
भुवनेश्वर //// विश्व बाजार में स्टील की बढ़ती हुई मांग ने वैश्विक महामारी के बावजूद स्टील इंडस्ट्रीज का भविष्य 2030 तक स्वर्णिम दिखाई दे रहा है स्वर्णिम भविष्य के चलते तमाम स्टील उद्योगपति या तो बंद पड़ी कंपनियों को चालू कर रहे हैं या उत्पादन के विस्तार की ओर लग गए हैं स्टील उद्योग के लिए पूरे एशिया में भारत एक ऐसा उपमहाद्वीप है जहां पर स्टील उद्योग को फलने फूलने के सबसे अधिक मौके हैं , भारत में इफराद रॉ मैटेरियल है, मेन पावर सस्ता है समुद्र तट से पूरे विश्व की कनेक्टिविटी है , खुद भारत भी स्टील का एक बड़ा कंजूमर है चीन भी एशिया में ही आता है वह भी स्टील का एक बड़ा उपभोक्ता है , भारत में स्टील प्रोडक्शन की कास्ट दूसरे देशों से कम है यंहा बिजली है, कोयला है , लौह अयस्क है , जमीन है ,पानी है इसलिए पूरे विश्व से भारत में लोहा उद्योग को लेकर बड़ी स्टील कंपनियां का रुख नरम है सकारात्मक है, इसलिए भी उद्योगपति भारत में उद्योग स्थापित करने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं , इसी सिलसिले में दक्षिण कोरिया की कंपनी पास्को ने एक लाख करोड़ रुपए के निवेश का मन बनाया है |

दक्षिण कोरिया के राजदूत शिन बोंगकिल ने सोमवार को उड़ीसा में कोरियन कंपनी पास्को द्वार एक स्टील परियोजना में 12 मिलियन अमेरिकी डॉलर लगभग एक लाख करोड़ों रुपए के निवेश की उम्मीद जताई है उड़ीसा और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार कारोबार बढ़ाने को लेकर हुई वर्चुअल बैठक में राजदूत शिन बोंगकिल ने कहा है कि कोरियाई स्टील कंपनी पॉस्को की उड़ीसा में एकीकृत स्टील प्लांट स्थापित करने के लिए 12 मिलियन अमेरिकी डालर का निवेश करने की योजना है ,
अगर पास्को भारत में इस प्रोजिक्त को शुरू करता है तो यह भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा एकल निवेश होगा दक्षिण कोरियाई राजदूत की ओर से इस तरह की घोषणा ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के खत्म होने के 4 साल बाद की गई है, फरवरी 2017 में पास्को ने इंडिगो को यह कहते हुए 1880 एकड़ जमीन वापस कर दी थी कि उसका इस जमीन को तत्काल उपयोग करने का इरादा नहीं है इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार एवं पास्को के बीच सन 2005 में करार हुआ था हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण और पर्यावरण मंजूरी मिलने में हुई




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