रायपुर, 11 जून 2021/ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहाँ अपने निवास कार्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया । मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री विद्याचरण शुक्ल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री शुक्ल अनेक वर्षों तक केंद्र में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते रहे, छत्तीसगढ़ के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस अवसर पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, वन एवँ जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर भी उपस्थित थे ।
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छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फिजा में शुक्ल बंधुओं का नाम हमेशा शिखर पर ही रहा है विद्या चरण शुक्ला केंद्र में राजनीति करते रहे वे अपनी दबंग नेता की छवि को लेकर हमेशा से सुर्खियों में बने रहते थे, संयुक्त मध्य प्रदेश मैं श्यामाचरण शुक्ल अपनी राजनीति का झंडा फहराया हुए थे, शुक्ल बंधुओं ने कभी नीची राजनीति नहीं की निर्भीक दबंग और जनहित के कार्यों से कभी भी उन्होंने मुख नहीं मोड़ा कांग्रेस के जमाने में जब भी बजट प्रस्तुत होता था छत्तीसगढ़ को कुछ ना कुछ अलग से मिलता ही था
मैं उन दिनों जबलपुर में पत्रकारिता कर रहा था रम्मू श्रीवास्तव हितवाद में संपादक हुआ करते थे मेरी उनसे वहीं पर मुलाकात हुई थी उन्होंने ही मेरी मुलाकात विद्या चरण शुक्ला जी से कराई थी जैकसन होटल का वह आलीशान सूट मुझे याद है जन्हा वे ठहरे हुए थे मैं रम्मू श्रीवास्तव श्रीवास्तव के साथ उनसे मिलने गया था कुछ राजनीतिक बातें हुई कुछ सामान्य बातें हुई कुछ ऑफ द रिकॉर्ड बातें भी हुई करीब दो ढाई घंटे की मुलाकात थी जिसमें हल्का फुल्का खाना भी था मैंने अपने अखबार में विद्याचरण जी कि वह बात प्रकाशित की और उनको कतरन का फेक्स किया मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह कोई रिस्पांस देंगे लेकिन उनका एक पत्र मुझे प्राप्त हुआ जिसमें
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उन्होंने बहुत सी चीजें लिखी थी ताजुब इस बात का था कि लेटर हेड पर उन्होंने अपने हाथ से पत्र लिखा था इसलिए भी उस पत्र की खासियत थी | उसके बाद लगातार मैं उनके कार्यों को लेकर कायल होता गया था जब भी वो जबलपुर आते हैं मैं उनसे जरूर मिलने जाता कुछ ना कुछ नई सूचना मिल ही जाती थीं
जबलपुर से 103 किलोमीटर दूर दमोह जिले की तहसील पथरिया में उनके गुरु जी का आश्रम था वह अक्सर वहां जाया करते थे जबलपुर से ही वहां जाते थे मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता रहा फिर मैं छत्तीसगढ़ आ गया छत्तीसगढ़ में भी उनसे मुलाकाते होती रहीं मैंने अपने 40 साल के पत्रकारिता के कैरियर में बहुत से बड़े नेताओं का सत्संग किया था लेकिन विद्या चरण शुक्ला का सानी आज तक नहीं मिला व्यक्ति का व्यक्तित्व जब बहुत ऊंचा हो जाता है तो दुश्मन भी बहुत हो जाते हैं शुक्ल बंधुओं के खासकर विद्याचरण जी के दोस्त कम दुश्मन बहुत ज्यादा हो गए थे आखिरी समय में राजनीतिक शिखर पर पहुंचने के बाद कुछ हद तक लड़खड़ा हट भी रही|
झीरम घाटी की उस घटना ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमर तोड़ दी थी, वह बहुत ही हृदय विदारक घटना थी दुर्भाग्य इस बात का है कि इतने बड़े हत्याकांड का अभी तक सरकारें पर्दाफाश नहीं कर पाई हैं, शक की सुई घूमती जरूर है लेकिन अटक नहीं रहे हैं या उसे अटकने नहीं दिया जा रहा है क्योंकि इतने बड़े हत्याकांड के पीछे जब तक तगड़ी प्लानिंग ना हो और सरकारी मिशनरी का आशीर्वाद ना हो मुमकिन नहीं है क्योंकि यह आतंकवादी हमला भी नहीं था यह सोचा समझा जाना बुझे स्थान पर किया गया हत्याकांड था यह पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि आज तक उसका पर्दाफाश नहीं हुआ है इसी से लगता है कि मामला की दाल नहीं पूरी दाल ही काली है

विद्या चरण शुक्ल भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियो मे से एक रहे है । उनका जन्म 2 अगस्त सन् 1929 को हुआ था । उनके पिता पं रविशंकर शुक्ल पेशे से वकील थे स्वतंत्रता सेनानी, अनुभवी कांग्रेसी नेता थे अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे।
विद्या चरण शुक्ल के बडे भाई श्यामा चरण शुक्ल भी अविभाजित मध्यप्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। विद्या चरण शुक्ल ने 1951 में नागपुर के मोरिस कॉलेज से बीए किया. इसके बाद उन्होंने एक कंपनी भी शुरू की जो सफारी और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के एक्सपीडीशन आयोजित करती है. इसके अलावा उन्होंने मैंगनीज और डोलमाइट के खनन का भी काम शुरू किया. 15 फरवरी, 1951 को विद्या चरण शुक्ल की शादी सरला शुक्ल से हुई. उनकी तीन बेटियां है.
1957 मे पहली बार महासमुंद से लोकसभा चुनाव जीते और सबसे युवा सांसद बने । वे रिकॉर्ड नौ बार लोकसभा के सांसद रहे। 1966 मे पहली बार इंदिरा गाँधी कैबिनेट में शामिल हुए ।
चन्द्रशेखर सरकार मे विदेश मंत्री रहे।
1957 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने विद्या चरण शुक्ल को महासमुंद सीट (तब बलोदा बाजार उसका नाम था) से चुनावी अखाड़े में उतारा. एक बड़े बहुमत के साथ जीत दर्ज कर उन्होंने भारतीय संसद में अपनी जगह बनाई. 1962 मे महासमुंद से दुबारा सांसद बने। वह उस वक्त के युवा सांसदों में से एक थे. सन् 1962 में महासमुंद से और 1971 मे रायपुर से सांसद बने। सन 1977 मे उन्होने लोकसभा का चुनाव रायपुर से लडा पर आपातकाल से उपजे आक्रोश के कारण हार गये। नौ लोकसभा चुनावों में जीतकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी में अपनीजबरदस्त धाक जमाई.

1966 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी, तो उन्होंने विद्या चरण शुक्ल को कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया. राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें कई बेहद महत्त्वपूर्ण मंत्रालय मिले जैसे दूरसंचार, गृह, रक्षा, वित्त, योजना, सूचना एवं प्रसारण, विदेश, संसदीय, जल संसाधन.
आपातकाल (1975 से 1977) के दौरान उन्होंने ही ऑल इंडिया रेडियो पर किशोर कुमार के गाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. तब वह सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे. दरअसल किशोर कुमार ने कांग्रेस के लिए गाने से इनकार कर दिया था. इससे नाराज होकर उन्होंने ये सख्त कदम उठाया था.

25 मई, 2013 को कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' पर नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा सहित 27 लोग मारे गए और विद्या चरण शुक्ल एवं 31 अन्य लोग जख्मी हो गए थे. शुक्ल को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका दुखद निधन हो गया।




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