रह्मण्यम इलम समर्थक था. शुभा सुब्रह्मण्यम के पास दोनों की मदद का पैगाम बेबी और मुथुराजा के पहुंचने से पहले ही आ चुका था. शुभा को साजिश के लिए लोकल सपोर्ट मुहैया कराना था. यहां पहुंच कर बेबी और मुथुराजा ने अपने अपने टारगेट के मुताबिक अलग-अलग काम करना शुरू कर दिया.


भाग्यनाथन को जाल में फंसाया

बेबी सुब्रह्मण्यम ने सबसे पहले शुभा न्यूज फोटो एजेंसी में काम करने वाले भाग्यनाथन को अपने चंगुल में फंसाया. राजीव हत्याकांड में सजा भुगत रही नलिनी इसी भाग्यनाथन की बहन है जो उस वक्त एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करती थी. भाग्यनाथन और नलिनी की मां नर्स थी. नर्स मां को इसी समय अस्पताल से मिला घर खाली करना था. मुश्किल हालात में घिरे भाग्यनाथन और नलिनी को आतंकी बेबी ने पैसे और मदद के झांसे में लिया.

बेबी ने एक प्रिंटिंग प्रेस भाग्यनाथन को सस्ते में बेच दिया. इससे परिवार सड़क पर आने से बच गया. बदले में नलिनी और भाग्यनाथन बेबी के प्यादे हो गए. साजिश का पहला चरण था समर्थकों का नेटवर्क बनाना जो शातिर दिमागों में बंद साजिश को धीरे-धीरे अंजाम तक पहुंचाने में मददगार साबित हों पर बिना कुछ जाने.


दो फोटोग्राफर चुने

एक तरफ बेबी सुब्रह्मण्यम चेन्नई में रहने के सुरक्षित ठिकाने बना रहा था तो मुथुराजा बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपनी क्रूर साजिश के लिए चुन रहा था. चेन्नई की शुभा न्यूज फोटो एजेंसी में काम करने वाले इन शैतानों के लिए वरदान बन गए थे. यहीं से मुथुराजा ने दो फोटोग्राफर रविशंकरन और हरिबाबू चुने.


मुथुराजा ने दिलाई नौकरी

रविशंकरन और हरिबाबू दोनो शुभा न्यूज फोटोकॉपी एजेंसी में बतौर फोटोग्राफर काम करते थे. हरिबाबू को नौकरी से निकाल दिया गया था. मुथुराजा ने हरिबाबू को विज्ञानेश्वर एजेंसी में नौकरी दिलाई. श्रीलंका से बालन नाम के एक शख्स को बुला कर हरिबाबू का शागिर्द बनाया. इससे हरिबाबू को काफी पैसा मिलने लगा और उसका झुकाव मुथुराजा की तरफ बढ़ने लगा.


राजीव गांधी के खिलाफ भड़काया

मुथुराजा ने अहसान के बोझ तले दबे हरिबाबू को राजीव गांधी के खिलाफ खूब भड़काया कि अगर वो 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत कर सत्ता में आए तो तमिलों की और दुर्गति होगी. राजीव की हत्या के लिए साजिश की एक एक ईंट जोड़ी जा रही थी. श्रीलंका में बैठे मुरूगन ने इस बीच जय कुमारन और रॉबर्ट पायस को चेन्नई भेजा. ये दोनों पुरूर के साविरी नगर एक्सटेंशन में रुके.


पुरूर में छिपा था लिट्टे का बम एक्सपर्ट अरीवेयू

यहां जयकुमारन का जीजा लिट्टे बम एक्सपर्ट अरीवेयू पेरूलीबालन 1990 से छिप कर रह रहा था. इन दोनों को श्रीलंका से चेन्नई भेजने का मकसद था अर्से से चुपचाप पड़े कंप्यूटर इंजीनियर और इलेक्ट्रॉनिक एक्सपर्ट अरीवेयू पेरूलीबालन को साजिश में शामिल करना ताकि वो हत्या का औजार बम बना सके. आगे चलकर पोरूर का यही घर राजीव गांधी हत्याकांड के प्लान का हेडक्वार्टर बन गया. यहीं से चलकर पूरी साजिश श्रीपेरंबदूर तक पहुंची थी.


साजिश में मुरूगन की एंट्री

शातिर सूत्रधार जुड़ने वाले हर शख्स के दिमाग में राजीव गांधी के खिलाफ भीषण नफरत भी पैदा कर रहा था. उन्हें पता था कि भयंकर नफरत के बिना भीषण घिनौनी साजिश अंजाम तक नहीं पहुंचेगी. जब बेबी और मुथुराजा ने अपने अपने चार लोग जोड़ लिए तो साजिश में मुरूगन की एंट्री हुई.

मुरुगन ने चेन्नई पहुंच कर बहुत रफ्तार में साजिश को अंजाम की ओर लाने की कोशिशें तेज कीं. मुरूगन के इशारे पर जयकुमारन और पायस. नलिनि-भाग्यनाथन-बेबी-मुथुराजा के ठिकाने पर पहुंच गए. राजीव गांधी विरोधी भावनाएं लोगों के दीमाग में भरी जाने लगीं. नलिनी राजीव गांधी के खिलाफ पूरी तरह तैयार हो गयी थी.



'सैतानिक फोर्सेस' ने ब्रेनवॉश में की मदद


नलिनि जिस प्रिटिंग प्रेस में नौकरी करती थी वहां छप रही एक किताब सैतानिक फोर्सेस ने उसके ब्रेनवॉश में अहम भूमिका निभाई. ब्रेनवॉश के साथ मुरूगन ने हत्यारों की नकली पहचान तैयार करने के लिए जयकुमारन और पायस की मदद से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया.


छिपने के महफूज ठिकाने

मुरूगन, मुथुराजा और बेबी ने मिलकर चेन्नई में छिपने के तीन महफूज ठिकाने खोज लिए. अरवियू के तौर पर एक बम बनाने वाला तैयार था. राजीव के खिलाफ नफरत से भरे नलिनी पदमा और भाग्यनाथन की ओट तैयार थी. शुभा सुब्रह्मण्यम जैसा आदमी मुहैया कराने वाला तैयार था. अब शिवरासन को संदेशा भेजा गया. मार्च की शुरूआत में वो समुद्र के रास्ते चेन्नई पहुंचा. वो पोरूर के इसी इलाके में पायस के घर में रुका.


मानव बम की तलाश

पोरूर ही राजीव गांधी की हत्या की साजिश का कंट्रोलरूम बन गया. शिवरासन के पोरूर पहुंचते ही जाफना के जंगलों की साजिश का जाल पूरा हो गया. शिवरासन ने कमान अपने हाथ में ले ली. बेबी औऱ मुथुराज को श्रीलंका वापस भेज दिया गया. चेन्नई में नलनी, मुरूगन और भाग्यनाथन के साथ शिवरासन ने मानवबम खोजा पर वो नहीं मिला.

शिवरासन ने अरीवेयू पेरुली बालन के बम की डिजायन को चेक किया, शिवरासन खुद अच्छा विस्फोटक एक्सपर्ट था. सारी तैयारी को मुकम्मल देख मानवबम के इतंजाम में शिवरासन फिर समुद्र के रास्ते जाफना वापस गया वहां वो प्रभाकरण से मिला. उसने प्रभाकरन को बताया कि भारत में मानवबम नहीं मिल रहा है. इसपर प्रभाकरन ने शिवरासन की चचेरी बहनों धनू और शुभा को उसके साथ भारत के लिए रवाना कर दिया.


तीन ठिकाने, एक हत्याकांड की साजिश

धनू और शुभा को लेकर शिवरासन अप्रैल की शुरूआत में चेन्नई पहुंचा. धनू और शुभा को वो नलिनी के घर ले गया. यहां मुरूगन पहले से मौजूद था. शिवरासन ने बेहद शातिर तरीके से पायस- जयकुमारन-बम डिजायनर अरिवू को इनसे अलग रखा और खुद पोरूर के ठिकाने में रहता रहा. वो समय-समय पर सबको सही कार्रवाई के निर्देश देता था. अब चेन्नई के तीन ठिकानों में राजीव गांधी हत्याकांड की साजिश चल रही थी. शिवरासन ने टारगेट का खुलासा किए बिना बम एक्सपर्ट अऱिवू से एक ऐसा बम बनाने को कहा जो महिला की कमर में बांधा जा सके.

शिवरासन के कहने पर अरिवू ने एक ऐसी बेल्ट डिजाइन की जिसमें छह आरडीएक्स भरे ग्रेनेड जमाए जा सके. हर ग्रेनेड में अस्सी ग्राम सीफोर आडीएक्स भरा गया. हर ग्रेनेड में दो मिली मीटर के दो हजार आठ सौ स्पिलिंटर हों. सारे ग्रेनेड को सिल्वर तार की मदद से पैरलल जोड़ा गया. सर्किट को पूरा करने के लिए दो स्विच लगाए गए.


ऐसे बना बम 

इनमें से एक स्विच बम को तैयार करने के लिए और दूसरा उसमें धमाका करने के लिए था और पूरे बम को चार्ज देने के लिए 9 एमएम की बैटरी लगाई गई. ग्रेनेड में जमा किए गए स्प्रिंटर कम से कम विस्फोटक में 5000 मीटर प्रतिसेकेंड की रफ्तार से बाहर निकलते यानी हर स्प्रिंटर एक गोली बन गया था. बम को इस तरह से डिजायन किया गया था कि आरडीएक्स चाहे जितना कम हो अगर धमाका हो तो टारगेट बच न सके और वही हुआ भी.


राजीव गांधी के करीब था शिवरासन

अब शिवरासन के हाथ में बम भी था और बम को अंजाम तक पहुंचाने वाली मानवबम धनू भी. इतंजार था तो बस राजीव गांधी का पर इससे पहले वो अपनी साजिश को ठोक बजाकर देख लेना चाहता था. आज तक के पास 1991 में आमचुनावों के दौरान चेन्नई के मरीना बीच में हुई रैली का वीडियो है. इस वीडियो में शिवरासन अपने टारगेट राजीव गांधी से महज 25-30 फीट की दूरी पर साफ देखा जा सकता है.

जयललिता और राजीव की इस रैली में शिवरासन राजीव की सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचा था. यहां उसने राजीव की जनता से खुल कर मिलने और लचर सुरक्षा की खामियों को भांप लिया पर वनआइड जैक शिवरासन यहीं नहीं रुका. इस रैली के अनुभव को पक्का करने के लिए वो एक और सियासी रैली में मानवबम धनू को साथ लेकर पहुंचा.


रैली में फाइनल रेकी

12 मई 1991 को शिवरासन-धनू ने पूर्व पीएम वीपी सिंह और डीएमके सुप्रीमो करूणानिधि की रैली में फाइनल रेकी की. तिरुवल्लूर के अरकोनम में हुई इस रैली में धनू वीपी सिंह के बेहद पास तक पहुंची उसने उनके पैर भी छुए. बस बम का बटन नहीं दबाया. पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की रैली में सुरक्षा का स्तर राजीव की सुरक्षा के बराबर न सही तो कम भी नहीं था. पर शिवरासन और धनू के शातिर इरादे कामयाब रहे. इससे शिवरासन के हौसले बुलंद हो गए और उसे अपना प्लान कामयाब होता दिखने लगा.


राजीव गाँधी की सभा का दिन था 21 मई 

लोकसभा चुनाव का दौर था राजीव गांधी की मीटिंग 21 मई को श्रीपेरंबदूर में तय हो गई. शिवरासन ने पलक झपकते ही तय कर लिया कि 21 को ही साजिश पूरी होगी. 20 की रात शिवरासन नलिनि के घर रैली के विज्ञापन वाला अखबार लेकर पहुंचा और तय हो गया कि अब 21 को ही साजिश पूरी होगी.


फिल्म देखने के बाद हुए हमले का शिकार 

नलिनी के घर 20 मई की रात धनू ने पहली बार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए चश्मा पहना. शुभा ने धनू को बेल्ट पहना कर प्रैक्टिस करवाई और श्रीपेरंबदूर में किस तरह साजिश को अंजाम तक पहुंचाना है, इसकी पूरी तैयारी मुकम्मल कर ली गई. सभी पूरी तरह शांत और मकसद के लिए तैयार थे. 20 मई की रात को सभी ने साथ मिलकर फिल्म देखी और सो गए. सुबह हुई तो पांच लोग शिवरासन, धनू, शुभा, नलिनी और हरिबाबू साजिश को पूरा करने के लिए तैयार थे.


जोरदार धमाके ने किया सब ख़त्म 

21 मई 1991 का दिन था. मद्रास से करीब 40 किमी दूर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में रैली की गहमागहमी थी. राजीव गांधी के आने में देरी हो रही थी. बार-बार ऐलान हो रहा था कि राजीव किसी भी वक्त रैली के लिए पहुंच सकते हैं. पिछले छह महीने से पक रही साजिश अपने अंजाम के बेहद करीब थी. श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी सभा लिए पहुंचे. वहां मंच से कुछ दूर ही इंदिरा गांधी की प्रतिमा थी. जहां राजीव गांधी ने पहले माल्यार्पण किया और फिर मंच की तरफ बढ़ गए. वो बैरिकेड्स के पास अपने समर्थकों से मिल रहे थे.

एक महिला हाथों में हार लेकर राजीव तक पहुंचना चाहती थी. लेकिन भीड़ की वजह से वहां नहीं पहुंच पा रही थी. तभी राजीव गांधी की नजर उस पर पड़ी. उन्होंने उसे आगे आने का इशारा किया. वो महिला राजीव गांधी के पास पहुंची और उन्हें चंदन का हार पहनाया. फिर वो राजीव के पैर छूने के लिए नीचे झुकी और तभी 10 बजकर 20 मिनट पर एक तेज धमाका हुआ. हर तरफ धुआं और आग थी. राजीव गांधी हमेशा के लिए इस दुनिया से जा चुके थे. हर तरफ मौत का मातम था. इंसानी जिस्मों के टुकड़े यहां वहां पड़े थे. सब खत्म हो चुका था.


जेल में हैं हत्यारे

धमाके के तुरंत बाद शिवरासन चेन्नई की ओर भाग गया. नलिनी और सुधा उससे चेन्नई में ही आकर मिले. वहां शिवरासन ने सुधा को बताया कि हरिबाबू तो मारा गया, पर उसका कैमरा वहीं पड़ा है. शिवरासन ने सुंदरम को हरिबाबू का कैमरा मौके से उडा़ने की जिम्मेदारी सौंपी थी. सुंदरम ने काफी कोशिश की पर नाकाम रहा और फिर उस कैमरे के रोल में कैद तस्वीरों ने सुरक्षा एजेंसियों को वो सुराग दिए, जिन्होंने राजीव के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.राजीव गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार नलिनी श्रीहरन, मुरुगन उर्फ श्रीहरन, पेरियावलन उर्फ अरिवू, रविचंद्रन, संथन और जयाकुमार पिछले 28 साल से जेल में सजा भुगत रहे हैं.

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