रायपुर//
दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी पर जमीन की अदला बदली को लेकर की गईं अनियमितताएं
की शिकायत सरकार के पास है शिकायत में मुख्य रूप से राजस्व प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
है,जेसे आरोप हें , तत्कालीन आईएएस ओपी चौधरी के रहते
3:30 एकड़ कीमती भूमि की अदला बदली को लेकर उस वक्त भी कांग्रेस द्वारा इस पर आंदोलन
किया था जांच की मांग भी की गई थी सरकार ने उसी वक्त जांच आयोग बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था ओपी
चौधरी ने रायपुर कलेक्ट्री भी की हे यहन भी वो चर्चित कलेक्टर थे की फिर अचानक भयानक तरीके से वो
शाह के सामने रमन सिंह की
उपस्थिति उपस्थित हो गए उन्होने भा जा पा की
विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली मतलब पक्की रसीद कटा ली गई चौधरी जी अचानक साहब से नेता हो
गए नेता का भव्य स्वागत भी हुआ सीनियर बीजेपी के नेताओं ने कहा कि चोधरी जी युवाओं के आईकॉन बनकर भा जा पा की
बेतरणी पर करेंगे चौधरी जी ने अपने
उत्क्रष्ट भाषण में भी कहा था कि मैं अपनी
माटी की सेवा करने के लिए राजनीति में आया हूं बयान अपने आप में कॉफी विरोध भाषी लगा रहा था राजनीती के पहले
ओपी चौधरी
जिस कुर्सी पर बैठे थे वहां से वास्तव में वो पीड़ितों को राहत दिला कर अपनी
माटी के दर्द को भुला सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया उनका कहना था कि मैं धोती
कुर्ता पहन कर गले में दुपट्टा डालकर ही माटी की सेवा कर सकूंगा |
दरसल
मामला कीमती भूमि का था बबल तो मचना ही था दंतेवाडा भूमि प्रकरण में दोनों पार्टिओं के दबंग छुट भैया नेताओं की आपसी
रंजिश ने मामले को आम जन तक पंहुचा दिया साफ छवि की दावेदारी करने वाले ओ पी चोधरी को दंतेवाडा से हटा
दिया गया |
सरकार बदल गई कांग्रेस की सरकार ने अपनी पुरानी मांगों पर की
गई कार्यवाही के अनुसार जांच प्रक्रिया को तेजी से लाने के निर्देश दिए इसी
कड़ी में राज्य शासन ने दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी के कार्यकाल में हुए
जमीन घोटाले की जांच के लिए वन विभाग के अपर सचिव सीके खेतान की अध्यक्षता में
जांच आयोग का गठन किया है जांच के तीन बिंदु भी तय कर लिए गए हैं आयोग को 3 माह के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट
राज्य शासन को देना है मामला टाइम बौंड है |
सरकार के पास जो शिकायत है उसमें कहा गया है की यह पूरा मामला
बहुत ही जल्दबाजी में किया गया है उदाहरण भी दिए है की एक ही दिन में जमीन का
नामांतरण भी कर दिया गया ऐसे बहुत से बिंदु हैं जिन पर जांच आयोग जांच कर 3 महीने में शासन को अपनी समीक्षा
रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने भी 15
सितंबर 2016 को चमरू राम कर्मा व अन्य की ओर
से दायर पीआईएल पर दंतेवाड़ा जिले के राजस्व भूमि की अदला-बदली के संबंध में बरती
गई जल्दबाजी पर तत्कालीन दंतेवाड़ा कलेक्टर और तहसीलदार की निष्ठा को संदेश आते
हुए उनके विरुद्ध जांच करने के आदेश छत्तीसगढ़ शासन को दिए थे इसके अनुपालन में
राज्य शासन द्वारा यह जांच आयोग आयोग गठित किया गया था मामला बहुत ही दिलचस्प है
दंतेवाड़ा जमीन अदला -बदली प्रकरण 2011 से 2013 के बीच का है उस वक्त ओपी चौधरी
दंतेवाड़ा के कलेक्टर हुआ करते थे जिला पंचायत दंतेवाड़ा के बगल में एक किसान
बैजनाथ से 4 लोगों ने
मिलकर 3 पॉइंट 6 एकड़ भूमि कृषि भूमि खरीदी इसमें
मोहम्मद साहिल हमीद कैलाश गुप्त मुकेश वर्मा और प्रशांत अग्रवाल शामिल थे 2011 में चौधरी जी दंतेवाड़ा कलेक्टर
बन कर आए और 2013 में पटवारी राजस्व निरीक्षक तहसीलदार और एसडीएम ने मिलकर 15 दिन के भीतर चारों की जमीन को के
बदले सरकारी भूमि देने की प्रक्रिया पूरी कर डाली |




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