जबलपुर+ रायपुर //// आज उनसे पहली मुलाकात होगी फिर होगा क्या क्या पता क्या ख़बर , शानदार - जानदार जीवन का सफर , आज से ठीक 34 वर्ष पहले जानू के साथ शुरू किया था आज ही के दिन मुलाकात हुई थी फिर क्या था एक शानदार जीवन के सफर की शुरुआत हुई, आज ही के दिन घोड़ी नहीं कार में बैठकर जबलपुर घमापुर पहुंचे थे हम पूरी शंकर जी की बरत लेकर हाईकोर्ट चोराहे से घमापुर डॉ पण्डे के अस्पताल तक यातायात जाम हो गया था सभी तरह के गण अपनी अपनी मस्ती में मस्त है मुझे याद है , कार से उतर कर मुझे खुद बरात का संचालन करना पड़ा था तब जाकर कहीं शुभ मुहूर्त पर सरिता मुझे वरमाला पहना पाई , शादी के बाद से आज तक और आगे भी संगिनी ने कदम से कदम
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मिलाकर जिस तरीके से इस वीराने जीवन में बहार लाई , दो सुंदर फूल भी खिले खेल आगे बढ़ा और फूल भी पेड़ में तब्दील हो गए 34 वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखें उन्हें याद करते हैं तो बड़े ही रोमांचक सच महसूस किया है सफलता से भरे कदम रोमांच से भरी जिंदगी में संगिनी ने बहुत साथ दिया है अब थोड़ा शरीर से शिकस्त पड़ गई है फिर भी कहती है तू जहां जहां चलेगा मेरा साया तेरे साथ होगा, वाह 34 वर्ष कैसे कट गए पता ही नहीं चला ऐसा लग रहा है जैसे 18 मई 1987 अभी कल की ही बात हो
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सरिता अनिल चौबे का न्यू क्लियर परिवार है दो बेटे हैं ,एक बहू है एक खूबसूरत सुंदर सा पोता है प्रियांश , आज के दिन एक खुशखबरी और भी है छोटा बेटा बी ई सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करके सिविल इंजीनियर बन गया है प्रभु के चरणों में पूरे परिवार का श्रद्धा सुमन ऐसी ही कृपा बनी रहे प्रभु जीवनसंगिनी सदा हमारे साथ हमेशा रहे यही कामना हे जो भगवान पूरी करेंगे
सरिता अनिल चौबे




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