दिव्य-दूत

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मोदी है तो मंहगाई है >> मोहन मरकाम

Anil Choubey 05-06-2021 17:50:27


कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौपा ज्ञापन

कोविड प्रोटोकाल का  पालन करते हुए ,मंहगाई के विरोध में कांग्रेस का एकदिवसीय धरना प्रदर्शन

रायपुर  //// प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के निर्देशानुसार प्रदेश के जिला, शहर, नगर, ब्लाक, बुथ, वार्ड कमेटी में आज 5 जून शनिवार को बढ़ती मंहगाई के विरोध में पूरे प्रदेश में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया है। धरना प्रदर्शन कोविड गाईडलाईन के अनुरूप अपने-अपने घर के बाहर सुबह 10 बजे से 12 बजे तक किया

इस प्रदर्शन में जिला के स्थानीय प्रदेश पदाधिकारियों, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व प्रत्याशी, पूर्व विधायक, एआईसीसी एवं पीसीसी सदस्यों, जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पदाधिकारियों, मोर्चा संगठन, प्रकोष्ठ, विभाग के जिला, ब्लाक पदाधिकारियों, सोशल मीडिया के प्रशिक्षित सदस्यों, नगरीय निकाय, त्रिस्तरीय पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, सहकारिता क्षेत्र के पदाधिकारियों, वरिष्ठ कांग्रेसजनों के साथ-साथ अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने जारी किये है। कोरोना गाईडलाईन का पालन करते हुये यह धरना प्रदर्शन किया जायेगा। उक्त धरने को कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया में भी व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिये गये है। 

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौपा ज्ञापन

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल राजभवन गये, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम, मंत्री रविन्द्र चौबे, मंत्री मोहम्मद अकबर, मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, विधायक सत्यनारायण शर्मा, प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन, राज्य खादी ग्रामोद्योग के चेयरमेन राजेन्द्र तिवारी, कांग्रेस संचार विभाग के चेयरमेन शैलेश नितिन त्रिवेदी, महापौर एजाज ढेबर, रायपुर नगर निगम सभापति प्रमोद दुबे, रायपुर शहर जिला अध्यक्ष गिरीश दुबे, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष उधो राम वर्मा शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौपा। ज्ञापन इस प्रकार है- कोविड-19 ने लगभग हर भारतीय परिवार को अप्रत्याशित तबाही एवं असीम पीड़ा दी है। दुख की बात है कि मोदी सरकार ने कोरोना से लड़ने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। सच्चाई यह है कि केंद्र की भाजपा सरकार कोविड-19 के अपराधिक कुप्रबंधन की दोषी है।

उग्र कोविड-19 महामारी के बीच वैक्सीनेशन ही एकमात्र सुरक्षा है। मोदी सरकार की वैक्सीनेशन की रणनीति भारी भूलों की एक खतरनाक कॉकटेल है। भाजपा सरकार ने ‘वैक्सीनेशन की योजना’ बनाने का अपना कर्तव्य ही भुला दिया। भाजपा सरकार निंदनीय रूप से ‘वैक्सीन की खरीद’ से बेखबर रही। केंद्र सरकार ने जानबूझकर एक ‘डिजिटल डिवाईड’ पैदा किया, जिससे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया धीमी हो गई। केंद्र सरकार ने ‘विभिन्न कीमतों के स्लैब’ बनाने में जानबूझकर मिलीभगत की, यानि एक ही वैक्सीन के लिए अलग-अलग कीमतें तय कीं, ताकि आम आदमी से आपदा में लूट की जा सके।

 

आज जरूरत है कि केंद्र सरकार वैक्सीन खरीदे और राज्यों एवं निजी अस्पतालों को निःशुल्क वितरित करें, ताकि वह भारत के नागरिकों को मुफ्त लगाई जा सके। इससे कम कोई भी काम भारत एवं भारत के नागरिकों का बड़ा नुकसान है।

साथ ही हमें 31 दिसंबर, 2021 तक या उससे पहले 18 साल से अधिक आयु की पूरी व्यस्क जनसंख्या को वैक्सीन लगाने का काम पूरा करने की जरूरत है। देश के नागरिकों का बचाव करने का यही एकमात्र रास्ता है। इसका एकमात्र उपाय है कि एक दिन में कम से कम एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जाए, न कि एक दिन में औसतन 16 लाख लोगों को।

इसीलिए हम राष्ट्रपति जी से निवेदन करते हैं कि आप मोदी सरकार को दिन में एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाए जाने एवं यूनिवर्सल मुफ्त वैक्सीनेशन का निर्देश दें। कोविड-19 महामारी से लड़ाई एवं इस बीमारी को हराए जाने का यही एकमात्र रास्ता है। हर भारतीय को कोरोना से जीत दिलाने का भी यही एकमात्र रास्ता है।

 

जहां अन्य देशों ने मई, 2020 से वैक्सीन खरीदने के ऑर्डर देने शुरू कर दिए थे, वहीं मोदी सरकार ने भारत को इसमें विफल कर दिया। केंद्र सरकार ने वैक्सीन का पहला ऑर्डर जनवरी, 2021 में जाकर दिया। जन पटल पर मौजूद जानकारी के अनुसार, मोदी सरकार + राज्य सरकारों ने 140 करोड़ की जनसंख्या के लिए आज तक केवल 39 करोड़ वैक्सीन खुराकों का ऑर्डर दिया है।

भारत सरकार के अनुसार, 31 मई, 2021 तक केवल 21.31 करोड़ वैक्सीन ही लगाई गईं। लेकिन वैक्सीन की दोनों खुराकें केवल 4.45 करोड़ भारतीयों को ही मिली हैं, जो भारत की आबादी का केवल 3.17 प्रतिशत है। पिछले 134 दिनों में, वैक्सीनेशन की औसत गति लगभग 16 लाख खुराक प्रतिदिन है। इस गति से, देश की पूरी व्यस्क जनसंख्या को वैक्सीन लगाने में तीन साल से ज्यादा समय लग जाएगा। यदि ऐसे ही चलता रहा, तो हम देश के नागरिकों को कोरोना की तीसरी लहर से कैसे बचा पाएंगे, इस सवाल का जवाब मोदी सरकार को देना होगा।

इस विकराल महामारी के बीच हमारे देश के नागरिक कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार वैक्सीन का निर्यात करने में व्यस्त है। केंद्र की भाजपा सरकार आज तक वैक्सीन की 6.63 करोड़ खुराक दूसरे देशों को निर्यात कर चुकी है। यह देश के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।

मोदी सरकार द्वारा वैक्सीन के लिए तय की गई अलग-अलग कीमतें लोगों की पीड़ा से मुनाफाखोरी का एक और उदाहरण हैं।

सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड की एक खुराक की कीमत मोदी सरकार के लिए 150 रू., राज्य सरकारों के लिए 300 रू. और निजी अस्पतालों के लिए 600 रू. है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की एक खुराक की कीमत मोदी सरकार के लिए 150 रू., राज्य सरकारों के लिए 600 रू. और निजी अस्पतालों के लिए 1,200 रू. है। निजी अस्पताल एक खुराक के लिए 1500रू. तक वसूल रहे हैं। दो खुराकों की पूरी कीमत की गणना इसी के अनुसार होगी। मोदी सरकार द्वारा एक ही वैक्सीन की तीन अलग-अलग कीमतें तय करना लोगों की पीड़ा से मुनाफाखोरी कमाने का नुस्खा है।

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