लखनऊ /// वैसे तो पूरे विश्व में भारत के आम मशहूर हैं, गर्मी का मौसम शुरू होता ही तमाम पेड़ पौधों में पतझड़ का मौसम शुरू होता है वहीं आम के पेड़ में नए पत्ते आ जाते , हरियाली आम के पेड़ पर छा जाती हैं पेड़ पर आम की बोर से लद जाती है ,उसकी भीनी भीनी खुशबू पूरे इलाके में फेल जाती है ,आम का सीजन भारत में गर्मियों में शुरू होता हे और वरिश के आखरी तक चलता है , आम को फलों का राजा भी कहा जाता है भारत के अलग-अलग हिस्सों में उनकी अलग अलग वैरायटी की पैदावार होती है उत्तर प्रदेश को पूरे देश में आमों का राजा कहा जाता है इसी कड़ी में बिहार भी कुछ कम नहीं वहां के मालदा का आम पूरे देश में फेमस है ,महाराष्ट्र का अल्फांसो हापुस भी किसी से कम नहीं जैसे आमों के इन नाम को सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है |
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ऐसे ही चमत्कारों से भरा हुआ एक एतहासिक आम का बगीचा है जो लखनऊ के नजदीक महिलाबाद में है ,कलीमउल्लाह खान इस बगीचे के मालिक हैं उनको मैंगो मैन भी कहा जाता है , कलीमउल्लाह खान ने अपने बगीचे मे आम का एक ऐसा अजूबा पेड़ तैयार किया है जिस पर आपको अलग रंग की पत्तियां और आम देखने मिल जाएंगे इस बहुमूल्य एक पेड़ के ऊपर आपको दशहरी ,लंगड़ा ,हिमसागर, अल्फांसो जैसे आम की वैरायटी मिल जाएगी मलिहाबाद को उत्तर भारत में आमो के लिए जाना जाता है ,यहां करीब 10 हजार हेक्टेयर में आम की खेती होती है यहां के आम का इतिहास सो साल पुराना बताया जाता है
कलीम उल्लाह खान अपने बेटे के साथ यहां 22 एकड़ की जमीन पर आमों के बगीचे की देखभाल करते हैं, स्कूली पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने आम के बागान में ही काम करने का फैसला किया था इसके कुछ साल बाद उन्होंने अपने एक दोस्त के यहां गुलाब क्रॉस ब्रीड पौधे

को देखा था एक ही पौधे पर अलग-अलग रंग के गुलाब के फूल देखने के बाद उन्होंने आम के छोटे पेड़ पर इस लड़की को अपनाया और वह सफल भी रहे अब वह एक ही पेड़ में 300 से ज्यादा वैरायटी के आम की फसल ले रहे हैं ताज्जुब इस बात का है कि एक ही पेड़ पर 300 वैरायटी के सभी फलों का साइज, टेस्ट, कलर अलग अलग है सरे आम फल उस वैरायटी के ओरिजिनल पेड़ मैं जैसे फल होते हैं वैसे ही हैं
आम की चाहत मैं करीब 17 साल की उम्र में उन्होंने एक ही पेड़ में 7 वैरायटी की ग्राफ्टिंग की थी लेकिन बाढ़ के बाद ऐसे खत्म हो गया 87 में उन्होंने एक 100 साल पुराने आम के पेड़ पर ग्राफ्टिंग करना शुरू की देश भर से उन्होंने सैंपल बताएं कलीम उल्लाह खान अब इस पेड़ को ऑल मुकर्रर यानी दृढ़ संकल्प ही कहते हैं यह वह पेड़ है जिस पर उन्होंने 300 से ज्यादा वैरायटी के आप गाने का कारनामा किया खास बात यह है कि वह इस पेड़ पर लगने वाले कीड़ों और पक्षियों को भी नहीं हटाते उनका मानना है कि यह प्रकृति की देन है और उस पर सभी का हक है हर साल उनको उनके आम देश-विदेश में बेचने के लिए जाते हैं इस पेड़ को जो भी देखने जाता है उन्हें मुफ्त में अलग-अलग वैरायटी के आम खाने मिलते हैं

कलीमुल्लाह खान को पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है इसके अलावा उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है ओमो की ग्राफ्टिंग सिखाने के लिए वह दुबई और ईरान तक जा चुके हैं मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कलीम उल्लाह खान में राष्ट्रपति भवन के पास मुगल गार्डन मैं भी उन्होंने एक पेड़ में 54 वैरायटी के आम की ग्राफ्टिंग की है




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