दिव्य-दूत

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पलायन शुरू ,सरकार को पूरे देश में सार्वजनिक परिवहन नहीं रोकना चाहिए अन्यथा स्थिति विस्फोटक होगी ।

Anil Choubey 22-04-2021 16:42:47


नई दिल्ली ////  कोविड-19 की दूसरी लहर ने जहां पूरे देश में अपने पैर पसार लिए हैं वही सरकार की नाकामी भी खुलकर सामने आ गई है पिछले साल हुए संक्रमण से सरकार ने कुछ नहीं सीखा ना ही अपने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत किया और ना ही किसी आपदा के आने पर उन से कैसे निपटा जाए की कोई तैयारी की जबकि करोना की पहली लहर ने पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो खामियां उजागर की थी सरकार के पास समय था सरकार चाहती तो उन खामियों को दूर कर आज की हजारों लाखों जिंदगियों को बचा सकती थी जो असमय मौत के मुंह में चले गए बड़ी शर्म और दुख की बात है कि कई लाख करो रुपए के फंड होने के बाद भी सरकार ने दूसरी लहर के आने का ऐसे इंतजार किया जैसे कि वह उससे निपटने में सक्षम है लेकिन उसके पहले ही झटके में सरकार पूरी औंधे मुंह गिर पड़ी चाहे राज्य की सरकारें हो चाहे देश की सरकार हो इस मामले में नाकाम रही है इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है कि आज हमारे देश में ऑक्सीजन की कितनी कमी है कि हमें विदेशों से ऑक्सीजन भी बुलाने के लिए सोचना पड़ रहा है |

 इस त्रासदी का सबसे बुरा मंजर वह  था जब पहली बार कोविड-19 ने देश को अपनी चपेट में लिया था  पूरे देश को लाभ डाउन किया गया इस लाक  टाउन के चक्कर में करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गई लाखों मजदूर जान बचाने के चक्कर में अपने घरों को वापस लौटने के लिए जद्दोजहद करने लगे ट्रेन ओवरफ्लो हो गई लोग ट्रकों में बैठकर पैदल अपने घरों की ओर रवाना हो गए पूरे देश में अराजकता की स्थिति फैल गई थी मजदूर सड़क पर रात दिन चल रहे थे सरकार हाथ पर हाथ धरे चुपचाप देख रहे थे वह भयानक मंजर इस बार फिर शुरू हो गया है  |

 दूसरी लहर के बेकाबू होते ही सरकार ने इस बार संपूर्ण देश में लाक डाउन  तो नहीं किया है लेकिन राज्य ने अपने-अपने  जिलों में में  लॉकडाउन  की  घोषणा कर रखी है इन घोषणाओं से भयभीत होकर पूरे देश से मजदूरों का पलायन अपने अपने घरों के लिए शुरू हो गया है पुराने पलायन और इस पलायन में सिर्फ इतना ही अंतर है कि अभी तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद नहीं किया गया है रेल मार्ग सड़क मार्ग सारे खुले हुए हैं लेकिन जिस तरीके से पलायन कर रहे मजदूर की भीड़ बढ़ रही हे उससे लगता है कि स्थिति धीरे-धीरे भयावह होती जाएगी

दिल्ली, मुंबई, गुजरात से लगातार पलायन की खबरें आ रही हैं मजदूर किसी तरीके से अपनी गृहस्थी को अपनी गठरी में बांधकर रेलवे स्टेशन पहुंच रहे हैं बस स्टैंड पहुंच रहे हैं और जैसे तैसे अपने छोटे भाई बच्चों के साथ अपने घर की तरह रवाना होगा  रहे हैं उनसे पूछा गया कि इस तरीके से  पलायन करने के पीछे क्या कारण है उन्होंने कहा कि अभी तो समय है अभी   छोटा लॉक डाउन हुआ है  सरकार पर भरोसा नहीं  जिस तरीके से कोविड-19  फ़ेल रहा है सरकार  उसे नियंत्रण करने के लिए लंबा- लॉकडाउन  कर सकती है ऐसी परिस्थितियों में हमारे पास ना तो रोजगार है ना ही  खाने के संसाधन है हम तो  रोज कमाते हैं रोज खाते हैं  इससे बेहतर है कि हम अपने गांव चले जाएं जहां पर कम से कम रहने की छत और  खाने की चिंता तो नहीं होगी

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