+++ अचानक डीएमएफ इतना आकर्षण का केंद्र क्यों हो गया दरसल मामला फंड का है हर जिले में खनिज पर जो शेष लगाया गया है उससे जिला कोषालय में अच्छा खासा फंड इकट्ठा हो जाता है पुरानी गाइडलाइन के अनुसार इस फंड का उपयोग जिला कलेक्टर स्थानीय विधायक ,सांसद और जनप्रतिनिधियों की एक समिति के द्वारा अनुमोदित कार्यों के लिए खर्च किया जाता रहा है इस पूरे मद में उच्च सरकार राजनीतिक प्रेशर के कारण भारी भ्रष्टाचार होते आये हैं किसे से छुपे नहीं हैं , सरकार में बैठे राजनेता अपने लोगों को उपकृत करने के लिए जिला प्रशासन पर दबाव डालते थे एक भ्रष्टाचार की लंबी चौड़ी फेरस तैयार होते थी जमीन पर तो देखने को यह नहीं मिलता है कि इस फंड से आज तक ढंग से कोई काम हुआ हो करीब-करीब हर जिले में यह राजनीतिज्ञों के उपकृत फंड के नाम से जाना जाता है राजनेता अपने लोगों को उपकृत आ रहे हैं पहले यह काम कलेक्टर के द्वारा होता था नई सरकार के नियमों के ज्ञाता ने उप नियमों का वास्ता देते हुए जिले के प्रभारी मंत्री को समिति का अध्यक्ष बना दिया फंड कलेक्टर के हेड में इकट्ठा होना है मंत्री जी मीटिंग लेकर यह तय करते हैं कि किस मद में पैसा खर्च होना है ,यहां तक तो ठीक है लेकिन मंत्री जी के पीछे पीछे मींटिंग के दिन संतरियों की लंबी फौज आती है पहले से तय संतरियों की कंपनियों को काम मिल जाता है इमानदारी से बंदरबांट हो जाती है स्थानीय व्यापारी और जनप्रतिनिधियों ने इसके दुरुपयोग की शिकायतों करना शुरू की कुछ राज्य सरकारों को भी शिकायतें की तो कुछ केंद्र सरकार को भी गईं कुछ सोशल मीडिया पर वायरल होती रहीं लेकिन डीएमएफ के हीरो को कोई फर्क नहीं पड़ा तो केंद्र ने 23 अप्रैल को एक पत्र लिखा जिसको लेकर अब बवाल तना हुआ है केंद्र ने 23 अप्रैल को एक पत्र लिखकर कहा की डी.एम.एफ फंड समिति का अध्यक्ष कलेक्टर होगा इसको लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार में तनातनी हो रही दरअसल सारा खेल बंदरबांट का है केंद्र चाहता है कि बंदरबांट कलेक्टर करें राज्य चाहती है कि मंत्री जी अपने संतरियों को पहचान पहचान कर उपकृत करते रहे++++
6470.00Total Collection (in Cr.)5868.2 Total Approved Projects5209.00Total Approved Plan ( in Cr.)6708.00Total Sanctioned Amount ( in Cr.)4472.00Total Expenditure ( in Cr
छत्तीसगढ़ में डी.एम.एफ. समिति के अध्यक्ष कलेक्टर नहीं होंगे , विधायकगण सदस्य बने रहेंगे , नियम को लेकर केंद्र और राज्य में तनातनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने आज इस बात का खुलासा किया है कि डी.एम.एफ. का गठन करने के लिए नियम बनाने का पूर्ण अधिकार केन्द्रीय अधिनियम द्वारा राज्य सरकारों को दिया गया है। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार के खनिज विभाग द्वारा दिनांक 23 अपै्रल 2021 को राज्य सरकारों को एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें जिला खनिज प्रतिष्ठान (डी.एम.एफ.) के गठन आदि के नियमों को संशोधित करके यह प्रावधान किया गया है कि डी.एम.एफ. के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे, विधायक व सांसदगण सदस्य होंगे। केन्द्र सरकार का यह आदेश समझ से परे है क्योंकि डी.एम.एफ. का गठन करने के लिए नियम बनाने का पूर्ण अधिकार केन्द्रीय अधिनियम द्वारा राज्य सरकारों को दिया गया है, जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन ने नियम बनाकर डी.एम.एफ. का अध्यक्ष जिले के प्रभारी मंत्री को नियुक्त करने का प्रावधान किया था।
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मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी दी है कि धारा 9-बी की उपधारा 3 के परन्तुक में केन्द्र सरकार को जो शक्तियां प्रदान की गई है वह इस बारे में है कि डी.एम.एफ. द्वारा निधि (फंड) की संरचना और उसके उपयोग के संबंध राज्य सरकारों को निर्देश जारी करे न कि डी.एम.एफ. के गठन के बारे में निर्देश जारी करें।
मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्पष्ट किया है कि 23 अप्रैल 2021 के आदेश के पश्चात् भी विधायकगण जिला खनिज प्रतिष्ठान (डी.एम.एफ.) में सदस्य बने रहेंगे।




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