नई दिल्ली //// स्टील सेक्टर से जुड़े छोटे- बड़े प्लेयरओं में स्टील की बढ़ती हुई कीमतों के कारण उनके चेहरे पर खुशी लहर दौड़ रही है ,वही स्टील उत्पादन के बड़ते दामों को लेकर आम स्टील उपभोक्ता जिसमें सबसे बड़ा कंजूमर क्षेत्र है रियल एस्टेट में मायूसी देखी जा रही है ,वर्तमान में स्टील और सीमेंट की कीमतें लगातार देश में बढ़ रही हैं अप्रेल में रफ़्तार पकड़ने के संकेत हैं ,इन बढ़ती हुई कीमतों के पीछे तर्क और कुतर्क दोनों दिए जा रहे हैं ,स्टील उत्पादक उद्योगपति कह रहा है कि स्टील की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत काफी ज्यादा हो गई है वहीँ सीमेंट उत्पादक उद्योगपति कह रहा है कि सीमेंट फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन लागत अधिक हो गई है कुछ इंडस्ट्रीलिस्ट डीजल के बढ़े हुए दामों को कारण बतला रहे हे , तो कुछ मैटेरियलओं की कमी कारण बतला रहे हैं , कुछ का कहना है की ट्रांसपोर्ट ने भाड़े के रेट बढ़ा दिए हें करने के कारण कीमतें आसमान में पंहुच रही हैं , इन बढ़ती हुई कीमतों से इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत उपभोक्ताओं के लिए यह बुरी खबर है ,लेकिन स्टील प्रोडक्शन करने वाली कंपनियां इस बढ़ती हुई कीमतों के कारण अपना पुराना डेडलॉक घटा कवर करने के लिए जी जन से कोशिश कर रहे हैं
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स्टील प्रोडक्शन इंडस्ट्रीज के बड़े प्लेयरओं में सबसे अधिक लोहे का उत्पादन उड़ीसा राज्य में होता है उड़ीसा में प्रचुर मात्रा में आयरन ओर और कोयला के भंडार भी हैं लेकिन कच्चे माल के उत्पादन मैं आई कमी के कारण स्टील के रेट बढ़ रहे हैं उड़ीसा राज्य स्टील प्रोडक्शन के मामले में भारत में नंबर वन की स्थिति रखता है यहां पिछले 2 सालों में स्टील का प्रोडक्शन काफी कम स्तर पर हुआ है जिसका मुख्य कारण लॉकडाउन को कहा ja रहा है , वर्ष गुजरने के बाद जब इकनोमिक ने पटरी में अपनी रफ्तार पकड़ी है तो उसी हिसाब से स्टील और सीमेंट के मांग भी बढ़ी है मांग के मुकाबले प्रोडक्शन कम होना के कारण स्टील के रेट बढ़ रहे हैं समय रहते सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए नहीं तो इन बढ़ती हुई कीमतों से आम उपभोक्ताओं की कमर टूट जाएगी और रियल स्टेट का कारोबार जो अब धीरे-धीरे उठ रहा था औंधे मुंह गिरने की संभावना बन गई
भारतीय बाजार में अब स्टील के दामों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है. जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल, एम/एनएस और टाटा स्टील, हॉट रोल्ड क्वायल , एचआरसी के दाम में चार हजार रुपये टन की बढ़ोतरी हो सकती है. स्टील कंपनियों के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि कंपनियों ने स्टील के दाम बढ़ाने का फैसला अभी नहीं किया है लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए 1 अप्रैल से घरेलू दाम में बढ़ोतरी की जा सकती है. पिछले साल दिसंबर में इसके दाम में 2500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई थी. इसके बाद इसमें डेढ़ हजार प्रति टन की बढ़ोतरी हुई थी.
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दरअसल इंटरनेशनल मार्कट में स्टील रॉ मैटेरियल की ऊंची कीमतों और उत्पादन की तुलना में मांग बढ़ने से स्टील के दाम तेजी से बढ़े हैं. घरेलू मार्केट में कच्चे माल में तेज बढ़ोतरी और ओडिशा में उत्पादन में आई गिरावट की वजह से स्टील के दाम में तेजी आ रही है.

चीन की मजबूत खपत से वर्ल्ड मार्केट में बढ़ रहे हैं स्टील के दाम
स्टील के दाम में तेजी का यह ट्रेंड अभी बरकरार रहेगा. क्योंकि दुनिया भर के स्टील उत्पादन का सबसे ज्यादा हिस्से की चीन में खपत हो जाती है. बाकी दुनिया के पास काफी कम स्टील बच जाता है. इसलिए वर्ल्ड मार्केट में स्टील की कमी इसकी कीमतों को बढ़ा देता है. घरेलू मार्केट में स्टील की कीमतें बढ़ने की यही वजहे हैं. भारतीय बाजार में सरकार की ओर से इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर जोर देने के बाद स्टील की मांग में तेजी दिखने लगी है. यही वजह है कि कंपनियां इस मौके का फायदा उठा कर कीमतों में बढ़ोतरी करना चाहती हैं. इससे रियल एस्टेट सेक्टर की लागतें भी बढ़ेंगीं.




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