दिव्य-दूत

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बारनवापारा अभ्यारण से काले हिरण गायब

Anil Choubey 16-05-2019 19:11:42


महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बारनवापारा के अनुकुलन केंद्र  से 14 काले हिरण गायब हो गए हैं, जब हिरणों की गिनती की गई तो पता चला की की 14 हिरन गायब हें बहुमूल्य प्रजाति के हिरणों के गायब होने की खबर से वन विभाग में हडकंप है  उच्च अधिकारिओं ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए  एसडीओ स्तर के दो अधिकारियों की टीम जांच करने लग  गई है।

पर्यटकों को लुभाने के लिए दिल्ली से 77 काले हिरण नौ माह पहले बारनवापारा में लाए गए थे। इनमें से वातावरण अनुकूलन  नहीं मिलने के कारण 11 हिरणों की पहले ही मौत हो चुकी है।

इस तरह वहां 66 हिरण होने चाहिए थे लेकिन अप्रैल में की गई गणना के मुताबिक उनकी संख्या महज 52 है। बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों को लाने से पहले बकायदा दो करोड़  रुपये खर्च करके अनुकूलन केंद्र बनाया गया था, अनुकूलन बार में 27 और 50 काले हिरण अगस्त 2018 में लाए गए थे।

जिसमे  11 हिरणों की मौत हो गई थी , उनका रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट वन विभाग के पास मौजूद है. अप्रैल में हुई गिनती में  14 काले हिरणों की कमी ने  वन विभाग तत्कालीक पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एससी अग्रवाल ने बारनावापारा जाकर अनुकूलन केंद्र का निरीक्षण किया। वहां पदस्थ अधिकारी गायब काले हिरणों के बारे में  जवाब नहीं दे पाए।

14 गायब काले हिरणों का पता लगाने के लिए पिथौरा के एसडीओ फॉरेस्ट आरएस मिश्रा और बलौदाबाजार के एसडीओ यूएस ठाकुर की दो सदस्यीय टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच टीम ने भी अनुकूलन केंद्र में जाकर फिर से काले हिरणों की गिनती की तो संख्या 52 ही पहुंची। इससे पहले दिल्ली से यहां लाए गए प्रत्येक काले हिरण के चालान भी जांच टीम को अभी तक नहीं मिले हैं, जबकि यह अनुकूलन केंद्र प्रभारी के पास होने चाहिए।

काला हिरन यह कृष्णमृग बहुसिंगा की प्रजाति है जो भारतीय उपमहाद्वीप में पायी जाती है। काला हिरन बहुसिंगा प्रजाति की इकलौती जीवित जाति है।

काला हिरन जिसे भारतीय मृग के रूप में भी जाना जाता है, यह भारत, नेपाल और पाकिस्तान में पाए जाने वाली एक हिरण की प्रजाति है। कला हिरन जीनस एनिलिओप का एकमात्र मौजूदा सदस्य है प्रजातियों को काला हिरन एक दैनंदिनी एनलॉप है (मुख्य रूप से दिन के दौरान सक्रिय)। तीन प्रकार के समूह, आम तौर पर छोटी, मादाएं, पुरुष और स्नातक झुंड होते हैं। नर अक्सर संभोग के लिए महिलाओं को जुटाने के लिए एक रणनीति के रूप में लेकिंग नामक तरिके को अपनाते हैं। इनके इलाकें में अन्य नरों को अनुमति नहीं होती है, मादाएं अक्सर इन स्थानों पर भोजन के लिये घूमने आती हैं। पुरुष इस प्रकार उनके साथ संभोग का प्रयास कर सकते हैं। मादाएं आठ महीनों में यौन के लिए परिपक्व हो जाती हैं, लेकिन संभोग दो साल से पहले नहीं करती हैं। नर करीब 1-2 वर्ष मे परिपक्व होते है। संभोग पूरे वर्ष के दौरान होता है। गर्भावस्था आम तौर पर छह महीने लंबी होती है, जिसके बाद एक बछड़ा पैदा होता है। जीवन काल आमतौर पर 10 से 15 साल होती है।

काला हिरन घास के मैदानों और थोड़ा जंगलों के क्षेत्रों में पाएँ जाते हैं। पानी की अपनी नियमित आवश्यकता के कारण, वे उन जगहों को पसंद करते हैं जहां पानी पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध हो।

यह मृग मूलतः भारत में पाया जाता है, जबकि बांग्लादेश में यह विलुप्त हो गया है। इनके केवल छोटे, बिखरे हुए झुंड आज ही देखे जाते हैं, तथा बड़े झुंड बड़े पैमाने पर संरक्षित क्षेत्रों तक ही सीमित होते हैं। 20 वीं शताब्दी के दौरान, अत्यधिक शिकार, वनों की कटाई और निवास स्थान में गिरावट के चलते काले हिरन की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। ब्लैकबक अर्जेंटीना और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाये जाते हैं। भारत में, 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अनुसूची I के तहत काला हिरन का शिकार निषिद्ध है। हिंदू धर्म में काला हिरन का बहुत महत्व है; भारतीय और नेपाली ग्रामीणों ने मृग को नुकसान नहीं पहुंचाया।

नर और मादा अलग-अलग रंग के होते हैं। इसकी कद-काठी इस प्रकार है:-
लंबाई - १००-१५० से.मी.
कंधे तक ऊँचाई - ६०-८५ से.मी.
पूँछ की लंबाई - १०-१७ से.मी.
वज़न - २६-३५ कि.
इसके सींग में छल्लों जैसे उभार होते हैं। इसके सींग पेंचदार होते हैं जिनके १-४ घुमाव होते हैं। अमूमन ४ से अधिक घुमाव नहीं पाये जाते हैं। सींगों की लंबाई ७९ से.मी. तक हो सकती है। नर में ऊपरी शरीर का रंग काला (या गाढ़ा भूरा) होता है। निचले शरीर का रंग और आँख के चारों तरफ़ सफ़ेद होता है। मादा हल्के भूरे रंग की होती है।

 

 

 

 

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