जगदलपुर: बस्तर के जंगल में देसी विदेशी पक्षियों ने अपनी शरण स्थली बना ली है वहां हर वर्ष हजारों किलोमीटर दूर से सैलानी पक्षी समय अनुसार आते हैं भ्रमण करते हैं प्रजनन कर वापस चले जाते हैं इस समय बस्तर के तीतर गांव में के जंगलों में इंडियन पित्ता की सुरीली आवाज गूंज रही है इस आवाज को सुनने के लिए जंगल में सैलानियों का हुजूम उमड़ा हुआ है 18 से 20 सेंटीमीटर आकार की यह चिड़िया नो रंगों में रंगी हे इस चिड़िया को देखने के लिए सैलानियों का हुजूम तितरी गांव पहुंच रहा है खूबसूरत पक्षी को देखने के लिए जहां विशेषज्ञ भी अपना डेरा डाले हुए हैं नवरंग चिड़िया क्योंकि 9 रंगों से अभिभूत होती है. बहुत ही आकर्षित होती है इसका अध्ययन करने के लिए पक्षी वैज्ञानिक भी वहां बड़े-बड़े कैमरे लेकर अपना डेरा जमाए हुए हैं यह पक्षी भारतीय उपमहाद्वीप हिमालय की तराई से लेकर पाकिस्तान नेपाल सिक्किम भूटान में प्रजनन करती एसा अध्यन से पता चलता है .
मध्यकाल में पहाड़ों और वेस्टर्न घाट में भी प्रजनन के साबुत मिलते हें ठंड में ज्वार की तरफ से दक्षिण भारत की ओर से तथा श्रीलंका की ओर से भी आती हैं वहीं ग्रीष्म ऋतु में बस्तर के घने जंगलों को उन्होंने अपना पसंदीदा स्थल बनाया हुआ है पक्षियों में खास रुचि रखने वाले शोधकर्ता इस वक्त तितरी गांव में इन पक्षियों के रहन सहन घोंसला बनाने की पद्धति को लेकर अध्ययन कर रहे हैं देखने में यह पाया गया है कि चिड़िया फर्श पर पत्तियों के नीचे छेपे कीड़े मकोड़े का भोजन कर के रूप में ग्रहण करती है खूबसूरत पक्षी के प्रजनन पर विशेष रूप से अध्ययन किया जा रहा है जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि बस्तर में प्रवासी पक्षी अपना घर बना पाते हैं या नहीं लेकिन यह बहुत खुशी की बात है कि बस्तर सैलानी पक्षियों के लिए पर्यटन गाह बन रहा है!




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