छत्तीसगढ़ में काजू की खेती के लिए जो भूमि चाहिए जो एटमॉस्फेयर चाहिए वह बिल्कुल सूटेबल है यहां काजू की खेती अब धीरे-धीरे पनप रही है पहले काजू के जो फल आते थे उन्हें बिचौलियों को बेचकर किसान बहुत कम आमदनी करपाते थे लेकिन जशपुर की पूर्व कलेक्टर डाक्टर प्रियंका शुक्ला ने इस प्रोजेक्ट में अत्याधुनिक मशीनों को लगा कर सामूहिक काजू की खेती के फार्मूले से काजू के उत्पादन को नई जान दे दी है जशपुर और उसके आसपास काजू के लाखों पेड़ संयुक्त मध्य प्रदेश के जमाने में लगाए गए थे अब वह पेड़ काफी बड़े हो गए हैं और वे पौधे फलों से लदे रहते हैं पूर्व जिलाधीश प्रियंका शुक्ला ने जिले में काजू प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की यूनिट लग जाने के बाद यहां के करीब 7000 से अधिक किसान अब समृद्ध हो गए हैं अब चोरों के हाथ काजू बेचने से उन्हें मुक्ति मिल गई है जिले में दुलदुला और कुनकुरी विकासखंड में करीब 8000 किसान बीते 30 साल से काजू का उत्पादन कर रहे थे वे काजू के फल को 40 रुपए किलो की दर पर बिचौलियों को बेचते थे पर काजू प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना होने से अब वो काजू की पैकिंग कर उसे 800 रुपया किलो की दर से बेच रहे हैं पूर्व कलेक्टर डॉ प्रियंका शुक्ला ने एमडीएफ फंड से काजू उत्पादक किसानों के लिए 9 करोड़ 50 लाख की लागत से प्रोसेसिंग की स्थापना की थी इसके बाद काजू को सही कीमत मिलने में यहां हजारों किसानों का भविष्य सुनहरा हो चुका है वहीं जशपुर को नई पहचान मिली है अकेले जशपुर में 2000 एकड़ में काजू की खेती हो रही है जशपुर की जलवायु काजू उत्पादन के लिए अनुकूल है यहां 2000 एकड़ में काजू की खेती की जाती है पर इससे पहले तक काजू उत्पादक किसानों को कोई से कोई मुनाफा नहीं होता था काजू का सही लाभ किसानों को दिलाने के लिए पूर्व डीएम ने काजू उत्पादक किसानों को जोड़कर सहकारी संस्था का निर्माण कराया और फिर राय टोली गांव में जिला खनिज व न्याय यहां सुनिधि की राशि का उपयोग कर काजू प्रसंस्करण की स्थापना की अहमदाबाद से काजू के विशेषज्ञों ने यहां आकर प्रोसेसिंग यूनिट सहकारी समिति के किसानों को दिया अब सभी उत्पादक किसान एक 100 रूपए किलो की दर पर सरकारी समिति को काजू का फल बेच रहे हैं सरकारी समिति द्वारा काजू की प्रोसेसिंग कर उसकी पैकिंग की जा रही है सहकारी समिति में 8000 के साथ जुड़े हैं जो कि काजू उत्पादन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साल में दो बार काजू की फसल होती है काजू का फल साल में दो सीजन में होता है 2018 में 55 क्विंटल काजू का फल किए थे 100 किलो काजू प्रोसेसिंग के बाद उसमें 22 किलो काजू तैयार होता है इस हिसाब से शुरुआती साल में 1210 किलो काजू तैयार किया गया जिला प्रशासन का सही दाम किसानों को मिले इसके लिए उत्पादक किसानों की समिति बनाई है और उन्हें काजू प्रोसेसिंग की है ऐसे खाली पड़े एक्सस्की भवन में प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई है अब खुद काजू का उत्पादन कर प्रोसेसिंग के बाद उसकी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं!




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