
रायपुर //// इडियन मेडिकल एसोसिएशन और राज्य हॉस्पिटल बोर्ड, मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल के दौरान राज्य सरकार के संरक्षण में की जा रही उत्पीड़न और निलंबन की कार्रवाई का सख्त विरोध करता है और मध्य प्रदेश की सरकार को चेतावनी देता है कि शीघ्र अति शीघ्र पूरे मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टर के अब तक हुए निलंबन वापस नहीं लिए गए तो छत्तीसगढ़ में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा.
इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के देशभर में मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क के संयोजक ओं विरोध का दायरा बढ़ाए जाने पर सहमति बनाने क्रम जारी है.
संविधान के अनुसार चुनी हुई सरकारों की नैतिक जिम्मेदारी होती है की वह स्वास्थ्य ,शिक्षा सुरक्षा ,मुहैया कराएं , टैक्सपेयर जो भी टैक्स सरकार को देता है उसके पीछे यही मंशा होती है कि सरकार उसके स्वास्थ्य को लेकर सजग रहेगी बेहतर स्वास्थ विधाए मिलेंगी , शिक्षा पर भी सबसे अच्छा खर्च कर बच्चों का अच्छा और सुंदर भविष्य बनाया जाएगा , रक्षा के मामले में सरकार अंदरूनी रक्षा ,सुरक्षा और बाहरी सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी भी पुरी मुस्तेदी से सरकार हमारी रक्षा करेगी ,टैक्सपेयर यही उम्मीद करता है सरकार इन मूलभूत हक की सुविधाओं पर खर्च करके हमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा का मजबूत कवच हमारी चुनी हुई सरकार पहनाएगी |
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बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि पिछले 70 वर्षों में जो भी सरकारें रहे हैं उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे कम खर्च किया और पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से खिलवाड़ किया यही हाल शिक्षा का है शिक्षा को लेकर सबसे बड़ी विसंगति तो यह है कि जिस शिक्षक को सबसे ज्यादा सुविधा और तनख्वाह मिलना चाहिए उसे सबसे कम सुविधा और तनखा मिलती है इसलिए इस सबसे महत्वपूर्ण प्रोफेशन में अच्छे लोग नहीं आते जिन्हें कहीं कुछ नहीं मिलता वह इस प्रोफेशन में आ जाते हैं अब जब शिक्षक ही क्वालीफाई नहीं है तो वह बच्चों को क्या शिक्षा देगा मेरे कहने का मतलब है कि पहली क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक के बच्चों को जो शिक्षा दी जाती है वही देश के भविष्य के लिए काम आती है इसको सरकारें क्यों नहीं समझती सबसे ज्यादा रद्दी अर्थव्यवस्था से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्हीं क्लासों में रहता है प्रोफेशनल कोर्स इंजीनियरिंग ,मेडिकल .वहां तो बहुत सुविधाएं और बहुत पैसे हैं लेकिन जब गधा ही 12वीं पास करके आएगा तो इन प्रोफेशनल कोर्सों में वह आगे का भविष्य कैसे बनाएगा यह सोचने वाली बात है
इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कहा जाता है कि पिछले 70 सालों में किसी भी सरकार ने प्रायमरी हेल्थ सेंटर और उन पर काम करने वाले डॉक्टर और दवाइयों पर कोई ध्यान नहीं दिया आज भी नहीं दे रहे हैं यदि जूनियर डॉक्टर अपनी जान पर खेलकर करोना से आए मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उनकी थोड़ी बहुत मांग है उसे सरकार क्यों नहीं मान ले रही है , उसमें राजनीति है एक डॉक्टर को अच्छी तनख्वाह अच्छी सुविधा अच्छा वातावरण मिलेगा तो वह हेल्थी वातावरण में इलाज करेगा नेताओं को इतना भी समझ में नहीं आ रहा है सारा खेल ब्यूरोक्रेसी बिगाड़ के रखती है वह समझती है कि वह अंग्रेजों है उसी तरह इन सब कर्मचारियों से व्यवहार करती हैं जो नहीं होना चाहिए

इसी तरह सुरक्षा को लेकर भी बड़ी बेईमानी है अंदरूनी सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन थानेदार और पुलिस कर्मियों की रहती है उनकी बहुत ही दयनीय स्थिति है , उन पर भी सम्मानजनक खर्च नहीं किया जाता इसीलिए वह जनता की सेवा करने की जगह उनसे उगाही कर दादागिरी का टैक्स वसूलते हैं और उनकी छवि खराब होती है पुलिस की छवि खराब होने से गुंडे बवाली मावली बदमाश माफिया पनपते हैं जिससे आम जनता को परेशानी होती है पुलिस की छवि ठीक रहे और उन्हें सम्मानजनक वेतन सुविधाएं मिले तो वह ₹2 किसी टैक्सी वाले से किसी स्कूटर वाले से नहीं बसुलेंगे छवि सुधरेगी पुलिस का दबदबा रहेगा अपराध कम होगा




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