दिव्य-दूत

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नगरनार स्टील प्लांट के निजी करण की अटकलें समाप्त ,मेकॉन इंडिया करेगी संचालन

Anil Choubey 16-05-2021 18:14:51


******प्लांट के निजीकरण को लेकर अब  अटकलों पर विराम लग गया है , इसका मुख्य कारण यह  भी है कि यदि कोई निजी कंपनी इस प्लांट  का अधिग्रहण करती है तो उसको इसे चलाने के लिए आयरन ओर की माइंस चाहिए जो इस प्लांट के साथ अटैच नहीं है, एनएमडीसी के पास तो  आयरन ओर खदानों का का भंडार है इसलिए वाही   इस प्लांट को चला सकती है  और  एनएमडीसी ने  मेकॉन रांची  को संचालन की जिम्मेदारी  सोंप कर   एक सकारात्मक कदम आगे बढ़ाया है  इसको लेकर छत्तीसगढ़ में  खुशी का माहौल है ******

 जगदलपुर ///  बस्तर की  बहुउद्देशीय परियोजना नगरनार स्टील प्लांट के संचालन  की जिम्मेदारी  मेकॉन इंडिया लिमिटेड को दी गई है , मेकॉन इंडिया लिमिटेड स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के स्टील प्लांट का रखरखाव  एक्सपाशन  के कार्य  करने वाली भारत सरकार  का  ही एक उपक्रम है , यह पहली बार हुआ है कि एनएमडीसी लिमिटेड में अपना एकलौता स्टील प्लांट चलाने  की जिम्मेदारी सैद्धांतिक रूप से मेकॉन इंडिया लिमिटेड   को सौंप दी है,  सूत्रों के हवाले से जानकारी  मिली है कि प्लांट को चलाने के लिए एनएमडीसी मेकॉन इंडिया लिमिटेड को कितना पैसा देगी उसको लेकिन अब बातचीत चल रही है, मेकॉन  इंडिया लिमिटेड नगरनार स्टील प्लांट में जो कमिश्निंग के कार्य की कमी है को लेकर भी अब वही पूरा काम करेगी यह भी सैद्धांतिक रूप से तय हो गया है इसको लेकर मेकॉन रांची की टीम जल्दी ही नगरनार स्टील प्लांट का दौरा करने वाली है उस दौरे  की तैयारी नगरनार स्टील प्लांट में हो गई है अब  यह भी साफ तौर पर अलग कर दिया गया है कि कमिश्निंग में किन-किन कामों को करना अभी बाकी है  |

 निजी करण को लेकर चल रहे हैं अटकलों के बीच में यह खबर छत्तीसगढ़ के वासियों विशेषकर बस्तरिया वासियों के लिए एक सुकून की खबर है कि फिलहाल निजीकरण का मामला   टाल दिया गया है ,  डी मर्जर की खबर आने  के बाद  अभी भी  आंदोलन स्थल बनाया हुआ है उस आंदोलन लेकर 172 दिन से ऊपर हो गए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी  निजी करण के खिलाफ प्रधानमंत्री से लेकर स्टील  मंत्री तक अनेकों पत्र लिखने के बाद चेतावनी भी दी थी  कि हम यह होने नहीं देंगे यहां तक कह दिया कि शासन भी एक पार्टी होगी जो इसे खरीदने के लिए तैयार है मामला  बिगड़ता  देखकर केंद्र  सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है  30 हजार करोड़ की लागत से बने इस बहुउद्देशीय   स्टील प्लांट  की कमिश्निंग में करीब 1 साल से ज्यादा का समय बर्बाद  हो गया है  अब  मेकॉन रांची  को चलाने की जिम्मेदारी मिल जाने से लग रहा है कि  2021 के आखिरी तक शायद स्टील प्लांट   उत्पादन करना शुरू कर दें |

 नगरनार स्टील प्लांट में देश के बड़े स्टील उद्योग पतियों की नजर थी वह खरीदना छह भी  रहे थे सरकार  भी इस बने बनाए प्लांट को  निजी हाथों में सौंप कर उन्हें उपकृत करने में लगी थी लेकिन स्थानीय और राजनीतिक स्तर पर लगातार हो  रहे विरोध के कारण वह भी बैकफुट पर नजारा  आ रही है इसका फायदा उड़ीसा सरकार ने भरपूर उठा लिया है   जिन उद्योगपतियों की नजर नगरनार स्टील प्लांट में थी  वह उड़ीसा सरकार के साथ एमओयू करके उड़ीसा में एक लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट की तैयारी में लग गए पॉस्को स्टील की जमीन भी  उन्होंने हस्तांतरित कर दी गई है अब नहीं लगता कि कोई और निजी कंपनी आकर नगरनार स्टील प्लांट का अधिग्रहण कर पाएगी इस प्लांट को निजी  कंपनियों  इसलिए भी नहीं लेना चाह रही  हैं  क्योंकि इस प्लांट के साथ किसी भी तरह की आयरन ओर माइंस अटैची  नहीं है   यह  प्लांट  एनएमडीसी का ही है जो  भारत की सबसे बड़ी आयरन ओर माइंस उत्पादक  कंपनी है उसको इस प्लांट को चलाने में कहीं कोई दिक्कत नहीं लेकिन  कोई निजी कंपनी यदि   लेती है तो उसको आयरन ओर की खदान  जब तक नहीं मिलती है तब तक घाटे में ही  चला पाएगी यह एक बहुत बड़ा ड्रॉबैक  है इस प्लांट के साथ इसलिए  भी  निजी भाग गईं हैं यह छत्तीसगढ़ के लिए बहतर है |

 

 

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