शाहजहांपुर 29/11/2023/// एक ओर यहां लोग कहते हैं कि खेती अब फायदे का सौदा नहीं रहा, वही शाहजहांपुर का एक युवा किसान जो बीटेक (B.tech) की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता के साथ मिलकर खेती कर रहा है और अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट उगाकर लाखों रुपए की कमाई कर रहा है. यह युवा किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के मामले में उत्तर भारत के सबसे बड़े किसानों में से एक है.
(11).jpg)
शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद तहसील का रहने वाले अंशुल मिश्रा ने वर्ष 2019 में चेन्नई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई पूरी की. बीटेक के बाद नौकरी करने के बजाय अपने गांव लौट आया. अंशुल मिश्रा ने बताया कि 2018 में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने खेती में कुछ नया करने का मन बनाया. इसके बाद इंटरनेट पर खेती के नए-नए तरीकों को खोज और तय किया कि वह अपनी पुश्तैनी जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती करेगा.

बंजर जमीन में ड्रैगन फ्रूट लगाकर किया था ट्रायल
अंशुल मिश्रा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उन्होंने महाराष्ट्र से 1600 पौधे खरीदे और उनको अपनी एक एकड़ बंजर जमीन पर लगा दिया. इसके बाद उनको ड्रैगन फ्रूट से अच्छी कमाई होने लगी और धीरे-धीरे उन्होंने अब अपने पांच एकड़ खेत में ड्रैगन फ्रूट के करीब 25000 पौधे लगाए हैं. अंशुल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस साल 5 एकड़ में 9 लाख रुपए के ड्रैगन फ्रूट के फल बेचे हैं.
चिलौआ मॉडल से भी कर रहे हैं ड्रैगन फ्रूट की खेती
अंशुल मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर पोल या रिंग मॉडल से ही ड्रैगन फ्रूट को उगाया जाता है लेकिन उन्होंने एक नया प्रयोग किया. जिसमें उन्होंने वर्टिकल गार्डनिंग भी की जिसमें दीवारों के सहारे कई लेयर में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं. इसके अलावा उन्होंने बाउंड्री वॉल के किनारे भी पौधे लगाकर उनसे फल ले रहे हैं.

नर्सरी से भी हो रही लाखों की कमाई
अंशुल मिश्रा ने बताया कि वह ड्रैगन फ्रूट का फल बेचने के साथ-साथ नर्सरी तैयार कर किसानों को बेचते हैं. अंशुल का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट में साल में करीब सात बार फल आता है और नर्सरी को पूरे वर्ष भर तैयार करते हैं. इस बार उन्होंने 20000 के करीब ड्रैगन फ्रूट के पौधे तैयार कर बेचा है. जिससे उन्होंने करीब 7 लाख रुपए की कमाई की है. अंशुल का कहना है वह किसानों की आय को बढ़ाने के लिए उनको ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रेरित करते हैं. इसके अलावा किसानों को पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका ड्रैगन फ्रूट को तैयार करने के लिए भी समय-समय पर जानकारी देते हैं.
.चिलौआ मॉडल से भी कर रहे हैं ड्रैगन फ्रूट की खेती
अंशुल मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर पोल या रिंग मॉडल से ही ड्रैगन फ्रूट को उगाया जाता है लेकिन उन्होंने एक नया प्रयोग किया. जिसमें उन्होंने वर्टिकल गार्डनिंग भी की जिसमें दीवारों के सहारे कई लेयर में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं. इसके अलावा उन्होंने बाउंड्री वॉल के किनारे भी पौधे लगाकर उनसे फल ले रहे हैं.

नर्सरी से भी हो रही लाखों की कमाई
अंशुल मिश्रा ने बताया कि वह ड्रैगन फ्रूट का फल बेचने के साथ-साथ नर्सरी तैयार कर किसानों को बेचते हैं. अंशुल का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट में साल में करीब सात बार फल आता है और नर्सरी को पूरे वर्ष भर तैयार करते हैं. इस बार उन्होंने 20000 के करीब ड्रैगन फ्रूट के पौधे तैयार कर बेचा है. जिससे उन्होंने करीब 7 लाख रुपए की कमाई की है. अंशुल का कहना है वह किसानों की आय को बढ़ाने के लिए उनको ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रेरित करते हैं. इसके अलावा किसानों को पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका ड्रैगन फ्रूट को तैयार करने के लिए भी समय-समय पर जानकारी देते हैं.




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments