दिव्य-दूत

Har Saans KII CARE** स्वस्थ समाज के संकल्प के साथ रामकृष्णा केयर हॉस्पिटल्स ‘द ग्रेट छत्तीसगढ़ रन 2025’ में भागीदारी MoU IIT कानपुर की एडवांस्ड रिसर्च क्षमताओं को NMDC के बड़े ऑपरेशनल इकोसिस्टम में लाता है।>>> अमिताव मुखर्जी, CMD, NMDC आदिवासियों के हितों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए सरकार कृतसंकल्पित >>> मुख्यमंत्री साय नया रायपुर शिक्षा शहर में नारसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के कैंपस खोलने का मिला प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संविधान दिवस के अवसर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन छत्तीसगढ़ देश का सबसे भरोसेमंद और तेज़ी से उभरता औद्योगिक गंतव्य>> मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दिल्ली में शुरू हुआ ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट' सम्मेलन जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है हमारी सरकार >>> मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यूनिटी मार्च के लिए राज्य के 68 युवाओं के दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना एनआईएफटीईएम ने दिया मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद निर्माण का जशपुर में प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में जुड़ा नया आयाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के ताबूत में अंतिम कील ठोंक दी गई है >>> केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह एनएमडीसी एक ऐसी कंपनी है जिसका इतिहास हमसे बहुत पुराना है और भविष्य हमसे बहुत लंबा है <<< .अमिताव मुखर्जी >> सीएमडी, एनएमडीसी राज्य में अवैध परिवहन किए जा रहे 19 हजार 320 क्विंटल धान जब्त मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं बैठक संपन्न बीजापुर जिला अस्पताल में आपरेशन में जटिलता के मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित गुजरात और छत्तीसगढ़ मिलकर विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका >> सीएम विष्णुदेव साय प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के सांस्कृतिक राजदूत, छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्व में दे रहे पहचान >>>> मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में जैव ईंधन के उत्पादन में 3,500 करोड़ रुपये का हो रहा निवेश

पोला तिहार: ग्रामीण जनजीवन में खुशहाली का प्रतीक खेती किसानी में पशुधन के योगदान को नमन करने का त्यौहार

Anil Choubey 30-08-2019 08:26:12


         रायपुर, /////// खेती किसानी में पशुधन के महत्व को दर्शाने वाला पोला पर्व छत्तीसगढ़ के सभी अंचलों में परम्परागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। खेती किसानी में पशुधन का उपयोग के प्रमाण प्राचीन समय से मिलते हैं। भारतीय संस्कृति में पशु पूजा की परम्परा रही है, इसके प्रमाण सिन्धु सभ्यता में भी मिलते हैं। पोला मुख्य रूप से खेती-किसानी से जुड़ा त्यौहार है। भादों माह में खेती किसानी का काम समाप्त हो जाने के बाद अमावस्या को यह त्यौहार मनाया जाता है। चूंकि इसी दिन अन्न माता गर्भ धारण करती है अर्थात धान के पौधों मंे इस दिन दूध भरता है। इसीलिए यह त्यौहार मनाया जाता है यह मूलतः किसानों का त्यौहार पोला पर महिलाओं, पुरूषों और बच्चों के लिए अलग महत्व रखता है।

                                                पोला पर्व के पीछे मान्यता है कि विष्णु भगवान जब कान्हा के रूप मंे धरती मंे आये थे, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी के रूप मंे मनाया जाता है, तब जन्म से ही उनके कंस मामा उनकी जान के दुश्मन बने हुए थे, कान्हा जब छोटे थे और वासुदेव-यशोदा के यहां रहते थे। तब कंस ने कई बार कई असुरों को उन्हें मारने भेजा था, एक बार कंस ने पोलापुर नामक असुर को भेजा था, इसे भी कृष्ण ने अपनी लीला के चलते मार दिया था और सबको अचंभित कर दिया था। वह दिन भादों माह की अमावस्या का दिन था। इस दिन से इसे पोला कहा जाने लगा, इस दिन बच्चों का दिन कहा जाता है, इस दिन बच्चों को विशेष प्यार देते है।

                                                  पोला पर्व के पहले छत्तीसगढ़ मंे विवाहित बेटियों को ससुराल से मायका लाने की परंपरा है। पोला के बाद बेटियां तीज का त्यौहार मनाती है। तीज के पर्व के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सामान्य अवकाश की घोषणा की गई। पोला त्यौहार किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। किसान इस दिन धान की फसल धान लक्ष्मी का प्रतीक मानकर, अच्छी और भरपूर फसल की कामना की कामना करते हैं। इस दिन सुबह से किसानों द्वारा बैलों को नहलाकर पूजा अर्चनाकर कृषि कार्य के लिए दुगने उत्साह से जुटने प्रण लेते हैं। बैलों की पूजा के बाद किसानों और ग्वालों के द्वारा बैल दौड़ का आयोजन जाता है। छोटे बच्चे भी मिट्टी के बैलों की पूजा करते हैं। जहां उन्हें दक्षिणा मिलती हैं। गांवों मंे कबड्डी, फुगड़ी, खो-खो, पिट्टुल जैसे खेलकूद का आयोजन होता है। मिट्टी के बैलों को लेकर बच्चे घर-घर जाते हैं। यह त्योहार पशुधन संवर्धन और संरक्षण की आज भी प्रेरणा देता है।

                                       छत्तीसगढ़ धान की खेती सबसे ज्यादा होती है इसलिए यहां चावल और इससे बनने वाले छत्तीसगढ़ी पकवान विशेषरूप से बनाए जाते हैं। इस दिन चीला, अइरसा, सोंहारी, फरा, मुरखू, देहरौरी सहित कई अन्य पकवान जैसे ठेठरी, खुर्मी, बरा, बनाए जाते हैं। इन पकवानों को मिट्टी के बर्तन, खिलौने मंे भरकर पूजा की जाती है, इसके पीछे मान्यता है कि घर धनधान्य से परिपूर्ण रहे। बालिकाएं इस दिन घरों में मिट्टी के बर्तनों से सगा-पहुना का खेल भी खेलती हैं। इससे सामाजिक रीति रिवाज और आपसी रिश्तों और संस्कृति को समझने का भी अवसर मिलता है। इस दिन छत्तीसगढ़ मंे गेड़ी का जुलूस निकाला जाता है। गड़ी, बांस से बनाया जाता है जिसमें एक लम्बा बांस में नीचे 1-2 फीट ऊपर आड़ा करके छोटा बांस लगाया जाता है। फिर इस पर बैलेंस करके, खड़े होकर चला जाता है। ये एक तरह का खेल है जो छत्तीसगढ़ का पारंपरिक खेल है।

                                                   पोला का पर्व में मिट्टी के खिलौनों की खूब बिक्री होती है। गांव में परंपरागत रूप से कार्य करने वाले हस्तशिल्पी, बढ़ई एवं कुम्हार समाज के लोग इसकी तैयारी काफी पहले से करना शुरू कर देते हैं। इस त्योहार से उन्हें रोजगार भी मिलता है, लोग मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते हुए एक दूसरे के घरों में मिष्ठान पहुंचाते हैं। इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में मितान बदने की भी परम्परा है। एक दूसरे के घरों में मेल मिलाप के लिए जाते हैं। यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी हमें मजूबत करता है।

 

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :

ADs