खाटू श्याम पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र हैं और इनका असली नाम बर्बरीक है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को खाटू श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस तिथि को देवउठनी एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। खाटू श्यामजी को भगवान कृष्ण का कलयुगी अवतार बताया गया है। जो कोई भी खाटू श्याम महाराज के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। खाटू श्याम पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र हैं और इनका असली नाम बर्बरीक है। खाटू श्याम के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हम आपको बताने जा रहे हैं, ऐसी 6 अनसुनी बातें, जो आप नहीं जानते होंगे...
बर्बरीक, जिनको खाटू श्याम के नाम से भी जाना जाता है, वे देवी माता के बहुत बड़े उपासक हैं। देवी मां के वरदान से उनको तीन दिव्य बाण की प्राप्ति हुई थी, जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस आ जाते हैं। इसलिए बर्बरीक अजेय थे। वे अपने पिता घटोत्कच से भी ज्यादा मायावी और शक्तिशाली हैं। खाटू श्याम बाबा दुनिया के सबसे बेहतरीन धनुर्धर भी हैं, उनसे बड़े धनुर्धर केवल श्रीराम हैं। यहां तक कि वे महाभारत के अर्जुन और कर्ण से भी बड़े धनुर्धर हैं।
खाटू श्याम का मंदिर बहुत प्राचीन है लेकिन वर्तमान मंदिर की आधारशिला साल 1720 में रखी गई थी। इतिहासकार बताते हैं कि औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। उस समय मंदिर की रक्षा के लिए कई राजपूतों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया। वर्तमान में यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में खाटू नामक जगह पर स्थिति है इसलिए इनको खाटू श्याम कहा जाता है। यहां केवल खाटू श्याम के सिर की पूजा की जाती है, यहां मूर्ति का धड़ नही है।
युद्ध खत्म होने के बाद पांडवों में जीत का श्रेय लेने के लिए होड़ मच गई। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि इसका निर्णय केवल बर्बरीक का सिर ही कह सकता है। तब बर्बरीक ने कहा कि युद्ध में दोनों तरफ से केवल श्रीकृष्ण का सुदर्शन ही चल रहा था और द्रौपद महाकाली के अवतार में चारों तरफ रक्त पान कर रही थीं। अंत में भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को वरदान दिया की कलयुग में तुम्हारी पूजा मेरे नाम श्याम से की जाएगी और तुम्हारा नाम लेने से मात्र से कलयुग भक्तों का कल्याण होगा और सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

रायपुर /// २४/११/२०२३////खाटू श्याम के जन्मोत्सव पर श्री श्याम मासिक एकादशी निशान यात्रा गुढ़ियारी द्वारा 26वीं निशान यात्रा रजत उत्सव के साथ निशान यात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली गई। श्याम भक्त हाथों में ध्वजाएं और महिलाएं केसरिया परिधान में पुरुष राजस्थानी वेशभूषा में श्याम भजन गाते हुए मस्ती में झूमते चल रहे थें । इस दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। निशान यात्रा में खाटू श्याम के जयकारों से नगर का माहौल श्याममय हो गया।
यात्रा प्रारंभ स्थल प्राचीन गुढ़ियारी हनुमान मंदिर पर बाबा श्याम का लकी खजाना श्याम भक्तों को प्राप्त हुआ तथा आतिशबाजी की गई, श्याम भजन गायक सचिन खंडेलवाल द्वारा भक्तों को श्याम भजन अमृत भजनों से आनंदित किया गया जिसमें भक्तों ने श्याम भजन व पूजन भक्ति में लीन हो गए। बाबा श्याम को इत्र से स्नान करवाकर गुलाब, चंपा, चमेली सहित अनेक प्रकार के फूलों के बने गजरों से छत्तीसगढ़ में प्रथम बार खाटू श्याम की तर्ज पर पालकी सजाई गई जिस पर खाटू के राजा खाटू श्याम को विराजमान कर छप्पन भोग फल भोग इत्र वर्षा पुष्प वर्षा कर नगर भ्रमण कराया गया। मेवा-मिश्री मिठाई और केक काटकर बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया गया।
यात्रा आरंभ करने के पूर्व श्याम भक्तों ने मिलकर आरती व पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस मौके पर शहर के कई गणमान्य श्याम प्रेमी महिला पुरुष बच्चे आदि मौजूद रहे। इस कार्यक्रम को पूर्ण रूप देने के हेतु श्याम दीवानी प्रीति अभिषेक अग्रवाल मोहन अग्रवाल पल्लव अग्रवाल सुमित अग्रवाल अमित लाहोटी रामनारायण अग्रवाल महेश अग्रवाल मिलन अग्रवाल नितेश शैंकी अभिषेक अग्रवाल निरंतर अग्रसर रहे।
श्याम का दीवाना ,,, अभिषेक अग्रवाल
श्री श्याम मासिक एकादशी निशान यात्रा गुढ़ियारी रायपुर




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Softfix Technologies OPC Pvt. Ltd
Comments