लेमरू अभ्यारण अधोसंरचना विकसित तो हो गई है पर हाथियों को कैसे पता चलेगा कि उनका घर सरगुजा संभाग के लेमरू में है
रायपुर
// पिछले एक महीने से लगातार वन्य प्राणियों के शहर में विचरण की खबरें आ रही हैं
वन्य प्राणियों में हिरन , घुटरी, बाघ ,भालू ,बंदर ,हाथी -- शहरी इलाकों में चारा और पानी की खोज
में भटक रहे हें .कहीं पकड़े जा रहे हैं तो कहीं घायल किए जा रहे हैं हिरन तो शहरी कुतों के शिकार भी हो रहे हैं . आग लगाकर
उन्हें जंगल की तरफ खदेड़ा भी जा रहा है ,वन्य प्राणी विभाग सतर्क रहें ,होशियार रहें , के नारों के साथ मुस्तैदी से जंगल में तैनात
है .लेकिन जंगली जानवरों की मूलभूत सुविधा पानी का अभाव होने के कारण का वन्य
प्राणी विभाग के पास इस समस्या का माकूल
उपाय नहीं है ,
इन वन्य प्राणियों में सबसे अधिक हाथियों के बोराए जाने की खबरें वायरल हो रही है हाथी गांव की गलियों में घूम रहे हैं धन संग्रह
केंद्रों में जाकर 2500 रूपये किन्टल की धान का लुफ्त उठा रहे हैं .चारों तरफ
भगदड़ मची है कहीं आग लगाकर भगाया जा रहा है तो कहीं डुगडुगी भी पीट कर हाथियों को को जंगल की तरफ खदेड़ा जा रहा है
हाथों की समस्या को हल करने के लिए छत्तीसगढ़ वन्य प्राणी विभाग और
सरकार ने मिलकर लेमरू हाथी अभ्यारण सेंचुरी की अधोसंरचना रखी है ,अधोसंरचना को घोषित हुए 5 वर्ष से ऊपर हो गए हैं तकनीकी रूप में लेमरू हाथी अभ्यारण की सीमाएं भी निर्धारित हो गई हैं .इस
अभ्यारण की निर्धारित सीमा से
जुड़े सिंचाई विभाग की छोटी बड़ी परियोजनाओं के बांध होने से पानी की मूलभूत समस्या का हाल
भी हो गया है ह,इस अभ्यारण में घने जंगल होने के कारण हाथियों के भोजन की भी पर्याप्त व्यवस्था सरकार ने पूरी ईमानदारी के
साथ चिन्हित की है हाथी समस्या से निपटने
के लिए लेमरू हाथी अभ्यारण अधोसंरचना तैयार कर ली है |
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार
से इस अभ्यारण की स्वीकृति के लिए तमाम औपचारिकताएं भी पूरी कर लीं हें हाथियों के लिए इतना सुंदर घर छत्तीसगढ़ के
सरगुजा संभाग में सरकार द्वारा बना दिया गया घर है पर अब समस्या इस बात की है कि इन हाथियों को कौन
बताएगा कि उनका घर लेमरू हाथी अभ्यारण संभाग सरगुजा है , विशेषज्ञों की चिंता है कि पूरे छत्तीसगढ़ के जंगलों में फैले इन हाथियों के दलों को लेमरू अभ्यारण तक कैसे पहुंचाया जाए विशेषज्ञों यह दावा कर रहे हैं कि एक बार इन हाथी के दलों को अगर
लेमरू अभ्यारण मैं रहने का अभ्यास हो जाता है तो वह इस अभ्यारण को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे , पर समस्या तो यही है कि इन हाथियों को कैसे समझाया जाए कि उनका घर
सरकार ने लेमरू अभ्यारण में बना दिया कृपया वहां जाएं वहीँ रहे जीवन का आनंद लें
और हमें और हमारी जन और फसलों को जिस
तरीके से आप रोंदते हैं कुचलते हैं से
मुक्ति मिल जाए |




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